
History of Joshimath देवभूमि की कहानी भी बड़ी विचित्र है , पहाड़ों में पिलर , घाटियों में रोपवे और बुग्यालों में रिसोर्ट बनाकर कहते हैं विकास पहाड़ चढ़ रहा है। लेकिन सच क्या है ये जोशीमठ के ढहते घर और बहते आंसू बता रहे हैं। केदार आपदा को मैंने भी जिया है उसके दर्द को ख़बरों में सिया है। तब दुनिया दौड़ पड़ी थी बाबा के घर को बचाने , तब हमने सबक लेने का दावा भी किया था। लेकिन हुआ क्या वो भी सियासी निकला और आज फिर एक शहर अपना अस्तित्व खो रहा है जोशीमठ रो रहा है।
History of Joshimath हमारे आपके शब्द झूठ और दिखावा है

- History of Joshimath दरअसल वह कुदरत से खिलवाड़ के नतीजे की बेहद बेरहम तस्वीर है। ये न सुधरने की ज़िद से हारने की एक और नज़ीर है। उत्तराखंड का एक और ऐतिहासिक शहर जोशीमठ बर्बादी की कगार पर है। हांलाकि देश भर के वैज्ञानिक और राज्य सरकार इस घटना से लड़ भी रहे हैं लेकिन क्या इतना ही काफी होगा प्रकृति और उसकी बनाई खूबसूरत धरती को मशीनों से रौंदने और लोहे के हथौड़े से घायल करने के बाद …

- History of Joshimath आज आदिगुरू शंकराचार्य की तपस्थली के लिए जाना जाने वाला यह नगर भू-धसाव की जद में है। सरकारी सर्वेक्षण के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में दो बड़े होटलों समेत 600 से अधिक आवासीय संरचनाएं भू-धसाव से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। यह सरकारी सर्वेक्षण का आंकड़ा है, वास्तविक क्षति इससे अधिक होने का अनुमान है। ‘बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग’ का बड़ा हिस्सा भू-धसाव की चपेट में है। लोग कातर नज़रों से धुल बनते गुबार में अपना घर बिखरते देख रहे हैं और हम और आप साधन संपन्न शहर में बैठ आरोप , इलज़ाम और सियासत कर फ़र्ज़ निभा रहे हैं।

- History of Joshimath लोगों के खेतों में हर दिन चौड़ी हो रही बड़ी-बड़ी दरारें पड़ी हैं। बीते दिनों मारवाड़ी के समीप जेपी कालोनी में अचानक एक जगह जलधारा फूट पड़ी है, इससे लोग घबराये हुए हैं। इस त्रासदी से सर्वाधिक प्रभावित जोशीमठ नगरपालिका के रविग्राम, गांधीनगर, मनोहरबाग, सिंहधार वार्डों में सबसे अधिक भू-धसाव देखा गया है। सुरक्षा की दृष्टि से अब तक कई परिवार अपने घरों को छोड़ चुके हैं। कुछ अपने परिचितों के यहां रह रहे हैं तो कुछ शरणालयों में रह रहे हैं। हालात ऐसे बन रहे हैं कि शरण लेने वालों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जाएगी।

- History of Joshimath शहर की तलहटी में बद्रीनाथ से निकली तीव्र प्रवाह वाली अलकनंदा और धौलीगंगा हैं। इसी तलहटी पर विष्णुप्रयाग में धौलीगंगा, अलकनन्दा नदी में मिलती है। विष्णुप्रयाग, जो उत्तराखंड के पांच प्रयागों में पहला प्रयाग है, जोशीमठ की ऐतिहासिकता का मूक गवाह है। धार्मिक और सांस्कृतिक शहर के साथ भारत-चीन सीमा के करीब यह सबसे बड़े नगरों में एक होने तथा अपनी विशिष्ट स्थिति से सामरिक दृष्टि से भी अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान है। नगर की मौजूदा पीड़ा के साथ देश की सुरक्षा से जुड़े ये पहलू भी उतने ही महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

- History of Joshimath 20 से 30 हजार की आबादी और एक दर्जन से अधिक गांवों की खुशहाली से जुड़े इस शहर के लिए भू-स्खलन और भू-धसाव की घटनाएं कोई नई नहीं हैं। इसकी बसावट और भूगोल में यह दंश छिपा है। यदि नया कुछ है तो वह इन खतरों की जानबूझकर अनदेखी करना है जिसके चलते जोशीमठ जैसे सदियों पुराने शहर के अस्तित्व पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं। मैं जिस खबर को लिख रही हूँ उसके बारे में मेरी पैदाइश से पहले ही 1976 में‘नवभारत टाइम्स’ और ‘दिनमान’ में छपी रिपोर्ट इस बात की तस्दीक करती हैं।

- History of Joshimath तत्कालीन उत्तरप्रदेश सरकार ने समस्या के निराकरण के लिए तत्कालीन गढ़वाल के आयुक्त महेशचंद्र मिश्र की अध्यक्षता में विज्ञानियों, तकनीकीविदों, प्रशासकों और चमोली की जिला पंचायत के अध्यक्ष और जोशीमठ के प्रमुख समेत 18 सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति के विज्ञानियों और तकनीकीविदों ने जोशीमठ के भूगर्भीय हालात और भौगोलिक स्थिति का भ्रमणकर भू-धंसाव और भू-स्खलन के कारणों का अध्ययन किया था।

- History of Joshimath ‘मिश्रा-समिति’ ने जोशीमठ नगर का जीवन बचाने के लिए 47 साल पहले जो सुरक्षात्मक उपाय बताए थे वे आज भी कागज़ों में दफन हैं। जोशीमठ के निचले हिस्से में वनीकरण तथा संरक्षित क्षेत्र में हरियाली का दायरा बढ़ाने के तब के सुझाव कभी गंभीरता से लिए ही नहीं गए। तो आज कई दशक बाद जोशीमठ की टूटी कमर और बिखरे शहर पर आंसू बहाने का ये सियासी नाटक और अफ़सोस जताने वाले हमारे आपके शब्द झूठ और दिखावा है , क्योंकि कुछ भी सच है तो वो है उन आँखों की मायूसी और गुस्सा जो आज बुजुर्गो और महिलाओं की आँखों में तैर रहा है जिन्होंने एक एक ईंट अपने हाथों जोड़कर चारदीवार खड़ी की थी जो आज दरक रही है ।

