Osla Village Uttarakhand देवभूमि की अनोखी कहानियों और मान्यताओं से जुड़ी एक रोचक जानकारी आज हम आपसे साझा कर रहे हैं। इसके लिए आपको एक खूबसूरत ओसला गाँव की कहानी बता रहे हैं जहाँ पहाड़ों से घिरा एक बेहद सुंदर गाँव है। ओसला गाँव उत्तराखंड के रिमोट इलाक़ों में से एक है। सर्दियों में यहाँ जमकर बर्फ़बारी होती है और बारिश में पहाड़ की यात्रा नहीं करनी चाहिए। अगर आप हरियाली का मज़ा लेना चाहते हैं तो मई-जून ओसला जाने का अच्छा समय होता है। इसके अलावा बर्फ़बारी के लिए आप सर्दियों के मौसम में यहाँ जा सकते हैं। ओसला में आपको ठहरने में ज़्यादा दिक़्क़त नहीं होगी क्योंकि इस गाँव में कई सारे होमस्टे हैं जिनमें आप ठहर सकते हैं। अगर आपको रोमांच और ऐसे शानदार गाँव को देखना पसंद है तो एक बार ओसला गाँव की यात्रा का प्लान ज़रूर बनाइए।
देवभूमि के ओसला गाँव में होती है दुर्योधन की पूजा Osla Village Uttarakhand

ओसला वो गाँव है जहां पांडवों की नहीं कौरवों के दुर्योधन की पूजा होती है। इस गाँव तक पहुँचना आसान नहीं है लेकिन सबसे सुंदर दृश्य सबसे कठिन रास्तों पर ही देखने को मिलते हैं। पहाड़ों और सेब के पेड़ों से घिरा ओसला गांव समुद्र तल से 3,500 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले में स्थित ओसला गाँव गोविंद नेशनल पार्क में आता है। इस गाँव तक पहुँचने के लिए आपको सांकरी में अनुमति लेनी होती है। लगभग 5 हज़ार साल पुराना ओसला गाँव हर की दून ट्रेक के रास्ते में मिलता है। तालुक़ा गाँव से ओसला लगभग 14 किमी. की दूरी पर स्थित है। आपको एक बार उत्तराखंड के इस खूबसूरत गाँव की यात्रा तो करनी ही चाहिए।

ओसला के पास में ही एक शानदार स्वर्गरोहिणी चोटी है। कहा जाता है कि महाभारत के युधिष्ठिर एक कुत्ते के साथ इसी चोटी से स्वर्ग गए थे। इस इलाक़े को महाभारत काल के लिए भी जाना जाता है। कहा जाता है कि ओसला गाँव में दुर्योधन की पूजा होती है, इसके पीछे एक कहानी है। कहा जाता है कि दुर्योधन ओसला गाँव पहुंचा तो उसे गाँव के संरक्षक महासू देवता के बारे में पता चला। दुर्योधन ने महासू देवता को प्रसन्न किया और बदले में महासू देवता ने दुर्योधन को गाँव सौंप दिया। दुर्योधन ने गाँव का लोगों की रक्षा की और ख़्याल रखा। गाँव के लोगों ने दुर्योधन का मंदिर बनवाया और उसकी पूजा अर्चना शुरू कर दी।

ओसला गाँव पहुँचने के लिए आपको हर की दून के ट्रेक का प्लान बनाना होगा। इसके लिए आपको पहले सांकरी गाँव पहुँचना होगा। फ़्लाइट और ट्रेन से सबसे पहले आपको देहरादून पहुँचना होगा। देहरादून से सांकरी गाँव 200 किमी. की दूरी पर है। आप बस से सांकरी गाँव पहुँच सकते हैं। सांकरी गाँव से आपको तालुक़ा गाँव जाना पड़ेगा जो सांकरी से 11 किमी. की दूरी पर है। तालुक़ा से ही हर की दून का ट्रेक शुरू होता है। नदियों और जंगलों से गुजरने वाला ये ट्रेक बेहद खूबसूरत है। तालुक़ा से लगभग 15 किमी. की दूरी पर ओसला गाँव स्थित है। ओसला गाँव में लगभग 250 घर है।

