IIT Guwahati Innovation असम के IIT गुवाहाटी के रिसर्चर्स ने विज्ञान की दुनिया में एक बड़ा धमाका किया है. प्रोफेसर पीके गिरी और उनकी टीम ने MXene (मैक्सीन) नामक मटेरियल का इस्तेमाल करके एक ऐसा कैटलिस्ट (Catalyst) तैयार किया है, जो पानी से हाइड्रोजन निकालने की प्रक्रिया को बेहद सस्ता और आसान बना देगा. इसके साथ ही यह मटेरियल सूरज की रोशनी का इस्तेमाल कर समुद्र के खारे पानी को शुद्ध करने के लिए भी काम में आ सकता है. आम भाषा में कहें तो यह टेक्नोलॉजी ऊर्जा और पानी, दोनों समस्याओं का हल निकाल सकती है. यह खोज देश के लिए नई उम्मीद की किरण है.
मशीन से पैदा होगा फ्यूल और शुद्ध पानी – IIT Guwahati Innovation

समुद्र के खारे पानी को साफ किया जा सकता है
हाइड्रोजन को लंबे समय से आने वाले समय का ईंधन माना जा रहा है. इसके पीछे वजह साफ है कि यह जलता है तो प्रदूषण नहीं करता. अब नई टेक्नोलॉजी में वैज्ञानिकों ने ऐसा मटेरियल तैयार किया है, जो पानी को तोड़कर हाइड्रोजन निकालने की प्रक्रिया को तेज और आसान बना देता है. इसमें बहुत कम ऊर्जा लगती है और यह पहले के तरीकों से ज्यादा असरदार साबित हुआ है.इस रिसर्च की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह सिर्फ फ्यूल बनाने तक सीमित नहीं है. इस मटेरियल से समुद्र के खारे पानी को साफ किया जा सकता है. सूरज की रोशनी की मदद से यह पानी को भाप में बदलता है और फिर उसे ठंडा करके साफ पानी के रूप में वापस लाता है. इस तरह बिना ज्यादा खर्च के पीने लायक पानी तैयार किया जा सकता है.
सूरज की रोशनी में बेहतर प्रदर्शन
वैज्ञानिकों ने इस मटेरियल को साधारण रूप में नहीं छोड़ा. इसे बहुत पतली परतों और धागे जैसी संरचना में बदला गया है, जिससे इसका काम करने का क्षेत्र बढ़ गया है. इसके अलावा इसमें कुछ खास तत्व मिलाए गए हैं, जिससे इसकी क्षमता और मजबूत हो गई है. यही वजह है कि यह तेजी से काम करता है और लंबे समय तक टिकता भी है. प्रोफेसर पीके गिरी और उनकी टीम का मानना है कि यह तकनीक कम लागत में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की जा सकती है.
भविष्य के लिए क्यों है जरूरी ?
प्रोफेसर गिरी के अनुसार, ‘यह मटेरियल न केवल टिकाऊ है, बल्कि इसे कमर्शियल स्तर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है.’ आने वाले समय में यह टेक्नोलॉजी गाड़ियों के लिए सस्ता हाइड्रोजन फ्यूल उपलब्ध कराएगी और तटीय इलाकों में पीने के पानी की समस्या को हमेशा के लिए खत्म कर देगी.टेस्ट के दौरान पाया गया कि यह मटेरियल सूरज की रोशनी में और भी अच्छा काम करता है. टेस्ट के समय यह लंबे समय तक लगातार काम करता रहा और इसकी क्षमता में ज्यादा गिरावट नहीं आई. इससे साफ है कि आने वाले समय में इसे बड़े स्तर पर इस्तेमाल करना आसान हो सकता है.
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पानी साफ करने का नया तरीका
वैज्ञानिकों ने इसे एक खास सिस्टम में लगाया, जो पानी के ऊपर तैरता है. यह सिर्फ पानी की ऊपरी सतह को गर्म करता है, जिससे कम ऊर्जा में ज्यादा काम हो जाता है. पानी भाप बनता है और नमक व गंदगी पीछे रह जाती है. बाद में यही भाप साफ पानी में बदल जाती है.अगर इस टेक्नोलॉजी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू होता है, तो यह ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है. हाइड्रोजन फ्यूल सस्ता और आसान हो जाएगा, जिससे प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही पानी की कमी से जूझ रहे इलाकों को भी राहत मिल सकती है.

