Sri Lanka Crisis श्रीलंका की ये असलियत सामने ला रही है एक प्रतिष्ठित मीडिया हॉउस जिसकी रिपोर्ट को साभार हम आपके लिए पेश कर रहे हैं। भारत के पड़ोस में आर्थिक हालात ने लोगों को सेक्स के धंधे में आने को मजबूर कर दिया है। इनमें पुरुष-महिलाएं दोनों हैं। बहुत सी कम उम्र की लड़कियां हैं, जो पढ़ाई का खर्च चलाने के लिए इस काम में लग गई हैं। सुनिए उसकी जुबानी ये आपबीती कहानी –
Sri Lanka Crisis : श्रीलंका में सेना के कमांडो पुरुष बन रहे Gigolo

- Sri Lanka Crisis ‘मैं कुछ महीने पहले ही इस धंधे में आया हूं। श्रीलंका में रहना महंगा होता जा रहा था। मुझे पैसों की जरूरत थी। ये आसान काम नहीं है। बेहद मुश्किल और असुरक्षित काम है। हम यहां नहीं जानते कि कब क्या हो जाए। मैं श्रीलंका की सेना में मिडिल रैंक में था। कमांडो भी रहा, लेकिन वेतन बहुत नहीं था। ज्यादा से ज्यादा पैंतालीस हजार रुपए ही कमा पाता था।

- फिर मैं नौकरी छोड़कर मिडिल-ईस्ट चला गया। कोरोना फैला तो लौट आया। तब से यहां हालात और खराब होते चले गए। मैं तीन बच्चों का पिता हूं। मेरे घर वाले नहीं जानते कि मैं क्या काम करता हूं। समाज में लोग रिस्पेक्ट करते हैं, लेकिन इतना पैसा नहीं कमा पाता था कि परिवार को रिस्पेक्टफुल लाइफ दे पाऊं। परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए मुझे इस काम में आना पड़ा। अब मैं सेना की नौकरी से अधिक कमाता हूं। परिवार चला पा रहा हूं और कुछ पैसे जोड़ने की भी कोशिश कर रहा हूं, ताकि फिर से मिडिल-ईस्ट जाकर नौकरी कर सकूं।
Sri Lanka Crisis पता नहीं परिवार स्वीकार करेगा या नहीं

- मैं जानता हूं कि मेरे परिवार को इस काम के बारे में पता चला तो वो मुझे स्वीकार नहीं करेंगे। ये नहीं जानता कि कब तक ये काम करूंगा। हो सकता है कि कल ही छोड़ दूं। पर अभी मेरे हालात ऐसे हैं कि ये काम नहीं छोड़ पाऊंगा। इस पेशे में आने की एक बड़ी वजह कोरोना भी है। कई नौकरियां करने की कोशिश की, पर सब बंद होते चले गए। जॉब छूट गई। फिर यहां के खराब होते हालात ने जिंदगी और भी मुश्किल कर दी। मेरे लिए अपने बच्चों को खाना खिलाना तक मुश्किल हो रहा था।
- मेरे सामने ऐसे हालात बन गए कि ये नहीं सोच पाया कि जो करने जा रहा हूं वो सही है या गलत। घर में बच्चे भूखे हों तो सही-गलत का फर्क कहां रह जाता है…। मैं यहां जिगोलो भी हूं और मैनेजर भी। ऐसे में मुझे अपनी लड़कियों का भी ख्याल रखना होता है।
Sri Lanka Crisis यहां महिलाएं खुशी की तलाश में आती हैं

- यहां हर तरह के लोग आते हैं। लड़कियां जो पुरुषों के लिए करती हैं, मैं वही काम महिलाओं के लिए करता हूं। यहां महिलाएं खुशी की तलाश में आती हैं। वो देश के हालात से परेशान हैं, पारिवारिक हालात से परेशान हैं। कुछ महिलाएं सिर्फ मसाज कराती हैं और खूब सारी बातें करती हैं। कुछ को सेक्स भी चाहिए होता है। कुछ अलग-अलग तरह से अपने आप को खुश करना चाहती हैं।

- मैं जब उनके साथ होता हूं तो मेरे जेहन में यही चल रहा होता है कि यहां ‘हैपी एंडिंग’ हो और वो खुश होकर यहां से जाएं। मेरे पास आने वाली बहुत सी महिलाएं प्रोफेशनल हैं, वो जॉब करती हैं। कुछ अपने पारिवारिक झगड़ों से परेशान हैं। कुछ के पास कोई भी नहीं है, जिससे वो दिल की बात कर सकें। श्रीलंका के मौजूदा हालात ने सभी को परेशान कर दिया है। लोग अवसाद में हैं, वो खुशी तलाश रहे हैं। कई बार बहुत मेहनत करने के बाद भी उन्हें खुशी नहीं मिलती। उसी खुशी की तलाश में वो यहां आते हैं।

Sri Lanka Crisis कुछ देर के लिए ही सही, मैं जिंदगी में रंग भर रहा हूं
- Sri Lanka Crisis राजधानी कोलंबो में दूर-दूर से आए हुए लोग रहते हैं। उनके परिवार दूर होते हैं। वो दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन खुशी नहीं मिल पाती। उन्हें जिंदगी का खूबसूरत रंग नहीं दिख पाता। कुछ देर के लिए ही सही, मैं उनकी जिंदगी में रंग भरता हूं। अधिकतर महिलाएं जो मेरे पास आती हैं वो तनावमुक्त होना चाहती हैं। वो पैंतालीस मिनट के लिए मुझे बुक करती हैं। इस दौरान मैं उनकी खूब तारीफें करता हूं, क्योंकि मैं जानता हूं कि वो अपनी जिंदगी की परेशानियों से दूर होने के लिए यहां आई हैं।

Sri Lanka Crisis : श्रीलंका में सेना के कमांडो पुरुष बन रहे Gigolo
- मैं उन्हें स्वीटहार्ट, एंजल, ब्यूटीफुल कहता हूं तो उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। वो शर्माते हुए कहती हैं- ऐसा पहले किसी ने नहीं कहा। महिलाएं मुझसे कहती हैं कि उनके पति उनकी तारीफ ही नहीं करते, उनमें दिलचस्पी नहीं दिखाते। वो मुझसे कहती हैं कि जो प्यार उन्हें यहां मिलता है वो उन्हें अपनी जिंदगी में नहीं मिल पा रहा है।

Sri Lanka Crisis : श्रीलंका में सेना के कमांडो पुरुष बन रहे Gigolo - Sri Lanka Crisis आजकल श्रीलंका में सब परेशान हैं। मुझे लगता है कि मैं अपने इस काम के जरिए उनकी परेशानियों को कुछ कम कर रहा हूं। मैं नहीं जानता कि लोग इस काम को किस तरह से देखते हैं, लेकिन मैं अब इसे एक सम्मानित काम मानता हूं, क्योंकि मैं निराश लोगों को खुशी देता हूं और श्रीलंका के निराश लोगों को इस वक्त खुशी की सबसे ज्यादा जरूरत है।’
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