uttarakhand cag report उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) की वित्तीय स्थिति को लेकर कैग (CAG) की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2021 से 2024 के बीच यूपीसीएल की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, लेकिन साथ ही खर्च भी तेजी से बढ़ गया, जिससे निगम पर वित्तीय दबाव बढ़ने लगा।कैग के मुताबिक वर्ष 2020-21 में संचालन से यूपीसीएल की आय 6,453.92 करोड़ रुपये थी, जो बढ़कर 2023-24 में 9,648.12 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। हालांकि इस अवधि में बिजली खरीद की लागत भी काफी बढ़ गई। वर्ष 2020-21 में बिजली खरीद पर 5,574.46 करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जो 2023-24 में बढ़कर 8,566.36 करोड़ रुपये हो गए।

पहाड़ी क्षेत्रों में ज्यादा वितरण हानि uttarakhand cag report
कैग रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पहाड़ी क्षेत्रों में बिजली वितरण हानि का स्तर अधिक है। पांच विद्युत वितरण मंडलों—रुड़की, लालकुआं, पिथौरागढ़, देहरादून और कर्णप्रयाग की पहचान की गई है, जहां नुकसान सबसे ज्यादा है। इनमें से चार मंडल पहाड़ी क्षेत्रों में आते हैं, जहां कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और कम उपभोक्ताओं के कारण वितरण व्यवस्था महंगी और जटिल हो जाती है।
रिपोर्ट के अनुसार रुड़की विद्युत मंडल में वर्ष 2021 से 2024 के दौरान लगभग 964.465 मिलियन यूनिट बिजली का नुकसान हुआ, जिससे यूपीसीएल को करीब 488.50 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ा।कैग ने यह भी बताया कि बिजली चोरी रोकने के लिए समर्पित पुलिस थाने स्थापित करने का निर्णय लंबे समय से लंबित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में बिजली चोरी रोकने के लिए विशेष पुलिस थाने पहले से स्थापित हैं। इसलिए उत्तराखंड में भी जल्द ऐसे थाने स्थापित करने की सिफारिश की गई है।

रिपोर्ट में कई अन्य वित्तीय पहलुओं का भी उल्लेख किया गया है
अतिरिक्त प्रतिभूति राशि को 12 मासिक किस्तों में वसूलने का फैसला किया गया।
अक्टूबर 2024 तक 181.08 करोड़ रुपये की वसूली की गई।
तय भार से अधिक बिजली उपयोग करने वाले 1.34 लाख घरेलू उपभोक्ताओं का भार संशोधित कर 10.83 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बिल जारी किए गए।
औद्योगिक उपभोक्ताओं से जुड़े अतिरिक्त मांग शुल्क के मामलों की समीक्षा शुरू की गई।
1.13 लाख उपभोक्ताओं पर 385.34 करोड़ रुपये बकाया पाया गया।
प्रतिभूति राशि प्रबंधन में कमी के कारण 769.10 करोड़ रुपये का बकाया सामने आया।
यूपीसीएल का पक्ष
यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक अनिल यादव ने कहा कि कैग की यह रिपोर्ट वर्ष 2021 से 2024 की अवधि पर आधारित है और इसके बाद निगम तकनीकी रूप से काफी आगे बढ़ चुका है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी 12 हजार औद्योगिक संस्थानों में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिससे वितरण नुकसान में लगभग पांच प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में जिन नुकसान का जिक्र है, उनमें तकनीकी नुकसान भी शामिल हैं, जो बिजली के प्रवाह के दौरान स्वाभाविक रूप से होते हैं। उनके अनुसार प्रदेश में कुल वितरण नुकसान को सात प्रतिशत से घटाकर तीन से चार प्रतिशत तक लाने में सफलता मिली है।

