Uttarakhand BJP विधायक बनने की चाह – रूचि भट्ट ,शादाब शम्स ने ठोंकी दावेदारी

Uttarakhand BJP  उत्तराखंड भारतीय जनता पार्टी में टिकटों को लेकर दावेदारी और भागीदारी की बात अब खुलकर होने लगी है। बीते कुछ महीनो में कई विधानसभाओं पर कई दावेदारों ने अपना खुलकर हिस्सा मांगना भी शुरू कर दिया है। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने दो टूक चेतावनी भी दी है कि सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफार्म पर कोई भी कार्यकर्ता और नेता टिकटों की दावेदारी और संगठन को दबाव में लेने की कोशिश ना करें। लेकिन चुनाव करीब आते आते अब विधायक बनने की चाह रखने वाले नेताओं ने अपने लिए टिकटों की दावेदारी करना शुरू कर दिया है। ज्यादातर उन सीटों पर टिकटों की दावेदारी की जा रही है जहां पर भाजपा के या तो कैबिनेट मंत्री मजबूत माने जाते हैं या भाजपा के ही विधायक सदन में पहुंचे हैं। ऐसे में अपने ही विधायक के सामने कई भाजपा के बड़े नेता टिकटों की दावेदारी कर कहीं ना कहीं पार्टी के लिए असहज स्थिति भी पैदा कर रहे हैं।

दावेदारों की फ़ौज तैयार – जोश में हैं दावेदार Uttarakhand BJP

Uttarakhand BJP
वही अलग-अलग मोर्चों के नेता भी अब अपने लिए टिकट मांगते नजर आ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रुचि भट्ट का नाम भी अब इसमें जुड़ गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश और देश में जिस तरह से महिलाओं के राजनीतिक हक की बात की जा रही है और आरक्षण की बात चल रही है ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को टिकट दे इसके लिए वह आला कमान और पार्टी नेतृत्व के सामने प्रस्ताव रखेंगी । प्रदेश अध्यक्ष रूचि भट्ट से जब यह सवाल किया गया की कितनी सीटों पर महिला उम्मीदवारों को उतारने का उन्होंने तैयारी की है तो प्रदेश अध्यक्ष रुचि भट्ट ने कहा कि महिला मोर्चा की 70 महिलाएं 70 विधानसभा में चुनाव लड़ने के लिए तैयार भी हैं और जिताऊ भी हैं।

भाजपा में खुलकर होने लगी टिकटों की दावेदारी 


हालांकि उन्होंने दबी जुबान यह भी कहा कि कम से कम बीस विधानसभा सीटों पर महिला उम्मीदवारों को उतारने की तैयारी की जा रही है ताकि सदन में अच्छी खासी संख्या महिलाओं की भारतीय जनता पार्टी की तरफ से प्रतिनिधित्व कर सकें। वही जब हमने उनसे पूछा कि प्रदेश अध्यक्ष के नाते वह खुद किस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का मन बना रही है तो उन्होंने कहा कि देहरादून की डोईवाला सीट उनकी अपनी सीट है जहां वह लंबे समय से काम कर रही हैं। ऐसे में भले ही पार्टी के सिटिंग विधायक वहां से जीते हो लेकिन बावजूद इसकी वह अपनी दावेदारी नहीं छोड़ेंगी और जब बात टिकट बंटवारे की होगी तो खुलकर अपना पक्ष संगठन के सामने रखेंगी और उन्हें उम्मीद है कि उन्हें डोईवाला से टिकट मिलेगा और वह जीतकर सदन में पहुंचेंगी ।


वहीं दूसरी तरफ जब हमने भारतीय जनता पार्टी के अल्पसंख्यक समुदाय का लम्बे समय से झंडा उठाने वाले और मुस्लिम नेताओं से उनकी राय जाननी चाहिए तो प्रदेश के बड़े और चर्चित मुस्लिम चेहरे शादाब शम्स , जो उत्तराखंड वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों को भी इस बार पार्टी टिकट दे और वह जीत कर सदन में पहुंचे इसके लिए वह खुद मुख्यमंत्री और संगठन से चर्चा करेंगे उन्होंने कहा कि प्रदेश की कई ऐसी सीट हैं जहां राज्य बनने से अब तक भारतीय जनता पार्टी का कमल नहीं खिला है। ऐसे में उनकी नजर कलियर विधानसभा और मंगलोर विधानसभा पर खास तौर पर लगी हुई है जहां बड़ी संख्या में मुस्लिम वोटर है और पार्टी को वहां कोई खास जनाधार नहीं मिलता है।

ऐसे में बोर्ड के अध्यक्ष शम्स ने कहा कि वह खुद कलियर से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं और समय आने पर पार्टी के सामने टिकट की मांग भी करेंगे। वहीं उन्होंने कहा कि कई ऐसी विधानसभा हैं जहां बड़ी संख्या में मुस्लिम वोटर जीत हार का फैसला तय करते हैं ऐसे में पार्टी को चाहिए कि कुछ मुस्लिम उम्मीदवार इस बार मैदान में जरूर उतारें क्योंकि पार्टी में बड़े कद के मुस्लिम नेता भी मौजूद हैं लेकिन उन्हें हर बार नजर अंदाज कर दिया जाता है लेकिन इस बार वह अल्पसंख्यकों की तरफ से खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के सामने अपनी दावेदारी के साथ-साथ मुस्लिम उम्मीदवारों के लिए वो हक की मांग करेंगे।

भारतीय जनता पार्टी में इस वक्त एक अनार एक दर्जन उम्मीदवार


दरअसल भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का जबसे दौरा हुआ और प्रदेश में चुनावी माहौल बनता नजर आया उसके बाद से ही तमाम विधानसभा सीटों पर दावेदारों की लंबी चौड़ी लिस्ट भी नजर आने लगी है। जो अलग-अलग माध्यमों से प्रदेश संगठन के सामने अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। फिर बात चाहे कैंट विधानसभा में एक दर्जन से ज्यादा मजबूत दावेदारों की बात हो या मसूरी विधानसभा से पार्टी के ही कई दिग्गज नेताओं का दावा ठोका हो , प्रदेश अध्यक्ष के बयान के बाद भी जिस तरह से यह नेता खुलकर अपने लिए टिकटों की मांग कर रहे हैं उससे लगता है कि जैसे-जैसे चुनाव करीब आएगा विधायक बनने की इच्छा रखने वाले भाजपा नेताओं की अच्छी खासी संख्या भी सामने आएगी लेकिन सवाल यह उठाएगी क्या अनुशासन में रहते हुए टिकट न पाने वाले नेता पार्टी के लिए वफादार बने रहेंगे और पार्टी जिसको टिकट देगी उसके जीतने के लिए एकजुट रहेंगे क्योंकि राजनीतिक पार्टियों से जुड़ने वाला नेता आखिरकार टिकट की चाह में ही पार्टी का झंडा और डंडा उठाता है लेकिन भारतीय जनता पार्टी में इस वक्त एक अनार एक दर्जन उम्मीदवार जैसे हालात बनते नजर आ रहे हैं ऐसे में आने वाले दिनों में दावेदारों की लिस्ट और लंबी होगी इससे इनकार नहीं किया जा सकता है।