What is Soul मृत्यु इस संसार का सबसे बड़ा और अंतिम सत्य है. जो भी जीव इस संसार में किसी भी रूप में आया है उसकी मृत्यु निश्चित है, लेकिन मृत्यु के बाद जीव की सिर्फ धरतीलोक पर यात्रा समाप्त होती है. मृत्यु के बाद शुरू होती है उस जीव की आत्मा की यात्रा. ऐसा गरुड़ पुराण में वर्णित है. गरुड़ पुराण 18 महापुराणों में शामिल है, जिसमें मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा के बारे में विस्तार से बताया गया है.मान्यता है कि इंसान की मृत्यु होने के बाद उसकी आत्मा तुरंत ही इस धरतीलोक को छोड़कर नहीं जाती है. 13 दिनों तक आत्मा अपने परिवार और घर के आसपास रहती है. हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद कई खास कर्म इसी वजह से ही किए जाते हैं. कहा जाता है कि इन कर्मों को करने से मृतक की आत्मा को शांति प्राप्त होती है और परिवार पर पूर्वजों का आशीर्वाद बना रहता है.
मृत्यु के बाद तुरंत आत्मा कहाँ जाता है ? What is Soul

13वें दिन घर छोड़ती है आत्मा
गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद 13वें दिन का विशेष महत्व होता है. मान्यता है कि ये वही दिन होता है, जब आत्मा घर और परिजनों को अंतिम बार देखती है और छोड़कर चली जाती है. इसलिए तेरहवीं के दिन पूजा-पाठ, पिंडदान और ब्राह्मण भोज जैसे कर्म किए जाते हैं. मान्यता ये भी है कि इस दिन पूर्वज अपने परिवार को देखने आते हैं. यही वजह है कि इस दिन घर का वातावरण शांत और पावन रखने के लिए कहा जाता है.

तेरहवीं के दिन तक कुछ खास बातों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है. इस दिन घर में गंदगी नहीं फैलाने को कहा जाता है. पूजा घर साफ रखने के लिए कहा जाता है. रात में अकेले रोने या मृत व्यक्ति को बार-बार आवाज लगाने से मना किया जाता है. धार्मिक जानकार मानते हैं कि इन गलतियों को करने से मृतक की आत्मा को कष्ट पहुंच सकता है. यही नहीं बार-बार आवाज लगाने से मृतक आत्मा का मोह बढ़ता है और उसे शांति मिलने में परेशानी हो सकती है.

आत्मा के इस रहस्यमय सफर के मुख्य चरण निम्नलिखित हैं:
शरीर से मुक्ति (पहला क्षण): मृत्यु के तुरंत बाद प्राण ऊर्जा (आत्मा) शरीर छोड़ देती है。आत्मा अपने ही मृत शरीर को बाहर से देखती है और अपने परिवार वालों को रोता हुआ सुन व देख सकती है, लेकिन स्वयं उनसे संपर्क नहीं कर पाती।
१३ दिनों तक घर में उपस्थिति: हिंदू मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा लगभग १३ दिनों तक अपने घर और प्रियजनों के आसपास ही रहती है。उसे अपने कर्मों का बोध होता है और मोह-माया के कारण वह अपने स्थान से बंधी रहती है।
यमलोक की यात्रा: १३ दिनों की अवधि के बाद, आत्मा यमदूतों के साथ यमलोक (न्याय के स्थान) की यात्रा पर निकलती है。मार्ग में आत्मा को अपने कर्मों के अनुसार सुख या कष्ट का अनुभव होता है।
चित्रगुप्त और यमराज का न्याय: यमलोक में चित्रगुप्त जी आत्मा के हर छोटे-बड़े कर्म का लेखा-जोखा खोलते हैं。इसके आधार पर यमराज आत्मा को स्वर्ग, नर्क या पुनर्जन्म का दंड/पुरस्कार देते हैं।
पुनर्जन्म या मुक्ति: अधिकांश आत्माएं अपने कर्मों के अनुसार दोबारा मनुष्य या अन्य योनियों में जन्म लेती हैं。अगर आत्मा ने जीवनभर निष्काम कर्म और अच्छे कार्य किए हैं, तो उसे ‘मोक्ष’ की प्राप्ति होती है और वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाती है।

