देहरादून से आशीष तिवारी की विशेष रिपोर्ट

HN bahuguna उत्तराखंड के 25 साल पूरे होने पर आयोजित विधान सभा के विशेष सत्र में पर्वतीय मैदानी पर बहस तीखी और सड़कों पर चर्चा जब मुखर होने लगी तो शाइनिंग समाचार ने प्रयागराज की पूर्व सांसद और दिग्गज स्व हेमवती नंदन बहुगुणा की बेटी डॉ रीता बहुगुणा जोशी से वार्ता की और स्वर्गीय बहुगुणा के विराट व्यक्तित्व और योगदान को याद किया। डॉ जोशी ने कहा कि बाबूजी एक दूरदर्शी नेता थे जिन्होंने भारतीय राजनीतिक व्यवस्था पर अपनी अमिट छाप छोड़ी। वो देश के राजनैतिक मैदान में अकेले ऐसे विचारक थे जो सबको साथ लेकर चलने में यकीन करते थे। पहाड़ के बेटे को मैदान के लोगों ने जो प्यार , सम्मान और समर्थन दिया उसने हेमवती को हिमालयपुत्र बना दिया , जिनके पदचिन्हों पर आज भी बहुगुणा परिवार उन्हीं सिद्धांतों और सोच के साथ सबको साथ लेकर चलते हुए सर्व समाज की सेवा कर रहा है।

डॉ रीता बहुगुणा जोशी ने आशीष तिवारी से साझा किये हस्तलिखित पत्र HN bahuguna
आपको बता दें कि 1919 में बुघानी, पौड़ी गढ़वाल में एक साधारण परिवार में जन्मे स्व हेमवती नंदन बहुगुणा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गढ़वाल क्षेत्र में और उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश में बहुत दृढ़ संकल्प और परिश्रम के साथ प्राप्त की, जिसने उनके शैक्षणिक और राजनीतिक जीवन को आकार दिया। भारत में समावेशी विकास के लिए उनके दूरगामी दृष्टिकोण और प्रतिबद्धता ने भारतीय समाज के बहु-धार्मिक और बहु-जातीय ताने-बाने में योगदान दिया।

स्व एच एन बहुगुणा का कद पहाड़ से मैदान तक रहा हमेशा अनुकरणीय

राजनीति के सबसे निचले तबके से उठकर उन्होंने देशभक्ति, स्वार्थी उद्देश्यों से अलगाव और कट्टरवाद तथा क्षेत्रवाद से समझौता न करने की स्पष्ट विचारधारा के साथ अपने राजनीतिक जीवन के शिखर को छुआ। स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा अपने जीवन में एक शाश्वत कर्मयोगी और एक अनुभवी राजनीतिज्ञ होने के कारण प्रतिबद्ध व्यक्ति थे। उन्होंने गढ़वाल और भारत के गौरव को सर्वोच्च ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

उनके राजनीतिक जीवन का इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा है, लेकिन समय और भाग्य के थपेड़ों के बावजूद, उन्होंने अपने जीवन के पहिये को हमेशा बहने वाली पवित्र गंगा नदी की तरह चलाया। स्वर्गीय हेमवती नंदन, पहाड़ के बेटे, अपने नाम के अनुरूप साबित हुए। उन्होंने अपने जीवन में कभी भी आने वाली मुश्किलों के बावजूद अपना धैर्य नहीं खोया। वे भारत के उन कुछ राजनेताओं में से एक थे जिन्होंने भ्रष्टाचार मुक्त, साफ-सुथरे और स्वच्छ प्रशासन की वकालत की। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार में कई मंत्री पदों पर कार्य किया।

उनका मानना था कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता का सम्मान किया जाना चाहिए और कार्यकारी तंत्र द्वारा इसे बनाए रखा जाना चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश के 8वें मुख्यमंत्री (1973-1975) के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालयों के लिए स्वतंत्रता की वकालत की। उन्होंने कुलपतियों के दर्जे की गरिमा बनाए रखने का विशेष ध्यान रखा। उच्च शिक्षा के प्रति उनके जबरदस्त जुनून और चिंताओं की अकादमिक समुदाय आज भी कृतज्ञता के साथ सराहना करता है।

प्रो रीता बहुगुणा जोशी ने दी स्थापना दिवस की बधाई
उत्तराखंड के 25वे स्थापना दिवस की बधाई देते हुए प्रोफेसर जोशी कहती हैं कि सिर्फ़ु हम ही नहीं पूरा देश बाबूजी के कुशल प्रशासन और मजबूत प्रतिबद्धता के लिए उनके व्यक्तित्व को आदर्श मानकर स्वीकार करते हैं, जो गढ़वाल विश्वविद्यालय के सर्वांगीण विकास को दर्शाता है। गढ़वाल विश्वविद्यालय के लिए स्वर्गीय श्री हेमवती नंदन बहुगुणा के नाम को अपनाना क्षेत्र में समावेशी गुणवत्ता वाली उच्च शिक्षा के लिए उनके विशिष्ट दृष्टिकोण को दर्शाता है। हम भारतीय राजनीतिक और शैक्षिक संस्थानों को प्रेरित करने के लिए पहाड़ के सच्चे सपूत स्वर्गीय श्री हेमवती नंदन बहुगुणा का सम्मान करते हैं।शाइनिंग उत्तराखंड न्यूज और शाइनिंग समाचार की तरह से सभी पाठकों को रजत जयंती वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

