Special Story By : Anita Tiwari , Dehradun

Dhami Government 2022 में अप्रत्याशित रूप से पार्टी को जिताया , दो बार एक ही पार्टी की प्रदेश में सरकार दोहराया , खुद हार कर भी प्रचंड बहुमत दिलाया , सीधे पीएम मोदी से आशीर्वाद लेकर शपथ ली और खटीमा की हार का चम्पावत में अभूतपूर्व रिकॉर्ड तोड़ जीत पाकर पांच साल का ताज बचाया , ये कई नेताओं की उपलब्धि नहीं , ग्रह नक्षत्र और राजयोग के धनी धामी की कहानी है।
Dhami Government सबकी नजर ट्रांसफर लिस्ट और दर्जा हासिल करने पर

Dhami Government अक़्सर ऐसा लगता है जैसे मुख्यमंत्री धामी पीएम मोदी की तरह शासन चलाना चाहते हैं तो कभी उनके फैसले और बयानों से यूपी के बुलडोज़र बाबा का प्रभाव नज़र आता है। इन सबके बीच सीएम पुष्कर को केंद्र सरकार और पार्टी के आलाकमान की शाबासी ने जैसे प्रदेश में अभयदान दे दिया है कि वो आज़ादी के साथ अपने सियासी फैसले ले सकें ।

- Dhami Government ये मौजूदा दौर कुछ खास लोगों के दिये टाइटल धाकड़ धामी का नज़र आता है इसमें फिलहाल कोई शक़ नहीं है। लेकिन आली जनाब ये पहाड़ की सियासत है।यहां दावे से आप अपना सियासी दोस्त किसी को भी नहीं कह सकते हैं क्योंकि यहां के गाड़ गदेरे और कस्बों की सियासत में भी महत्वाकांक्षी नेताओं की फौज कुलांचे भरती है।

- Dhami Government बात अब मुद्दे की करते हैं जो दो लिस्ट से जुड़ी है । सचिवालय में निम्बू की गर्म प्याली गटकते वरिष्ठ नौकरशाह हों या भाजपा मुख्यालय के कहकहों से कोलाहल मचाते कमरों के बयान बहादुर नेता हों , दोनों ही तरफ उस लिस्ट की चर्चा दबी जुबान हो रही है जिसकी गुणा गणित देर रात साहब की मेज पर गोलबंद खास लोग नफे नुकसान और फायदे मुनाफे के मुताबिक ऊपर नीचे कर फीड बैक के साथ दे रहे हैं। मलाईदार पोस्टिंग तो अलग मुद्दा है, फिलहाल तलाश की गई है , कर्मठ , वफादार, भरोसेमंद और सबसे बड़ी बात कि बेदाग छवि के अफसरों की , जिन्हें छांट कर उन्हें सही कुर्सी पर जमाना ज़रूरी है जिससे दून से दिल्ली तक प्रशासनिक डेंटिंग पेंटिंग का बेहतरीन संदेश दिया जाए। फिर फीडबैक और खाता बही उन साहबों की जिनके ऊपर सवाल है , संशय और शुभा है उनकी लिस्ट भी लगभग तैयार ही है ग़ालिबन जल्द मंजर ए आम होगी।

- Dhami Government जिलाधिकारी से कप्तान और सचिव से लेकर वरिष्ठ सचिव तक सबका नंबर आएगा क्योंकि धामी अपने कड़े प्रशासनिक तेवर का ट्रेलर दिखा ही चुके हैं। मंत्रियों के सौ दिन का टारगेट भी सामने है ऐसे में उनकी रायशुमारी भी ली ही गयी होगी । मंत्री रेखा आर्य हों या महाराज या फिर सुबोध उनियाल , अक्सर अपने विभागीय अधिकारियों से असंतुष्ट होने का इशारा कर ही देते हैं। ऐसे में भी संभव है कि IAS इधर उधर हों।

- Dhami Government अब बात दर्जा धारण करने के लिए अचकन सिलवाने वाले पार्टी नेताओं की तो यहाँ टेंशन ज्यादा है । 2017 से 22 तक तीन सीएम आये और गए , सबने अपने चश्मे से रेवड़ी का साइज नापा और बांटा था। लेकिन अब नया दौर है नई उम्मीदें और नौजवान सीएम धामी है।चंपावत का ख्याल रखना है तो खटीमा को भी मनाना है। गढ़वाल कुमायूँ भी है तो ठाकुर ब्राह्मण भी साधना है। ऐसे में आयोग , समिति , बोर्ड में जब दावेदारों की फौज है तो मुकाबला भी कड़ा है। लेकिन यहां चलेगी तो सीएम की ही क्योंकि ये तो अध्यक्ष मदन कौशिक भी जानते हैं कि चमत्कार को ही नमस्कार करते हैं।
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