देहरादून से अनीता तिवारी की स्पेशल रिपोर्ट –

Latu Devta Temple अगर आप धार्मिक पर्यटन के शौक़ीन हैं तो देवभूमि उत्तराखंड आपके लिए बेहतरीन विकल्प है। यहाँ आपको अनगिनत मंदिर और तीर्थ स्थल मिलेंगे जिनकी अनोखी मान्यताएं और कहानिया है। इसी कड़ी में आज बात करेंगे उत्तराखंड के चमोली जिले के देवाल विकासखंड के वाण गांव में क्षेत्रपाल देव लाटू देवता का मंदिर की …. कहते हैं कि इस मंदिर में साक्षात नागराज विराजमान रहते हैं , उनके पास मणि हैं
Latu Devta Temple क्षेत्रपाल देव लाटू देवता का मंदिर

- Latu Devta Temple आपको यहाँ ये बता दें कि यह नागराज का मंदिर है, जो कि अपनी विशेष पूजा करने के तरीके के लिए मशहूर है. इसके साथ ही साथ चमोली की लाडली देवी नंदा का भाई भी लाटू देवता को माना जाता है. बता दें कि लाटू देवता के दर्शन वर्ष में सिर्फ एक ही बार किए जाते हैं.चमोली की अधिष्ठात्री देवी मां नंदा देवी के धर्म भाई के रूप में वैशाख पूर्णिमा को साल भर में एक बार इस मंदिर के कपाट खुलते हैं. उसी दिन शाम को बंद भी हो जाते हैं. इसके साथ ही साथ मंदिर के दर्शन बाहर से तो सभी श्रद्धालु कर सकते हैं, लेकिन मंदिर के अंदर प्रवेश करना वर्जित है.

Latu Devta Temple - Latu Devta Temple अद्भुत और रहस्यों से भरे उत्तराखंड में सबसे लंबी पैदल यात्रा नंदा राजजात निकलती है। इस यात्रा का 12वां पड़ाव इस मंदिर में होता है। इस यात्रा को श्रीनंदा देवी की राजजात यात्रा कहते हैं। यह मंदिर है लाटू देवता का। मान्यता है कि इस मंदिर में लाटू देवता वाँण से लेकर हेमकुंड तक अपनी बहन नंदा देवी की अगवानी करते हैं।यह मंदिर सिर्फ एक दिन वैशाख पूर्णिमा के दिन ही खुलता है और उसी दिन मंदिर में ब्राह्मण आंखों पर काली पट्टी और मुंह पर कपड़ा बांधकर मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं. ऐसा माना जाता है कि नागराज अद्भुत मणि के साथ मंदिर में रहते हैं. मणि का तेज इतना अधिक होता है कि जो मनुष्य की आंखों की रोशनी को भी खत्म कर सकता है, इसलिए मंदिर में जाना वर्जित है.

Latu Devta Temple Latu Devta Temple कब खुलते हैं कपाट?
- Latu Devta Temple लाटू मंदिर साल में सिर्फ एक दिन वैशाख मास की पूर्णिमा को खुलता है। इसी दिन पुजारी आंख-नाक पर पट्टी बांधकर मंदिर के कपाट खोलते हैं। जब मंदिर के कपाट खोले जाते हैं, तब विष्णु सहस्रनाम और भगवती चंडिका का पाठ किया जाता है। लाटू मंदिर के बारे में प्रचलित है कि जिसने भी मंदिर में प्रवेश किया, वो अंधा हो गया। हालांकि यह एक किवदंती है, जिसका सभी लोग पालन करते हैं।
Latu Devta Temple लाटू देवता का मां नंदा से रिश्ता

Latu Devta Temple - Latu Devta Temple पौराणिक कथाओं के अनुसार, लाटू देवता उत्तराखंड की आराध्य देवी नंदा देवी के धर्म भाई हैं. जब भगवान शिव का माता पार्वती के साथ विवाह हुआ, तो पार्वती (नंदा देवी) को विदा करने के लिए सभी भाई कैलाश की ओर चल पड़े. इसमें उनके चचेरे भाई लाटू भी शामिल थे. रास्ते में लाटू देवता को प्यास लगी. वह पानी के लिए इधर-उधर भटकने लगे. उन्हें एक कुटिया दिखी, तो लाटू वहां पानी पीने चले गए. कुटिया में एक साथ दो मटके रखे थे, एक में पानी था और दूसरे में मदिरा थी. लाटू देवता ने गलती से मदिरा पी ली और उत्पात मचाने लगे. इससे नंदा देवी को गुस्सा आ गया और उन्होंने लाटू देवता को श्राप दे दिया. मां नंदा देवी ने गुस्से में लाटू देवता को बांधकर कैद करने का आदेश दिया.
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