Divine Feminine हमारी सृष्टि में दो तरह की ऊर्जा काम करती है, चाहे वो प्रकृति हो या मनुष्य , पहली ऊर्जा सृजन के लिये उत्तरदायी होती है जिसे ‘दिव्य-स्त्री शक्ति/ऊर्जा कहते हैं जबकि दूसरी ऊर्जा कर्म प्रधान होती है जिसे ‘दिव्य-पुरुष शक्ति/ऊर्जा (डिवाइन मैस्कुलिन एनर्जी)’ कहते हैं। इन दोनों ही ऊर्जाओं के संतुलन से ये पूरी सृष्टि चलती है। अगर इसमें से एक भी अपना संतुलन खो दे, तो ये सृष्टि तहस-नहस हो सकती है।
Divine Feminine क्या होती है डिवाइन फेमिनिन एनर्जी?

- Divine Feminine आपने ये सुना होगा कि ‘शक्ति’ के बिना ‘शिव’ अधूरे हैं। ये कहने का अर्थ यही है कि शरीर के सुचारू रूप से संचालन के लिए उनमें ‘शिव और शक्ति’ यानि ‘पुरुष-ऊर्जा और स्त्री-ऊर्जा’, दोनों का संतुलन आवश्यक है। यही अवधारणा समान रूप से साधारण मनुष्य पर भी लागू होती है। हर मनुष्य लिंग से चाहे वो लड़का हो या लड़की हो, उनका आधा अस्तित्व स्त्री-ऊर्जा और आधा पुरुष-ऊर्जा से बना है। ये दिव्य-ऊर्जाएं आपके शरीर में समान रूप से बंटी हैं और आपके संपूर्ण अस्तित्व का निर्माण करती हैं।Divine Feminine क्या होती है डिवाइन फेमिनिन एनर्जी ?

- Divine Feminine आपके अंदर दया, करुणा, रचना या सृजन से जुड़ी जो भी शक्ति होती है, वो स्त्री-ऊर्जा पैदा करती है। आपका शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक, भावनात्मक सभी विकास स्त्री-ऊर्जा ही करती है। हमारे अंदर की ‘शक्ति-ऊर्जा’ ही ‘प्राण-ऊर्जा’ है, जो हमारे जीवन को संचालित करती है। आपमें अगर इन दोनों दिव्य-ऊर्जाओं के बीच थोड़ा भी असंतुलन पैदा होता है, तो आपका शरीर कई कष्टों से गुजरने लगता है, खासकर दिल से जुड़ी चीजें।
Divine Feminine हम दिनोंदिन अपनी ‘दिव्य स्त्री-शक्ति’ को दबाते जा रहे हैं
- Divine Feminine हम दिनों दिन अपनी ‘दिव्य स्त्री-शक्ति’ को दबाते जा रहे हैं या कमजोर करते जा रहे हैं। यह दिव्य स्त्री-शक्ति हमारे अंदर ही है लेकिन हम इसका अनुभव नहीं कर पा रहे। आज के मौजूदा सामाजिक तानेबाने में बहुत ज़रूरी है कि हम और आप अपने अंदर की इस दिव्य शक्ति को जाग्रत करें क्योंकि सोई हुए शक्ति व्यर्थ हो जाती है और वक्त गुज़र जाने के बाद हमको जीवनभर इस सच्चाई से पछतावा ही होगा
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