Ice Skating Rink महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज परिसर में अस्सी करोड़ रुपये की लागत से बना आइस स्केटिंग रिंक बर्बाद हो रहा है। 2011 में बने इस आइस स्केटिंग रिंक पर अभी तक सिर्फ दो प्रतियोगिताएं हुई है। 2011 में आइस स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से साउथ ईस्टर्न एशियन विंटर गेम्स व 2012 में आइस हॉकी ओपन स्केटिंग प्रतियोगिता के बाद इस रिंक का कोई उपयोग नहीं हुआ है। करीब 11 सालों में यह आइस रिंक खंडहर में तब्दील हो चुका है।
Ice Skating Rink : यहाँ बह गए 80 करोड़ के बर्फीले सपने

- बदहाली के हालत में बियाबान हो चुके इस स्टेडियम में जहाँ खिलाडियों का शोर होना चाहिए था आज वहां सन्नाटा है बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हुई है। राज्य सरकार आइस स्केटिंग रिंक के लिए पुख्ता योजना नहीं बना पा रही है। Ice Skating Rink तमाम सरकारें आयी गयी , खेल मंत्री बने और घोषणाएं भी की दौरे भी किये लेकिन अब खबर आ रही है कि प्रदेश सरकार और खेल विभाग ने भी इसके पुनरुद्धार को लेकर हाथ खड़े कर दिए हैं.

Ice Skating Rink : यहाँ बह गए 80 करोड़ के बर्फीले सपने
- Ice Skating Rink अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस आइस स्केटिंग रिंक के खर्चे का वहन ना कर पाने के कारण अब खेल विभाग इसके पूरे स्वरूप को परिवर्तित करने की तैयारी कर रहा है. खेल मंत्री रेखा आर्य के मुताबिक अब इस आइस स्केटिंग रिंक को सामान्य स्टेडियम में परिवर्तित कर इसका अन्य खेलों में प्रयोग किया जाएगा. इसके लिए विभागीय अधिकारी योजना तैयार कर रहे हैं.प्रदेश में शीतकालीन खेलों की अपार संभावनाओं को देखते हुए 2010 में रायपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का आइस स्केटिंग रिंक बनाया गया था. यह रिंक करीब 80 करोड़ की लागत से बनाया गया था. इसके बाद 2011 में यहां आइस स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से साउथ ईस्टर्न एशिया आइस स्केटिंग प्रतियोगिता और उसके बाद आइस हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था.

- Ice Skating Rink इन प्रतियोगिता के बाद शीतकालीन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को उम्मीद थी कि उन्हें अपनी तैयारी के लिए अन्य प्रदेशों और विदेश नहीं जाना पड़ेगा. लेकिन उसके बाद इसका बिजली और पानी का खर्चा भी पर्यटन और खेल विभाग नहीं उठा पाया और यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का आइस स्केटिंग रिंक 11 सालों से बदहाली के आंसू बहा रहा है…

- Ice Skating Rink उधर धामी 2.0 सरकार बनने के बाद शीतकालीन खेलों से जुड़े लोगों को उम्मीद थी कि इस आइस स्केटिंग रिंक के दिन बहुरेंगे. क्योंकि इसके स्तर का आइस स्केटिंग रिंक मात्र चीन में मौजूद है. लेकिन अब इसका खर्चा देख प्रदेश सरकार ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं. खेल मंत्री रेखा आर्य का कहना है कि आइस स्केटिंग रिंक के रखरखाव में करीब 1 लाख का खर्चा आ रहा है. वहीं, इसकी बदहाली को देखते हुए खेल विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की गई है और प्रयास किया जा रहा है कि इस आइस स्केटिंग रिंक को सामान्य स्टेडियम के रूप में परिवर्तित करते हुए अन्य खेलों के लिए इसका उपयोग किया जाए। मतलब साफ़ है कि जिस मकसद और खिलाडियों के सपनों के साथ इस खूबसूरत स्टेडियम को बनाया गया था वो अपने मकसद को पाने में नाकाम साबित हुई है।
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