Weight of Soul: आज भी विज्ञान इस सवाल का जवाब ढूंढ रहा है कि आत्मा क्या है ? रोचक खोज ये भी है कि वाकई में आत्मा है भी या नहीं? इसके बारे में अभी कोई वैज्ञानिक जवाब हमें नहीं मिल पाया है. अगर आत्मा है तो कहा है? और कहा जाती है? इसके बारे में आज तक बहुत सारे प्रयोग किए गए हैं मगर इसका जवाब अभी तक नहीं मिल पाया है.इस सब के बाद भी अगर हम आपको बता दें कि आत्मा है. उसका वजन भी होता है जो की 21 ग्राम होता है तो क्या आप यकीन करेंगे ?
Weight of Soul: 21 grams Experiment के नाम से जाना जाता है
Weight of Soul- सन 1901 में Doctor Duncan MacDougall नाम के फिजिशियन ने इस बात का पता लगाने के लिए एक प्रयोग किया था. उन्होंने अपने चार अन्य साथी डॉक्टर्स के साथ इस प्रयोग को किया था. कहा जाता है कि उन्होंने इस प्रयोग के लिए कुछ ऐसे 6 लोगों को चुना जिनकी मौत जल्दी ही होने वाली थी.यह 6 लोग उन्होंने ऐसे चूने थे जो अलग अलग वजह से जल्दी ही मरने वाले थे, और शारीरिक थकावट से ग्रस्त थे. जिससे की वो लोक ज्यादा हलचल ना कर सके और वो प्रयोग ज्यादा से ज्यादा accurate हो.डॉक्टर ने उन लोगों का मरने से पहले का वजन लिया. उसके बाद यही procedure फिर से वह लोग मरने के बाद भी की. दोस्तों इसके बाद जो नतीजे आए वह बहुत चौका देने वाले थे.
मरने से पहले का और मरने के बाद का लोगों का वजन उसमे तकरीबन 21 Gram से 21.8 Gram तक का difference था. इससे यह नतीजा निकाला गया की आत्मा का वजन 21.3 ग्राम Soul Weight-21.3 Grams होता है और इसीलिए इस Theory को 21 ग्राम थिओरी (21 grams Experiment) के नाम से जाना जाता है. हालांकि इस Theory को अभी भी कुछ scientists नहीं मानते है. इस पर अभी भी बहुत सारे विवाद है. इस Theory को ना मानने वाले scientists का कहना है कि, मरने के बाद इंसान का वजन इसलिए कम होता है क्योंकि मौत के बाद फेफड़ों का काम करना बंद हो जाता है. जिससे की रक्त को ठंडा करने की प्रक्रिया बंद हो जाती है और उसकी वजह से शरीर से ज्यादा मात्रा में पसीना चला जाता है और शरीर का वजन कम होता है.
Weight of Soul- लेकिन हम इस बात को भी नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं कि हर एक के शरीर के वजन में 21 ग्राम्स का difference आना तो कोई संयोग नहीं हो सकता. क्योंकि हर एक का वजन अलग अलग होता है. कोई मोटा होता है तो कोई पतला होता है. तो मरने के बाद भी वजन में आई गिरावट अलग अलग होनी चाहिए. लेकिन ऐसा ना होते हुए प्रयोग किए हुए सभी लोगों के वजन में आई गिरावट एक जैसी ही कैसे हो सकती है?इस पर फैसला तो आपका विवेक और वैज्ञानिकों के फैक्ट्स ही करेंगे।