Objectionable Ads : अश्लीलता परोसते TV विज्ञापन अब और नहीं – लाचार दर्शक ,1 Dirty Publicity 

Objectionable Ads विज्ञापनों में महिलाओं को प्रोडक्ट के रूप में दिखाने पर पहले भी विवाद होते रहे हैं। हालिया मामले में एक बॉडी स्प्रे डियो के दो विज्ञापनों पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने रोक लगा दी जिनमें साफ नजर आ रहा था कि ये औरत और लड़कियों के प्रति गंदी और गिरी हुई मानसिकता साफ नजर आ रही थी।

Objectionable Ads खामोश या मज़बूर हैं दर्शक

Objectionable Ads खामोश या मज़बूर हैं दर्शक
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  • Objectionable Ads सोशल मीडिया पर प्रियंका चोपड़ा, रिचा चड्ढा, फरहान अख्तर जैसे सिलेब्स और नारीवादी ताकतों के घोर विरोध के बाद बॉडी स्प्रे डियो के उन दो विज्ञापनों पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने रोक लगा दी जिनमें साफ नजर आ रहा था कि ये रेप कल्चर को बढ़ावा दे रहे हैं। इन विज्ञापनों में औरत और लड़कियों के प्रति गंदी और गिरी हुई मानसिकता साफ नजर आ रही थी। मगर इन्हीं के साथ एक बार फिर इस बहस ने जोर पकड़ लिया कि क्यों बाजार में अपना सामान बेचने के लिए हर बार औरत के जिस्म का इस्तेमाल होता है। क्यों औरत को हर ऐड में एक सामान जैसा समझा जाता है?
Objectionable Ads खामोश या मज़बूर हैं दर्शक
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  • Objectionable Ads टीवी पर बाइक का एक विज्ञापन आता था जिसमें एक स्त्री बाइक पर लेटी नजर आती है और फिर बाइक के रूप में बदल जाती है, एक टूथपेस्ट के प्रोडक्ट में तो सास अपनी बहू से पूछती हैं कि बहू तुम रोज रात को करते हो न? तो बहू जवाब देती है, करते हैं, मगर दर्द होता है। तब सास उस प्रॉडक्ट को इस्तेमाल करने की सलाह देते हुए कहती हैं, इसे इस्तेमाल करो, इससे उन्हें भी पूरी रात प्रॉटेक्शन, रिलेक्सिंग और रिफ्रेशिंग फील होगा, क्योंकि वे तो वही इस्तेमाल करती हैं। सबकुछ हाइजेनिक रखते हो, ओरल भी रखो, इस ऐड को देखते हुए प्रतीत होता है कि हो न हो ये सेक्स बेस्ड प्रोडक्ट होगा, मगर विज्ञापन के अंत में वो टूथपेस्ट निकलता है।
Objectionable Ads खामोश या मज़बूर हैं दर्शक
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Objectionable Ads  मनोरंजन में ज़हर घोलते अश्लील कंटेंट

Objectionable Ads आप ही देखिए, अगर मर्दों का प्रॉडक्ट हैं, तब भी केंद्र में कोई सेक्सी लेडी होगी और अगर औरतों का प्रॉडक्ट है, तब भी वह अपने किसी मसाले, साबुन या ब्यूटी प्रॉडक्ट से मर्द को खुश करती ही नजर आती है। वरना पुरुषों की दाढ़ी बनाने वाले रेजर के सॉफ्ट होने की तुलना औरत के बदन से क्यों होनी चाहिए? असल में यह औरत को उपभोग, आनंद, संतुष्टि देने वाली सोच ही इन सब विज्ञापनों की जड़ है। कहीं न कहीं औरत ने भी खुद को उस सोच में ढाल लिया है।’

Objectionable Ads खामोश या मज़बूर हैं दर्शक
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Objectionable Ads एक अन्य विज्ञापन में तो सीधे-सीधे कहा गया है कि लैला (लड़की) को करना हो इम्प्रेस, तो खाओ मिंटो फ्रेश! और उस विज्ञापन में मेल मॉडल के वो गोली खाते ही बैकलेस चोली पहने सेक्सी-सी लैला इम्प्रेस हो जाती है। एक अन्य विज्ञापन में एक नई-नवेली दुलहन पड़ोसी की बॉडी स्प्रे की खुशबू से मदमस्त होकर अपने गहने और कपड़े उतारने पर आमादा हो जाती है, तो एक ऐड में लड़की लिफ्ट में सवार अजनबी के बॉडी स्प्रे से आकर्षित होकर उससे चिपक जाती है। पुरुषों के सूट वाले विज्ञापन में फोकस औरत के नितंबो पर होता है, तो कार के साथ बोनट पर सेक्सी सुंदरियां नजर आती हैं।

Objectionable Ads खामोश या मज़बूर हैं दर्शक
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  • Objectionable Ads सेक्सिएस्ट विज्ञापनों के लिए हमारी इंडस्ट्री के जाने-माने सेलेब्स भी सवालों के घेरे में आए हैं। 90 के दशक में सनसनी फैलाने वाली पूजा बेदी के कामसूत्र विज्ञापन को दूरदर्शन ने बैन कर दिया था, तो वहीं मिलिंद सोमन और मधु सप्रे के एक शूज के ऐड में दोनों के अजगर लिपटे न्यूड पोज ने उन्हें अदालत तक पहुंचा दिया था। सालों पहले बिपाशा बसु और डीनो मोरिया के इनरवियर के ऐड पर हंगामा मचने के बाद इसे बैन कर दिया गया था। सना खान के ‘ये तो बड़ा टॉइंग’ जैसे अंडर वियर के विज्ञापन को भी विरोध के बाद प्रतिबंधित कर दिया गया था। कुछ अरसा पहले विकी कौशल और रश्मिका मंदाना को एक अंडर वियर के एड के लिए काफी ट्रोल होना पड़ा था।
Objectionable Ads खामोश या मज़बूर हैं दर्शक
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  • Objectionable Ads  ये सब होने के बावजूद आज ऐड निर्माता और कलाकार किस मकसद और किस सोच के साथ टीवी प्रचार के लिए इतना आपत्तिजनक कंटेंट बना रहे है ,  सोच से परे है। जब भारत में संस्कारों और परम्पराओं की बात आज भी सबसे पहले होती है तो धीमे ज़हर की तरह मनोरंजन  में फैलती अश्लीलता पर सरकार और टीवी इंडस्ट्री का बेलगाम होना अखरता है।

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