MDDA Guidelines नई नियमावली से संवरेगा देहरादून – बंशीधर तिवारी

MDDA Guidelines नए साल के आगमन के साथ ही उत्तराखंड सरकार ने कंक्रीट माफिया, अवैध बिल्डरों और भूमाफियाओं के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का संकेत दे दिया है। राजधानी देहरादून में वर्षों से अवैध कालोनियों, नदी किनारे निर्माण और सरकारी भूमि पर कब्जों ने न केवल शहर की रफ्तार बल्कि पर्यावरण को भी प्रभावित किया है। अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शासन, प्रशासन और मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) की संयुक्त सख्ती से इन समस्याओं पर कड़ा नियंत्रण किया जाएगा।सरकार ने बिल्डरों की मनमानी रोकने और निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नई पारदर्शी नियमावली लागू करने की तैयारी कर ली है।

संतुलित और सुरक्षित होगा शहर का भविष्य – बंशीधर तिवारी MDDA Guidelines

Mdda Guidelines

नियमावली के तहत:
हर बिल्डर का अनिवार्य पंजीकरण होगा।
निवेशकों से मिली राशि एस्क्रो अकाउंट में जमा होगी और निर्माण की प्रगति के अनुसार ही बिल्डर को दी जाएगी।
प्रोजेक्ट पूरा किए बिना बिल्डर शहर छोड़ नहीं सकेगा।
प्रोजेक्ट की ऑनलाइन मॉनिटरिंग होगी, नक्शे से हटकर निर्माण होने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए समयबद्ध शिकायत निस्तारण सेल भी बनाई जाएगी।

पिछले चार-पांच साल में कई बिल्डरों ने करोड़ों रुपये लेकर प्रोजेक्ट अधूरे छोड़ दिए और फरार हो गए, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान हुआ। नई नियमावली लागू होने के बाद निवेशकों की राशि सुरक्षित होगी, प्रोजेक्ट समय पर पूरे होंगे और तय समय-सीमा में फ्लैट हैंडओवर की गारंटी रहेगी।एमडीडीए ने शहर में कई अवैध निर्माणों की पहचान कर सूची तैयार की है, जिसमें नदी किनारे बने अवैध ढांचे, बिना नक्शा स्वीकृति के भवन और कृषि भूमि पर कालोनियां शामिल हैं। सहस्रधारा, रायपुर, डोईवाला, राजपुर रोड, रिस्पना और बिंदाल नदी किनारे के क्षेत्र विशेष निगरानी में रखे गए हैं।

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने बताया कि नई नियमावली से न केवल निवेशकों की परेशानी कम होगी, बल्कि शहर की भविष्य की विकास योजना भी संतुलित और सुरक्षित होगी। इसके साथ ही शहर में अवैध फ्लोर निर्माण, स्टिल्ट पार्किंग पर कब्जा और नक्शे से हटकर निर्माण जैसी समस्याओं पर भी रोक लगेगी।सरकार और एमडीडीए की यह नई पहल रियल एस्टेट सेक्टर में लंबे समय से चल रही ठगी, अधूरे प्रोजेक्ट और निवेशकों के पैसों अटके रहने जैसी समस्याओं पर लगाम लगाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। निवेशकों के लिए यह नियमावली अब “सुरक्षा ढाल” का काम करेगी और बिल्डरों की मनमानी पर अंकुश लगाएगी।