Story By : Anita Tiwari , Dehradun

Wedding Ceremony शादी , इंसान की ज़िंदगी का सबसे रूमानी अवसर होता है। ये वो लम्हा होता है जिसको हर शख्स याद रखना चाहता है , उसे यादगार बनाना चाहता है। यही वजह है कि आज इसके शान ओ शौकत में बेहिसाब खर्च किया जाता है। दिखावा और अमीरी के प्रदर्शन में एक रात के कुछ घंटों के लिए करोड़ों रुपये लुटा दिये जाते है।
Wedding Ceremony आप भी करेंगे समर्थन

- Wedding Ceremony इसी दिखावे और खर्चीले शादी की रस्म के पहले दूल्हे ने ऐसी डिमांड कर दी जो सोशल मीडिया पर आज बेफिजूल के खर्च और शादी की हुड़दंग पर बड़ा बदलाव लाने का हिमायती बन गया है। सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से विवाह संस्कार को लेकर एक पोस्ट तेजी से घूम रही है। बड़ी संख्या में यूजर्स इसे लाइक, शेयर और कमेंट कर रहे हैं। संभवतः इस पोस्ट में दीं बातें काल्पनिक हैं, लेकिन यह दिल को छू लेने वाली हैं।

Wedding Ceremony आश्चर्यचकित हुआ वधू परिवार
- Wedding Ceremony पोस्ट कुछ इस प्रकार है। इंदौर में वर की मांगों से आश्चर्यचकित हुआ वधू परिवार। विवाह पूर्व एक लड़के की अनोखी मांगों से कन्या पक्ष हैरान है। लड़के की मांगों की चर्चा पूरे शहर में हो रही है। यह मांगें दहेज को लेकर नहीं, बल्कि विवाह संपन्न कराने के तरीके को लेकर हैं। अब जरा मांगों पर गौर फरमाएं। पहली मांग- कोई प्री वेडिंग शूट नहीं होगा। दूसरी मांग- वधू विवाह में लहंगे के बजाय साड़ी पहनेगी। तीसरी मांग – मैरिज लॉन में ऊलजुलूल अश्लील कानफोड़ू संगीत के बजाय हल्का इंस्ट्रूमेंटल संगीत बजेगा।

- चौथी मांग
Wedding Ceremony वरमाला के समय केवल वर-वधू ही स्टेज पर रहेंगे। पांचवीं मांग- वरमाला के समय वर या वधू को उठाकर उचकाने वालों को विवाह से निष्कासित कर दिया जाएगा। छठी मांग- पंडित जी द्वारा विवाह प्रक्रिया शुरू कर देने के बाद कोई उन्हें रोके-टोकेगा नहीं। सातवीं मांग- कैमरामैन फेरों आदि के चित्र दूर से लेगा, न कि बार-बार पंडित जी को टोककर। ये देवताओं का आह्वान करके उनके साक्ष्य में किया जा रहा विवाह समारोह है, ना की किसी फिल्म की शूटिंग। वर-वधू द्वारा कैमरामैन के कहने पर उल्टे-सीधे पोज नहीं बनाए जाएंगे।

- आठवीं मांग
Wedding Ceremony विवाह समारोह दिन में हो और शाम तक विदाई संपन्न हो, जिससे किसी भी मेहमान को रात 12 से 1 बजे खाना खाने से होने वाली समस्या जैसे अनिद्रा, एसिडिटी आदि से परेशान ना होना पड़े। मेहमानों को अपने घर पहुंचने में मध्य रात्रि तक का समय ना लगे और असुविधा ना हो। नौवीं मांग- नव विवाहित को सबके सामने किस या आलिंगन के लिए कहने वाले को तुरंत विवाह से निष्कासित कर दिया जाएगा।

- इंटरनेट की एंट्री
Wedding Ceremony असली परिवर्तन इंटरनेट की एंट्री से शुरू हुआ। हम दुनिया से जुड़ चुके थे और विवाह समारोह चकाचौंध की तरफ बढ़ गए। करीब-करीब एक दशक पहले प्री-वेडिंग शूट की शुरुआत ने तो सबकुछ खुल्लम-खुला कर दिया। जहां पहले वर-वधू के विवाह पूर्व मिलना भी अच्छा नहीं माना जाता था, वहां ओपननेस के नाम पर सबकुछ जायज ठहरा दिया गया। अब तो लाखों-करोड़ रुपए के प्री-वेडिंग शूट्स ही हो रहे हैं, जो एक साधरण मध्यवर्गीय परिवार की पहुंच से दूर हैं, लेकिन चूंकि इसे विवाह का अनिवार्य अंग बना दिया गया है, सो मजबूरी में परिवार सामाजिक प्रतिष्ठा के लिए जेब पर पड़ने वाले बोझ को दबी जुबान से स्वीकार कर रहे हैं।

- विवाह संस्कार या फिल्म की शूटिंग ?
Wedding Ceremony यह भी बिल्कुल सत्य है कि हमारे विवाह संस्कार न रहकर फिल्म की शूटिंग बन चुके हैं। कुछ दिनों पहले तो एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वर-वधू किसी फुहड़ से बॉलीवुड गाने पर डांस करते हुए फेरे ले रहे हैं। यह तो सर्वविदित है कि हमारे यहां दिन में विवाह संपन्न होते थे। दक्षिण भारत में यह परंपरा आज भी है। ऐसा माना जाता है कि मुगलकाल के दौरान कहीं कारणों से उत्तर भारत में विवाह सूर्यास्त के बाद संपन्न होने लगे। निश्चित रूप से यह परिवारों का निजी फैसला है, लेकिन दिन में विवाह एक अच्छा विचार है।
क्या ऐसे हँसते हैं आप ? – https://shininguttarakhandnews.com/types-of-laughter/

