Women Selling Their Eggs भारत में असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) एक्ट, 2021 के तहत अंडाणुओं को बेचना या खरीदना पूरी तरह से गैरकानूनी है। दलाल अक्सर झुग्गी-झोपड़ियों की गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को निशाना बनाते हैं और उन्हें थोड़े से पैसों (लगभग ₹20,000 से ₹30,000) का लालच देकर अंडाणु दान करने के लिए राजी करते हैं। वही अंडाणु बाद में बांझ दंपतियों को ₹2 लाख से ₹5 लाख या उससे भी अधिक कीमत पर बेचे जाते हैं। इस अवैध कारोबार को छुपाने के लिए गिरोह फर्जी आधार कार्ड और दस्तावेजों का उपयोग करते हैं ताकि डोनर की पहचान और उम्र (कई मामलों में नाबालिग लड़कियां) छिपाई जा सके।
लाखों रुपये में बेचे जा रहे महिलाओं के अंडे !Women Selling Their Eggs

महिलाओं को अंडाणु उत्पादन बढ़ाने के लिए भारी मात्रा में हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकते हैं और भविष्य में उनकी प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित कर सकते हैं। कानून के अनुसार, कोई भी महिला अपने जीवनकाल में केवल एक बार अंडाणु दान कर सकती है और इसके लिए उसे कोई भुगतान नहीं किया जाना चाहिए (सिर्फ चिकित्सा खर्च की भरपाई हो सकती है)।हाल ही में महाराष्ट्र के ठाणे जैसे इलाकों में ऐसे गिरोहों का भंडाफोड़ हुआ है, जहाँ 500 से अधिक महिलाओं के शोषण का संदेह जताया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, लोग अब जीवन में देरी से बच्चे पैदा कर रहे हैं, जिससे अंडाणुओं की मांग बढ़ी है और इस वजह से यह काला बाजार फल-फूल रहा है।
500 से अधिक महिलाओं के शोषण का संदेह Women Selling Their Eggs

गरीबी और मजबूरी इंसान से क्या कुछ नहीं करवा देती, इसकी एक रूह कंपा देने वाली मिसाल बदलापुर में देखने को मिली है। यहां एक बेबस महिला ने अपनी सेहत की परवाह किए बिना रिकॉर्ड 37 बार अपने अंडाणु Eggs बेच डाले और बाद में खुद इस घिनौने रैकेट की मुख्य एजेंट बन गई। पुलिस ने इस अवैध अंडाणु तस्करी सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए महज 88 दिनों के भीतर उल्हासनगर की एक अदालत में ही 5,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें 5 डॉक्टरों समेत 15 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
भारत के सख्त कानून ‘असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी रेगुलेशन एक्ट’ के मुताबिक, कोई भी महिला अपने पूरे जीवन में सिर्फ एक बार ही अंडाणु दान कर सकती है, क्योंकि बार-बार ऐसा करना जानलेवा हो सकता है। लेकिन इस मामले में गिरफ्तार मुख्य महिला आरोपी ने खुद 37 बार इस असहनीय दर्द को सहा। जब उसे इस धंधे में मोटी कमाई का चस्का लगा, तो वह खुद विलेन बन गई। उसने पैसों की तंगी से जूझ रही और अपने बच्चों का पेट पालने के लिए मजबूर अन्य गरीब महिलाओं को ढूंढना शुरू किया और उन्हें इस दलदल में धकेल दिया।
रडार पर 30 डॉक्टर
जांच में खुलासा हुआ कि महिलाओं को एक बार अंडे दान करने पर 25,000-30,000 रुपये मिलते थे। बिना देखरेख के महिलाओं को हार्मोनल इंजेक्शन दिए जाते थे। आगे इन अंडों को लाखों रुपये में बेचा जाता था…..88 दिनों की जांच के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है। इसमें पांच डॉक्टरों समेत 15 लोगों को आरोपी बनाया गया है। अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनका गिरोह से सीधा संबंध मिला है। वहीं सात अन्य लोगों को नोटिस भेजा गया है। चार्जशीट में 25 गवाह और 30 महिलाओं द्वारा करीब 250 अंडाणु दान करने का उल्लेख है।

रडार पर 30 डॉक्टर
पुलिस 30 डॉक्टरों और पीड़ितों के बीच होने वाले वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। खुलासा हुआ कि बारामती, पुणे, ठाणे और मुंबई के आईवीएफ क्लीनिक में एक ही महिला को कई बार अंडे दान करने पर मजबूर किया गया। नासिक में आईवीएफ सेंटर चलाने वाली डॉ. अमोल पाटिल के अलावा तीन महिला एजेंटों व सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। यह गिरोह गरीब महिलाओं को निशाना बनाया था। उन्हें अवैध तरीके से 25 से 30 हजार रुपये का लालच देकर अपने अंडे बेचने पर मजबूर किया जाता था।
बिना किसी चिकित्सा देखरेख के महिलाओं को हार्मोनल इंजेक्शन दिए गए। आईवीएफ सेंटर ले जाकर अंडे निकाले गए और बाद में लाखों रुपये में बेचे गए। पुलिस का मानना है कि डॉ. अमोल पाटिल ने पूरे मामले में समन्वय करने में अहम भूमिका निभाई। बता दें कि इसी साल मार्च महीने में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उल्हासनगर स्थित भगवान अस्पताल में दबिश दी थी। यहां आईवीएफ नेटवर्क से जुड़ी अवैध सोनोग्राफी होती थी।

