Special Story By – Abhilash Khanduri , Uttarakhand –
Harish Rawat BJP पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी , फिर विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी और मंगलवार को भाजपा की दो महिला विधायक, पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत से मिलीं। भाजपाइयों में हरीश रावत से मिलने की इस होड़ से सियासी हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि राजनीतिक और वैचारिक रूप से ये कट्टर विरोधी आए दिन पूर्व सीएम के घर आखिर किसलिए चक्कर लगाने लगे हैं ?

Harish Rawat BJP हरीश रावत ने क्या अघोषित तौर पर भाजपा ज्वाइन कर ली ?
- Harish Rawat BJP उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री , कांग्रेस के पूर्व महासचिव , कांग्रेस आलाकमान के सबसे भरोसेमंद , राहुल गांधी के सिपहसालार और उत्तराखंड कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे हरीश रावत ने क्या अघोषित तौर पर भाजपा ज्वाइन कर ली ?

- Harish Rawat BJP प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की कभी कभी खुले मन से तारीफ करने वाले हरीश रावत की राजनीती और उनके दांव पेंच को आज तक कोई समझ नहीं पाया है। गोल्यूजी देवता की स्याह भस्म को मस्तक पर लगाने वाले और बाबा केदार में आस्था जताने वाले हरदा का सियासी दांव हमेशा दुश्मन को ही नहीं दोस्तों को भी चौंकाने वाले रहे हैं।
Harish Rawat BJP हरीश रावत की राजनीती और उनके दांव पेंच को आज तक कोई समझ नहीं पाया

- Harish Rawat BJP कुछ दिनों से मीडिया और राजनैतिक हलकों में ये अफवाह बड़ी तेज़ी से उड़ने लगी कि हरदा ने मन ही मन भाजपा की सदस्यता ले ली है और अब दिल्ली में ये एलान होना बाकी है। अब यह खबर आपको चौंका सकती है लेकिन बीते कुछ महीनों से राजनीतिक पंडितों को जिस बड़े धमाके का इंतज़ार है उसके पहले वाले इशारे हरीश रावत खेमे से मिलने लगे हैं। जिसका प्रमाण है हरीश रावत के घर भाजपा नेताओं का लग रहा मेला …… जिसके बाद अब तस्वीर साफ़ होने लगी है कि कांग्रेस की करारी हार के बाद भी उत्तराखंड में 2022 के चुनाव सञ्चालन के मुखिया के घर भाजपा के सीएम और विधायक क्या कर रहे हैं ?
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Harish Rawat BJP
हरीश रावत मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के सबसे बड़े योद्धा
- Harish Rawat BJP बीते कुछ दिनों से जिस अंदाज में हरीश रावत भारतीय जनता पार्टी और उसके उत्तराखंड के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की तारीफों में अल्फाज इस्तेमाल कर रहे थे , उससे कहीं नहीं लग रहा था कि हरीश रावत मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के सबसे बड़े योद्धा हैं। रही सही कसर बीते दिनों मुख्यमंत्री धामी का हरीश रावत के घर जाकर गुलदस्ता भेंट करना और उनसे गुप्त मंत्रणा करना भी रहा है।

- Harish Rawat BJP बात यहां तक होती तो भी ठीक था लेकिन विधानसभा अध्यक्ष बनी प्रदेश की पहली महिला अध्यक्षा रितु खंडूरी ने भी हरीश रावत से मिलने में देर नहीं की और गुलदस्ता लेकर उनके घर पहुंच गयी। सिलसिला आगे बढ़ा और एक बड़े मीडिया हाउस के व्यक्तिगत कार्यक्रम में हरीश रावत और पुष्कर सिंह धामी के साथ जिस तरह से पूर्व कांग्रेसी रहे मौजूदा कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के साथ सोफे पर बैठ कर तस्वीरें खिंचवाई उसने कांग्रेस में इस संदेह और आशंका को निर्णायक शक्ल दे दी है..
राजनीती में कभी कोई स्थाई दोस्त और दुश्मन नहीं होता है

- Harish Rawat BJP हांलाकि ये अभी कयास है और राजनीती में कभी कोई स्थाई दोस्त और दुश्मन नहीं होता है लिहाज़ा आइए जानते हैं कि आखिर हरीश रावत ने भारतीय जनता पार्टी को ज्वाइन करने का मन अगर बना भी लिया है तो उसकी क्या बड़ी वजह हो सकती है ?
Harish Rawat BJP क्या बड़ी वजह हो सकती है ?

- दरअसल आपको याद होगा कि 2022 चुनाव के पहले से ही हरीश रावत सोशल मीडिया के जरिए चुनाव लड़ने पर कभी हां कभी ना करते रहे हैं। Harish Rawat BJP उन्होंने जिस तरह से चुनाव लड़ने और ना लड़ने के साथ साथ राजनीति से सन्यास लेने की बात कही , वह अपनी जगह है। लेकिन चुनाव के मुहाने पर जिस तरह से उन्हें अलग-अलग विधानसभाओं में प्रयोग के तौर पर भेजा गया और उन्हें नाकामी मिली , उसने खाटी कांग्रेसी और ठेठ पहाड़ी हरदा को राजनैतिक तौर पर लगभग तोड़ दिया था।
हरदा पर अपने ही कांग्रेसी भाइयों का जोरदार हमला उन्हें जख्मी करने लगा
- Harish Rawat BJP नतीजों के बाद कांग्रेस खेमे में फिर उठा बयानों का तूफ़ान जिसमें चौतरफा कोई घिरा तो वो हैं हरीश रावत। मुस्लिम युनिवेर्सिटी का प्रोपोगंडा हो या टिकट बंटवारे का झोल या सल्ट से लालकुआं तक का असफल प्रयोग , हरदा पर अपने ही कांग्रेसी भाइयों का जोरदार हमला उन्हें जख्मी करने लगा।

- हमले की खास बात यह है कि जवाब देते हुए हरीश रावत ने पार्टी आलाकमान से विशेष जांच कराने और गांधी प्रतिमा के सामने राजनीतिक संन्यास लेने तक की घोषणा कर दी थी। Harish Rawat BJP यह अलग बात है कि तिवारी सरकार रही हो विजय बहुगुणा की सरकार रही हो , हरीश रावत हमेशा दिल्ली में बैठकर प्रदेश की राजनीति में अपने मोहरों के ज़रिये आड़ी टेढ़ी चाल चलते रहे हैं। जिसकी वजह से उन्हें प्रदेश में कभी भी किसी भी दिग्गज कांग्रेसी ने भरोसेमंद नहीं माना और अब हालत यह है कि कई गुटों में बिखरी कांग्रेस के सभी खेमे हरीश रावत के मामले में एकजुट हो गए हैं। जिसका नतीजा है कि हरीश रावत के मन में लंबे समय से पनप रही पार्टी मोहभंग की टीस अब पार्टी छोड़ने की दहलीज़ तक आ गई है…
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Harish Rawat BJP
गांधी प्रतिमा के सामने राजनीतिक संन्यास लेने तक की घोषणा कर दी
- जबसे प्रदेश में पुष्कर सिंह धामी की युवा सरकार ने धाकड़ अंदाज़ में वापसी की है और कांग्रेस में झगड़ा चरम पर है , न नेता प्रतिपक्ष है और न ही प्रदेश अध्यक्ष बन पाया है ऐसे में भाजपा नेताओं में Harish Rawat BJP हरीश रावत के प्रति इतना प्रेम कैसे उमड़ रहा है। वो सहज भाव से आशीर्वाद लेने आ रहे हैं या इसके पीछे कोई सियासी राज है। ये थोड़ी भी राजनैतिक समझ रखने वाले को मतलब समझने के लिए काफी है। तो क्या राज्यसभा के रास्ते या राज्यपाल की कुर्सी के वास्ते भाजपा कांग्रेस मुक्त भारत बनाने में एक बड़ा कदम उठाने में कामयाब होने जा रही है ये संभावनाओं का पूरा खेल है जो परदे के पीछे जारी है।
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