swarg ka dwar उत्तराखंड में है स्वर्ग और नरक का द्वार !

swarg ka dwar अगर आप रोमांचक यात्रा , धार्मिक आस्था से जुड़े रहस्यों को जानने के इच्छुक हैं तो आइये उत्तराखंड की देवभूमि में जहाँ आपको ऎसी कई जगहें मिल जाएँगी जो न सिर्फ धार्मिक महत्व रखती हैं, बल्कि अपने रहस्यों के कारण दुनिया भर के लोगों को अपनी ओर खींचती हैं. इन्हीं में से एक है पाताल भुवनेश्वर मंदिर, जहां की गुफा को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं. यह गुफा मंदिर न सिर्फ भक्तों के लिए एक आस्था का केंद्र है, बल्कि इसकी प्राकृतिक संरचना और रहस्यमयी कहानियां हर किसी को हैरान कर देती हैं. पाताल भुवनेश्वर मंदिर तक पहुंचने के लिए आपको 90 फीट गहरी गुफा में नीचे उतरना होता है.

गुफा में प्रवेश करते ही नजर आते हैं शेषनाग swarg ka dwar

यहां आने वाले श्रद्धालुओं को पतली और ऊबड़-खाबड़ सुरंगों के जरिए बड़ी सावधानी से उतरना पड़ता है. दोनों तरफ लोहे की चेन लगी होती हैं, ताकि भक्त सुरक्षित रहें. अंदर जाना और बाहर निकलना दोनों ही बहुत मुश्किल है, लेकिन भक्तों की आस्था इतनी गहरी है कि वे हर रुकावट को पार कर यहां तक पहुंच जाते हैं. गुफा में प्रवेश करते ही आपको शेषनाग की आकृति दिखाई देती है. स्थानीय लोग मानते हैं कि धरती इन्हीं के फन पर टिकी हुई है.

स्वर्ग, नरक, मोक्ष और पाप के चार द्वार

यहां भगवान महादेव शिव का निवास होने की मान्यता है, जिसके कारण यह स्थान देवभूमि का सबसे रहस्यमय और पूजनीय स्थल माना जाता है. मंदिर के भीतर स्वर्ग, नरक, मोक्ष और पाप के चार अद्भुत द्वार हैं. ये द्वार जीवन के चार चरणों और कर्मों का प्रतीक माने जाते हैं. इसके अलावा, यहां 33 करोड़ देवी-देवताओं के स्वरूप और भगवान गणेश के सिर के दर्शन एक साथ होते हैं, जो इस स्थान को और भी विशेष बनाता है.

इस गुफा में स्थित शिवलिंग की एक विशेष मान्यता है. कहा जाता है कि यह शिवलिंग लगातार बढ़ रहा है और जब यह गुफा की छत को छू लेगा, तो दुनिया का अंत हो जाएगा. यही बात इस स्थान को और भी रहस्यमय बनाती है. आपको बता दें कि पाताल भुवनेश्वर मंदिर उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में गंगोलीहाट से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. यह गुफा लगभग 160 मीटर लंबी और 90 फीट गहरी है और अपने आप में एक रहस्यलोक है.