Haridwar Kumbh 2027 हरिद्वार महाकुंभ में मिलेगी ‘हाई-टेक’ बिजली

Haridwar Kumbh 2027  वर्ष 2027 में धर्मनगरी हरिद्वार में आयोजित होने वाले ‘महाकुंभ’ को दिव्य, भव्य और आधुनिक सुविधाओं से लैस बनाने की तैयारियां अभी से युद्ध स्तर पर शुरू हो गई हैं। मेले के दौरान जुटने वाली करोड़ों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और बिजली की रिकॉर्ड मांग को देखते हुए उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने हरिद्वार के ट्रांसमिशन नेटवर्क को पूरी तरह अपग्रेड और मजबूत करने के लिए 31.54 करोड़ रुपये की भारी-भरकम निवेश परियोजना को हरी झंडी दे दी है। इस महत्वपूर्ण फैसले के तहत हरिद्वार की पांच दशक पुरानी मुख्य ट्रांसमिशन लाइनों का कायाकल्प किया जाएगा, जिससे कुंभ मेले के साथ-साथ स्थानीय औद्योगिक क्षेत्रों को भी बड़ी राहत मिलेगी।

वर्तमान में हरिद्वार की 132 केवी सिडकुल-ज्वालापुर और 132 केवी ज्वालापुर-रुड़की लाइनें अपनी क्षमता के 90 प्रतिशत से अधिक भार पर चल रही हैं। यह पूरा ट्रांसमिशन नेटवर्क करीब पांच दशक पुराना है, जो आने वाले समय में अतिरिक्त भार झेलने की स्थिति में नहीं है। सिडकुल, बहादराबाद, आईपी-4 जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों की मांग और हरिद्वार के तेजी से होते शहरी विस्तार के कारण बिजली का लोड लगातार बढ़ रहा है।

बढ़ जाएगी बिजली सप्लाई क्षमता Haridwar Kumbh 2027 

कुंभ 2027 के दौरान बिजली का कोई बड़ा फॉल्ट न हो और 24 घंटे निर्बाध आपूर्ति बनी रहे, इसके लिए पुरानी तकनीक को बदला जा रहा है।इस परियोजना के तहत 132 केवी ज्वालापुर-रुड़की और 132 केवी सिडकुल-ज्वालापुर (सर्किट-1) लाइनों के पुराने पारंपरिक तारों (Conductors) को हटाकर उनकी जगह अत्याधुनिक ‘हाई टेम्परेचर लो सैग’ (HTLS) कंडक्टर लगाए जाएंगे।इन नए हाई-टेक तारों के बिछने से ट्रांसमिशन लाइनों की बिजली ले जाने की क्षमता 2.5 गुना तक बढ़ जाएगी। भविष्य में निर्धारित सीमा से अधिक लोड बढ़ने पर भी ये तार गर्म होकर झूलेंगे (Sag) नहीं और न ही टूटने का खतरा रहेगा।

महाकुंभ के साथ उद्योगों और शहरों को मिलेगा सीधा फायदा

पिटकुल (PTCUL) अधिकारियों के अनुसार, साल 2027 के महाकुंभ में श्रद्धालुओं की संख्या के पिछले सारे रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद है। ऐसे में यह परियोजना केवल मेले की व्यवस्थाओं को ही रोशन नहीं करेगी, बल्कि हरिद्वार के सिडकुल क्षेत्र के उद्योगों, बहादराबाद और आसपास के रिहायशी इलाकों को आने वाले कई दशकों तक लो-वोल्टेज और अघोषित बिजली कटौती जैसी समस्याओं से हमेशा के लिए मुक्ति दिलाएगी।