Special Story By : Anita Tiwari , Dehradun –
Incredible Uttarakhand पहाड़ का ज़र्रा ज़र्रा रहस्य और रोमांच के महकता है। हर चोटी और हर मोड़ पर देवताओं देवियों और लोक कथाओं की भरमार है।

Incredible Uttarakhand ऐड़ी देवता उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र के लोक देवता हैं
- ये एक रोचक कहानी है जो पहाड़ में बुजुर्गों की जुबानी बताई जाती है। Incredible Uttarakhand ऐरी या ऐड़ी कुमाउनी राजपूतों की प्रसिद्ध जाती है। इस जाति में एक वीर बलवान पुरुष पैदा हुआ था। उसे शिकार खेलने का बहुत शौक था। उसकी जब मृत्यु हुई तो वह प्रेत योनि में भटकने लगा। बच्चो और औरतों को सताने लगा, जब जागर लगाई,तो उसने बताया कि वह ऐड़ी है,उसकी हलवा पूरी बकरा आदि चढ़ा कर उसकी पूजा करो। वह सबको छोड़ देगा,सबका भला करेगा।
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Incredible Uttarakhand – देवताओं की विधानसभा -
Incredible Uttarakhand वन देवता के रूप में पूजा जाता है
- ऐड़ी देवता उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र के लोक देवता हैं। उन्हें वन देवता के रूप में पूजा जाता है। Incredible Uttarakhand कहते हैं कि ऐड़ी देवता अपने क्षेत्र में रात्रि को ,अपने दल बल के साथ शिकार के लिए निकलते हैं।और रात्रि में बुरी शक्तियों से अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। उत्तराखंड के कुमाऊँ मंडल में ऐरी देवता के बारे में अनेक कथाएं एवं मान्यताएं प्रचलित हैं। और चंपावत और नैनीताल जिले के बीच मे ब्यानधुरा नामक स्थान पर ,ऐड़ी देवता का प्रसिद्ध मंदिर है।

- Incredible Uttarakhand यह एक अनोखा मंदिर है, जहां लोग अपनी मन्नत पूरी होने पर धनुष बाण चढ़ावे में चढ़ाते हैं। इसीलिए यह मंदिर को धनुष चढ़ाने वाला मंदिर भी कहते हैं। भगवान शिव के 108 ज्योतिर्लिंगों में से एक मान्यता प्राप्त ज्योतिर्लिंग यहाँ है । इसीलिए इस मंदिर को देवताओं की विधानसभा भी कहते हैं। कहते हैं कि कुमाऊँ में एक राजा ऐड़ी हुवा करते थे। उन्होंने ब्यानधुरा की चोटी पर ,तपस्या करके देवत्व प्राप्त किया ,और कालांतर में ऐरी देवता के रूप में पूजे जाने लगे।

- अन्य कथाओं के अनुसार ऐरी देवता ,आखेट प्रिय, अल्हड़ और क्रोधी स्वभाव के देवता हैं, रात को डोली में बैठ कर पहाड़ो, और जंगलों की यात्रा करते हैं। इनके साथ जो दल चलता है,वो बहुत खतरनाक बताया जाता है। ऐड़ी देवता के बारे में एक कुमाउनी लोक कथा में बताया जाता है,कि मानव रुप में इनका नाम त्यूना था।Incredible Uttarakhand इनके साथ दो कुत्ते होते थे,झपूवा और कठुआ । इन कुत्तों के साथ ऐरी जंगल मे शिकार खेलता था। एक दिन शिकार खेलने में दुर्धटना वश इनके पैर टूट गए। और इनकी मृत्यु हो गई। कहते हैं ,इसी लिए ऐरी प्रेत योनि में डोली बैठ कर शिकार खेलते हैं।

- लोकमतों एवं लोककथाओं के अनुसार Incredible Uttarakhand कहते हैं,जो रात को ऐरी देवता के कुत्तों की आवाज सुन लेता है,वो अवश्य कष्ट पाता है। ऐरी देवता के साथ ये कुत्ते हमेशा रहते हैं। शिकार में मदद करने और जानवरों को घेरने के लिए ऐरी के साथ भूतों की टोली भी चलती है,जिनको बया बाण बोलते हैं। और साथ मे खतरनाक आँचरी कींचरी नामक खतरनाक परिया भी चलती हैं। इनके पैर पीछे की तरफ टेढ़े होते हैं। ऐड़ी देवता का हथियार तीर कमान होता है। जब कभी जंगल मे बिना झखम का कोई जानवर मरा मिलता है, तो उसे ऐड़ी का मारा हुवा मान लिया जाता है।

- कुमाऊँ का इतिहास किताब के रचयिता एवं उत्तराखंड के प्रमुख इतिहासकार बद्रीदत्त पांडे ने अपनी किताब में Incredible Uttarakhand ऐरी देवता के बारे में उत्तराखंडियों और पहाड़ की संस्कृति के प्रेमियों को रोचक जानकारियां दी हैं। आप अगर पर्यटन , पहाड़ के ट्रैकिंग का शौक रखते हैं तो उत्तराखंड की वादियां आपके लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
- जानिए अपने पहाड़ को – जौनसार बावर की कहानी https://shininguttarakhandnews.com/jaunsar-bawar-culture/

