When kids should not tell truth माता-पिता बच्चों को जरूर सिखाएं ये झूठ

When kids should not tell truth माता-पिता कभी नहीं चाहते कि बच्चे को कभी झूठ बोलना पड़े. लेकिन, ऐसी कुछ सिचुएशन हैं जहां बच्चा अगर सच कहता है तो उसकी जान खतरे में पड़ सकती है. इसी बारे में बताते हुए पुलिस के साइबर एक्सपर्ट की सलाह है कि ऐसे कुछ झूठ हैं जो बच्चे को सिखाने जरूरी हैं जिससे कि बच्चेा खुद को सुरक्षित रख सके.आमतौर पर कहा जाता है कि झूठ बोलना बहुत गलत बात होती है. हमेशा सच बोलना चाहिए. ये सही और ऐसा होना भी चाहिए. मगर आज के दौर में अगर कोई झूठ बच्चों की जिंदगी बचा ले तो माता-पिता को उन्हें ये जरूर सिखाना चाहिए.

बच्चों का इन 5 मौकों पर ‘झूठ’ बोलना जरूरी When kids should not tell truth


कुछ परिस्थितियां ऐसी भी होती हैं, जहां बच्चों का झूठ बोलना ही ठीक है, खासकर तब, जब बात उनकी सेफ्टी की हो। चाइल्ड सेफ्टी एक्सपर्ट्स का मानना है कि कुछ खास हालात में बच्चों को ऐसे झूठ बोलने सिखाना जरूरी है, जो उन्हें संभावित खतरे से बचा सकें। यह किसी को धोखा देने के लिए नहीं, अपनी सुरक्षा के लिए अपनाई जाने वाली समझदारी है:

‘क्या तुम घर पर अकेले हो?’

अगर कोई अनजान व्यक्ति दरवाजा खटखटाकर पूछे कि मम्मी-पापा घर पर हैं या नहीं, तो बच्चे को कभी यह नहीं बताना चाहिए कि वह घर में अकेला है। उसे कहना चाहिए कि सब लोग हैं, क्या काम है। इससे सामने वाले को यह संकेत मिलता है कि घर में बड़े लोग मौजूद हैं और गलत इरादे वाला व्यक्ति पीछे हट सकता है।

‘चलो मैं तुम्हें लिफ्ट दे दूं’

अगर कोई अजनबी जबरन लिफ्ट देने की कोशिश करे तो बच्चा झूठ बोल दे कि अभी उसके पापा या मम्मी उसे लेने आ रहे हैं। ये एक झूठ किसी अनचाही मुश्किल से उसे बचा सकता है।

जब कोई कुछ ऑफर करे

चॉकलेट, खिलौना या कोई गिफ्ट देकर बच्चों का भरोसा जीतने की कोशिश की जा सकती है। ऐसे में बच्चे चाहे तो मना करे या फिर बोल दे कि मेरे दांत में दर्द है, मैं कुछ नहीं खा सकता। ये झूठ भी उसकी सुरक्षा के लिहाज से बहुत जरूरी है।

कोई अजनबी मांगे जानकारी

अगर कोई अनजान व्यक्ति बच्चे से उसका घर का पता, स्कूल का नाम, फोन नंबर या माता-पिता की जानकारी पूछे, तो उसे हर सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं है। बच्चे को सिखाएं कि वह ऐसी जानकारी देने से मना कर दे या कुछ भी गलत पता बता दे।


‘ये बात घर पर मत बताना’

अगर कोई व्यक्ति बच्चे से कहे कि ‘यह बात मम्मी-पापा को मत बताना’, तो बच्चे को उस समय बहस करने की जरूरत नहीं है। लेकिन घर पहुंचते ही उसे पूरी बात अपने माता-पिता या किसी भरोसेमंद बड़े को जरूर बतानी चाहिए। बच्चों को यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि वे बिना डरे हर बात अपने परिवार से साझा कर सकते हैं।

बच्चों को झूठ बोलना सिखाने का उद्देश्य उन्हें बेईमान बनाना नहीं है। मकसद केवल इतना है कि वे किसी भी संदिग्ध या खतरनाक स्थिति में खुद को सुरक्षित रख सकें।