Harish Ratwat मैंने फैसला किया है कि मैं…हरीश रावत !

Harish Ratwat आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए बजट में कोई भी प्रस्ताव होने का दावा करते हुए पूर्व सीएम हरीश रावत ने धामी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा, पिछली बरसात में आपदाग्रस्त हुए क्षेत्रों में मैं गया था. उसके बाद से आपदाग्रस्त क्षेत्रों के लोगों के पत्र, टेलीफोन और संदेश भी आ रहे हैं, समाचार पत्रों में भी बहुत कुछ छप रहा है. मैंने बजट प्रस्तावों में भी बहुत बारीकी से खोजा, मगर कुछ ठोस उपाय आपदाग्रस्त गांवों या घरों के आर्थिक विस्थापन और विस्थापन दोनों के नहीं दिखाई दिए. यहां तक कि लोग अपने संसाधन जोड़कर के कुछ सरकार की इतनी मदद मिल जाए कि उससे वह अपने पुराने बर्बाद हुए व्यवसाय को फिर से खड़ा कर सकें, उस ओर भी कोई संकेत मुझे नहीं दिखाई दिया. मेरे मन में बहुत उथल-पुथल है, मैं इन क्षेत्रों में जाना चाहता हूं.

मैं जो कुछ कहूंगा उसको सुनना पड़ेगा Harish Ratwat

आगे हरीश रावत ने कहा, राजनीति के कुछ अपने चक्कर होते हैं. यह चक्कर कुछ और फुसफुसाने लगें उससे पहले मानवीय कर्तव्य और विशेष तौर पर एक पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में मेरा दायित्व बनता है कि मैं उन प्रमुख स्थानों पर अवश्य जाऊं, जहां के लोग अब भी सरकार से बहुत कुछ अपेक्षा कर रहे हैं, ताकि उनकी अपेक्षाओं को एक और स्वर मिल सके. मैं उनकी आवाज बनना चाहता हूं. मैं जानता हूं, मैं जो कुछ कहूंगा, चुनाव के वर्ष में उसको सुनना पड़ेगा.


आगे हरीश रावत ने कहा, मैंने फैसला किया है कि मैं 23 और 24 मार्च को पहले धराली, जिला उत्तरकाशी जाऊंगा और आपदा प्रभावितों से मुलाकात करूंगा और वहां हो रहे आपदा कार्यों का जायजा लूंगा और उत्तरकाशी में प्रेस वार्ता करूंगा. वहां से आने के बाद फिर मैं रुद्रप्रयाग, थराली और कनलगढ़ घाटी में जाऊंगा और इसी बीच में मैं एक बार बांदलघाटी की तरफ भी जाऊंगा. देखते हैं वहां पुनर्निर्माण और पुनर्वास की क्या स्थिति है? कहीं ऐसा तो नहीं कि वहां भी “दिया तले अंधेरा हो रहा हो”…!!