Jatoli Shiv Temple आप सभी ने कई अलग-अलग मंदिरों के बारें में पढ़ा या सुना होगा औ4 उनके इतिहास और उनसे जुड़ी रोचक तत्वों को जान पाए होंगे। इसी कड़ी में आज हम आपको एक ऐसे अद्भूत मंदिर के बारें में बताने जा रहे हैं जिसके पत्थरों को थपथपाने से डमरू बजने की आवाजें आती हैं। इसके साथ ही उसे एशिया का सबसे ऊंचा मंदिर भी कहा जाता है।
Jatoli Shiv Temple कहां स्थित है एशिया का सबसे ऊंचा मंदिर?

Jatoli Shiv Temple हम बात कर रहे हैं एशिया के सबसे ऊँचे शिव मंदिर (Asia’s Tallest Shiv Temple) के बारें में जिसका नाम जटोली शिव मंदिर (Jatoli Shiv Temple) है और यह भारत के हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के सोलन में स्थित है।
भवन निर्माण का बेजोड़ नमूना है जटोली शिव मंदिर

Jatoli Shiv Temple अपनी चमत्कारी शक्तियों की वजह से प्रसिद्ध जटोली मंदिर सोलन से 7 किमी की दूरी पर सका निर्माण दक्षिण द्रविड़ शैली में किया गया है जो भवननिर्माण का एक बेहतरीन और बेजोड़ नमुना है। इस मंदिर का निर्माण तीन पिरामिड पर किया गया है जिसमे से एक पिरामिड पर भगवान श्री गणेश की मूर्ति है जबकि अन्य पर शेषनाग की मूर्ति है।
क्या है जटोली मंदिर को लेकर मान्यता?

भक्तों को 100 सीढ़िया चढ़कर जाना पड़ता है मंदिर
Jatoli Shiv Temple जटोली मंदिर को बनाने 39 वर्षों का समय लगा था तब जाकर भव्य मंदिर का निर्माण हुआ। इस मंदिर के बारें में पौराणिक मान्यता है कि, भगवान शिव आकर यहां रुके थे उसके बाद एक सिद्ध बाबा स्वामी कृष्णानंद परमहंस ने तपस्या की। एशिया के सबसे ऊँचे शिव मंदिर जटोली मंदिर के गुम्बद की ऊंचाई 111 फीट है तथा इस मंदिर में जाने के लिए भक्तों को 100 सीढ़िया चढ़नी पड़ती है।

मंदिर के पानी में हैं बीमारियां ठीक करने की शक्ति
Jatoli Shiv Temple इस चमत्कारी मंदिर के बारें में ऐसी मान्यता है कि यहां का पानी लोगो की बीमारी को ठीक कर देता है।जटोली मंदिर (Mystery of Jatoli Shiv Temple) के बारें में कहा जाता है कि मंदिर के पत्थरों को थपथपाने पर डमरू बजने की आवाजें सुनाई देती है। यह मंदिर अपनी चमत्कारी शक्तियों के वजह से काफी प्रसिद्ध है। इस मंदिर का नाम भी भगवान शिव के जटाओं से लिया गया है।
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