Kedarnath Yatra हिमालय की दिव्य परंपरा है उत्सव डोली

Kedarnath Yatra आगामी 22 अप्रैल को सुबह आठ बजे शुभ मुहूर्त में केदारनाथ धाम मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले जाएंगे। इससे पहले शीतकालीन गद्दीस्थल से धाम के लिए बाबा की डोली रवाना हो गई है। केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने की प्रक्रिया भी आज शुरू हो गई है। भगवान केदारनाथ की पंचमुखी चल उत्सव विग्रह डोली सुबह शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर से भव्य रूप में धाम के लिए रवाना हो गई। वैदिक मंत्रोच्चार, पूजा-अर्चना और परंपरागत रीति-रिवाजों के बीच मंदिर की परिक्रमा कर डोली आगे बढ़ी।

आठ कुंतल फूलों से सजाया ओंकारेश्वर मंदिर Kedarnath Yatra

हिमालय की एक दिव्य परंपरा है, जो सदियों से चली आ रही है। इस क्षेत्र में महादेव पूजा की गहरी संस्कृति है। तीन दिन बाद, 22 अप्रैल को भगवान शिव के शुभ द्वार खुलेंगे। डोली के रूप में बनी यह मूर्ति अपनी पदयात्रा पर निकल पड़ी है। देश भर से श्रद्धालु इस पवित्र डोली प्रस्थान को देखने के लिए एकत्रित हुए। एक श्रद्धालु ने कहा कि मैं पहली बार इस डोली यात्रा के लिए आया हूं। मेरी यह इच्छा थी, और अब मैं बाबा की डोली के साथ केदारनाथ तक जाऊंगा।

पांचवीं बार डोली यात्रा में भाग ले रहे 67 वर्षीय एक श्रद्धालु ने बताया कि यह मेरी पांचवीं डोली यात्रा है। अनुभव अद्भुत है। टीवी या यूट्यूब पर देखना अलग बात है, लेकिन यहां आकर इसे अनुभव करना सचमुच खास है। डोली पहली रात फाटा में ठहरेगी और सोमवार को गौरीकुंड पहुंचकर एक और पड़ाव डालेगी। यह 21 अप्रैल को केदारनाथ धाम पहुंचेगी, जहां प्रतिमा को मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया जाएगा। मंदिर के द्वार 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे पूर्ण वैदिक रीति-रिवाजों के साथ खुलेंगे, जो ग्रीष्मकालीन तीर्थयात्रा के प्रारंभ का प्रतीक है।

देश भर से हजारों श्रद्धालु आशीर्वाद लेने के लिए एकत्रित हुए हैं, जो इस यात्रा के आध्यात्मिक महत्व को दर्शाता है। भारतीय सेना, विशेष रूप से गढ़वाल राइफल्स के एक बैंड ने जुलूस के दौरान एक महत्वपूर्ण औपचारिक भूमिका निभाई, जिसमें सैन्य परंपरा और गहरी आध्यात्मिक रीति-रिवाजों का अद्भुत संगम देखने को मिला।

मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया था। ओंकारेश्वर मंदिर को आठ कुंतल फूलों से सजाया गया। शनिवार रात्रि को भैरवनाथ की पूजा हुई। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार डोली ऊखीमठ से प्रस्थान कर गुप्तकाशी पहुंचेगी, जहां विश्वनाथ मंदिर में कुछ समय विश्राम कर श्रद्धालुओं को दर्शन देगी। इसके बाद डोली फाटा के लिए रवाना होगी, जहां रात्रि विश्राम किया जाएगा। डोली यात्रा के अगले चरण में 20 अप्रैल को सुबह फाटा से प्रस्थान कर गौरीकुंड स्थित गौरीमाई मंदिर पहुंचेगी और वहीं रात्रि विश्राम करेगी।

21 अप्रैल को सुबह गौरीकुंड से केदारनाथ धाम के लिए प्रस्थान कर डोली मंदिर भंडार पहुंचेगी। इसके बाद 22 अप्रैल को सुबह आठ बजे शुभ मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे, जिसके साथ ही विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ यात्रा का विधिवत शुभारंभ होगा। प्रशासन, पुलिस और मंदिर समिति द्वारा यात्रा को सुचारु और सुरक्षित बनाने के लिए सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।