Special Story By – Ashish Tiwari , Dehradun
Dhami is Back उत्तराखंड में भले ही भारतीय जनता पार्टी के मौजूदा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चुनाव हार गए हो लेकिन अंदर की खबर यह है कि मोदी और शाह के साथ नड्डा का भी आशीर्वाद धामी को प्राप्त है … लिहाजा एक बार फिर पुष्कर सिंह धामी ही प्रदेश की कमान संभाल सकते हैं ।
Dhami is Back उप चुनाव लड़ सकते हैं धामी

इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि अंदरूनी तौर पर जिस तरह से भाजपा ने चुनाव के पहले सर्वे कराया था तो प्रदेश में तीरथ और त्रिवेंद्र के हटने के बाद पार्टी के खिलाफ पहाड़ में काफी नाराजगी थी। जिसकी वजह से पार्टी को सर्वे में 10 से 15 सीट ही मिलती नजर आ रही थी। लेकिन पुष्कर सिंह धामी के सत्ता संभालते ही समीकरण बदले, पार्टी के प्रति लोगों में आस्था जुड़ी और सरकार ने कामकाज भी तेज किया.… Dhami is Back जिसका असर यह रहा कि चुनाव में जनता ने भाजपा की पूर्ण बहुमत की एक बार फिर प्रदेश में सरकार बनाते हुए उस मिथक को तोड़ दिया जिसमें कहा जाता था कि कोई भी पार्टी अभी तक प्रदेश में सत्ता में रहते दोहरायी नहीं गई है ।

अब बात कर लेते हैं अगर Dhami is Back पुष्कर सिंह धामी फिर से मुख्यमंत्री बनते हैं तो उनके संभावित नए मंत्रिमंडल में कौन कौन से चेहरे शामिल हो सकते हैं –

सतपाल महाराज , मुन्ना सिंह चौहान , किशोर उपाध्याय , मदन कौशिक , अरविंद पांडे
रितु खंडूरी , गणेश जोशी , खजान दास , उमेश शर्मा काऊ , विनोद चमोली




Dhami is Back इसके साथ कुछ नाम कुमायूं के शामिल किए जा सकते हैं जिनका प्रभाव पहाड़ों में नज़र आता है।
Dhami is Back वही बात करें विधानसभा अध्यक्ष की तो बहुत संभावना है कि सीनियर विधायक बंशीधर भगत को उत्तराखंड में 2022 विधानसभा के लिए भाजपा अपना विधानसभा अध्यक्ष नियुक्त कर सकती है।लेकिन ये अभी मीडिया और पार्टी में कयास भर हैं लेकिन असली मुद्दा तो पांच साल एक ही मुख्यमंत्री को सफल कार्यकाल पूरा करने का है।
Dhami is Back गंगोत्री सीट का मिथक बरकरार

गंगोत्री विधानसभा सीट जुड़ा मिथक बरकरार है। त्रिकोणीय मुकाबले में इस सीट से भाजपा के सुरेश चौहान ने जीत हासिल की है। जबकि सरकार बनाने के लिए बहुमत भी भाजपा के पक्ष में आया है। गंगोत्री को लेकर मिथक है कि जिस पार्टी का प्रत्याशी चुनाव जीतता है। उसी दल की सरकार बनती है। हालांकि, इस बार आम आदमी पार्टी से कर्नल अजय कोठियाल के चुनाव लड़ने से त्रिकोणीय मुकाबले रहने के आसार बने थे, लेकिन आप कुछ खास करिश्मा नहीं कर पाई है। 2002 और 2012 के चुनाव में यहां से कांग्रेस के विजयपाल सजवाण ने जीत हासिल की और कांग्रेस की सरकार बनी। जबकि 2007 और 2017 में भाजपा के गोपाल सिंह चुनाव जीते तो भाजपा की सरकार बनी। इस बार कांग्रेस के विजय पाल सजवाण को हार का मुंह देखना पड़ा। भाजपा के सुरेश चौहान ने जीत हासिल की है।
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