Motivation नैनीताल के सचिंद्र बिष्ट की चित्रकारी को देखकर आप यकीन ही नहीं करेंगे की उनके हांथों में उंगलियां ही नहीं है। किसी ज़माने में फिल्मकार , डिज़ायनर और पर्वतारोही रहे सचिंद्र ने दोनों हाथ कट जाने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और जिंदगी के इस मोड़ को मानकर जीवन को एक नई दिशा दी। सचिंद्र की कहानी जितनी भावुक कर देने वाली है उतनी ही प्रेरक भी है। उनके हौंसले और जज्बे को देखकर समाज और युवाओं को अद्भुत प्रेरणा मिलती है।
मायूसी नहीं हौसले से पायी खुशियां Motivation

पेशे से फिल्म मेकर, ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर और पर्वतारोही रहे सचिंद्र ने अपनी जिंदगी का लंबा समय मुंबई समेत देश के बड़े महानगरों में बिताया। लेकिन कुछ वर्ष पूर्व सब कुछ छोड़कर नैनीताल आ गए और यहां शीतला गांव में लोगों को पर्वतारोहण के गुर सिखाने लगे। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन एक दिन अचानक आए बुखार ने उनकी दुनिया बदल डाली।बातचीत के दौरान सचिंद्र ने मीडिया को बताया कि मार्च 2023 में वह शीतला में अपने रॉक क्लाइंबिंग स्कूल में पर्वतारोहण सीखा रहे थे, तभी अचानक उन्हें तेज बुखार आ गया।


पेंटिंग को बनाया आजीविका का जरिया
सचिंद्र बताते हैं कि उन्होंने अपनी आजीविका चलाने के लिए कटे हाथों की कोहनी में ब्रश लगाकर पेंटिंग्स करना शुरू किया। अब तक वह दर्जनों पेंटिंग बना चुके हैं। जिन्हें लोग बेहद पसंद कर रहे हैं। उनकी बनाई पेंटिंग की डिमांड विदेशों तक है। उन्होंने अपने घर की दीवारों में भी बेहद सुंदर पेंटिंग बनाई है। हौसले की ऐसी अनेकों कहानियां आज हमारे बीच जीती जागती मिसाल हैं जो निराश और मायूस लोगों को आगे बढ़ने की शक्ति दे रही है।

