Ghotul Tradition Tribe भारत की प्राचीन परंपराएं इसे और समृद्ध बनाती हैं। शादी का जो तरीका आज कई देश अपना रहे हैं वो कल्चल भारत के एक समुदाय के पास बहुत पहले से ही मौजूद था। घोटुल एक ऐसी परंपरा है, जो जीवनसाथी चुनने के आधुनिक युग वाले ट्रेंड से मेल खाती है। जहां सात दिन तक युवक और युवतियों अपने जीवन साथी खोजने लिए रात बिताते हैं।
Ghotul Tradition Tribe क्या है घोटुल परंपरा ?

- Ghotul Tradition Tribe विविधताओं से भरे देश में कुछ ऐसी परंपराएं हैं जिनके बारे देश के दूसरे कोने में बैठे लोगों को पता तक नहीं है। ऐसी एक अनोखी विवाह की प्रथा है घोटुल है। भारत की विवाह की परंपराओं की जब भी बात होगी तो घोटुल का जिक्र जरूर होगा। छत्तीसगढ़ में मुरिया समुदाय में शादी की येअहम प्रथा है। जनजाति के पास ‘घोटुल’ नामक एक झोपड़ी है। ये झोपड़ी मुरिया युवाओं के लिए बेहद खास है। घोटुल प्रथा में युवक और युवतियां घोटुल में रात बिताते हैं। झोपड़ी में वे गायन, नृत्य के बाद रात में अपना लिव इन पार्टन खोजते हैं।

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Ghotul Tradition Tribe घोटुल में दिन के वक्त मुरिया समुदाय के वरिष्ठ लोग भी मौजूद रहते हैं। रात होने पहले केवल युवक और युवतियां ही झोपड़ी में रहते हैं। वरिष्ठ लोग घर लौट जाते हैं। इस उत्सव में मुरिया समुदाय के वरिष्ठ जनों की उपस्थिति केवल युवाओं के मार्गदर्शन और उत्सव के लिए उन्हें प्रेरित करने के लिए होती है। रात से पहले झोपड़ी में स्वादिष्ट भोजन पकाया जाता है। जमकर होता नृत्य घोटुल में चेलिक (पुरुष) और मोटियारी (महिलाएं) सज-धज कर इकट्ठा होते हैं। विवाहित पुरुष ढोल बजाते हैं और युवा डांस और नृत्य करते हैं। इस दौरान वो एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं।

- Ghotul Tradition Tribe घोटुल परंपरा के एक प्रॉम नाइट की तरह माना जा सकता है, जो आधुनिक युग का एक नया ट्रेंड है। बदले जाते हैं कपल्स के नाम घोटुल एक ऐसी जनजातीय परंपरा है जो युवाओं के सेक्स पर खुलकर बात करने की आजादी देती है। ये मुरिया समुदाय में सदियों से होता आया है। जबकि आमतौर पर समाज में आज भी सेक्स पर खुलकर बात नहीं की जाती, जिसके तमाम दुष्परिणाम सामने आते हैं। ऐसे में कई यौन रोग सामने आए हैं, जिनका इलाज आज भी खोजा जा रहा है।
Ghotul Tradition Tribe घोटुल में शामिल होने के बाद लड़की और लड़के को नाम बदलना पड़ता है। इसकी घोषणा लड़के की ओर से लड़की की सहमति से उसके बालों में एक फूल लगाकर की जाती है। 7 दिन में चुनते हैं जीवनसाथी घोटुल में शामिल होने के लिए लड़कों और लड़कियों के लिए उम्र की सीमा निर्धारित है। इसमें लड़कों के लिए 21 वर्ष और लड़कियों के लिए 18 वर्ष निश्चित की गई है। घोटुल में कपल तब तक शादी का फैसला नहीं करते जब तक वे एक दूसरे साथ सहज महसूस नहीं करते। प्रत्येक युवक और युवती को अपना साथी चुनने के लिए 7 दिन तक झोपड़ी में रहना होता है।
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