Indiresh Hospital मानवीय संवेदनाओं की मिसाल बना इन्दिरेश अस्पताल

Indiresh Hospital देहरादून के पटेल नगर स्थित लाल पुल पर 23 जून 2026 को हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। रोजगार की तलाश में सड़क किनारे खड़े उत्तर प्रदेश एवं बिहार के सात मजदूर उस समय एक अनियंत्रित सिटी बस की चपेट में आ गए, जब बस चालक को अचानक मिर्गी का दौरा पड़ने से वाहन नियंत्रण से बाहर होकर डिवाइडर से टकरा गया। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और चारों ओर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

लाल पुल बस हादसे के घायलों का निःशुल्क उपचार Indiresh Hospital


दुर्घटना के तुरंत बाद सभी घायलों को श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल, पटेल नगर पहुंचाया गया, जहां अस्पताल प्रशासन ने बिना किसी औपचारिकता और विलंब के उनका निःशुल्क उपचार तत्काल प्रारम्भ कराया। अनुभवी चिकित्सकों, विशेषज्ञों एवं समर्पित चिकित्सा कर्मियों की टीम ने जीवन रक्षक उपकरणों एवं आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की सहायता से घायलों का उपचार शुरू किया। हालांकि उपचार के दौरान दो मजदूरों की मृत्यु हो गई, जबकि शेष पांच घायलों का उपचार आईसीयू में लगातार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार सभी घायल अब खतरे से बाहर हैं और उनकी स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है।

दो मजदूरों की मौत, पांच घायल अब खतरे से बाहर
दुःख और संकट की इस घड़ी में घायलों के परिजनों ने श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल की संवेदनशीलता, दया, करुणा और सेवाभाव की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर मजदूरों को बिना किसी देरी के निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराकर अस्पताल ने मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है। परिजनों ने चिकित्सकों एवं पूरे चिकित्सा स्टाफ के समर्पण को घायलों के लिए जीवनदायिनी सेवा बताया।

संकट की घड़ी में मानव सेवा का प्रेरणादायी उदाहरण

इधर जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए बस चालक और बस स्वामी को गिरफ्तार कर लिया है तथा दुर्घटनाग्रस्त बस को भी सीज कर दिया गया है। वहीं उत्तर प्रदेश एवं बिहार नागरिक मंच ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए मांग की है कि बस चालक एवं बस स्वामी घायलों के उपचार का संपूर्ण खर्च वहन करें। मंच ने प्रत्येक घायल के परिवार को ₹5 लाख तथा मृतकों के आश्रितों को ₹10 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान किए जाने की मांग भी उठाई है।

परिजनों ने अस्पताल की सेवा, संवेदनशीलता और करुणा को सराहा

मंच ने क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) देहरादून की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यदि चालक मिर्गी जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित था, तो उसे सार्वजनिक परिवहन वाहन चलाने की अनुमति और फिटनेस प्रमाण-पत्र किस आधार पर जारी किया गया। मंच ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई की मांग की है।इस हृदयविदारक हादसे के बीच श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल ने जिस तत्परता, करुणा और मानवीय संवेदनाओं के साथ आर्थिक रूप से कमजोर मजदूरों के उपचार की जिम्मेदारी निभाई, वह समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया है। अस्पताल ने यह सिद्ध कर दिया कि चिकित्सा केवल उपचार नहीं, बल्कि मानवता की सर्वोच्च सेवा भी है।