Yashpal Arya on Dhami उत्तराखंड में ‘झूठी’ और ‘जुमलेबाज’ सरकार – यशपाल आर्य

Yashpal Arya on Dhami  नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने युवाओं के रोजगार मुद्दे को लेकर धामी सरकार पर करारा हमला बोला है. उन्होंने कहा, सरकार बार-बार रोजगार देने के बड़े-बड़े दावे करती है. मंचों से यह कहा जाता है कि उत्तराखण्ड में रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा रहे हैं, युवाओं को सरकारी नौकरियां मिल रही हैं और प्रदेश का युवा आत्मनिर्भर बन रहा है. लेकिन यदि हम वास्तविक स्थिति को देखें तो सच्चाई इन दावों से बिल्कुल अलग दिखाई देती है.

 पदों की यह संख्या घटने के बजाय हर वर्ष बढ़ रही है. Yashpal Arya on Dhami

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आगे य़शपाल आर्य ने कहा, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार के अपने बजट दस्तावेज ही इन दावों की वास्तविकता को उजागर कर रहे हैं. बजट के आंकड़े बताते हैं कि 1 अप्रैल 2025 तक सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और राज्य सहायतित संस्थानों में कुल 83 हजार 6 सौ 37 पद रिक्त पड़े हुए हैं. यह आंकड़ा अपने आप में बहुत बड़ा है. यह केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह उन हजारों-लाखों युवाओं की उम्मीदों का प्रतीक है, जो वर्षों से रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं.


आगे उन्होंने ये भी कहा कि सबसे चिंता की बात यह है कि रिक्त पदों की यह संख्या घटने के बजाय हर वर्ष बढ़ती जा रही है. इसका सीधा अर्थ यह है कि सरकार नए पदों को भरने के प्रति गंभीर नहीं है. एक तरफ हजारों पद खाली पड़े हैं और दूसरी तरफ लाखों युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं. यह स्थिति केवल युवाओं के साथ अन्याय ही नहीं है, बल्कि इससे सरकारी व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है. जब सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली होते हैं तो उसका सीधा असर प्रशासनिक कामकाज पर पड़ता है. अस्पतालों में डॉक्टरों के पद खाली रहते हैं. स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी रहती है. पुलिस और अन्य विभागों में स्टाफ की कमी से कार्य प्रभावित होता है. इसका नुकसान अंततः प्रदेश की आम जनता को उठाना पड़ता है.


उन्होंने ये भी कहा कि उत्तराखण्ड का युवा आज शिक्षित है, प्रतिभाशाली है और मेहनती है, लेकिन रोजगार के अवसरों के अभाव में बड़ी संख्या में युवा प्रदेश से बाहर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं. यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है, क्योंकि जब राज्य का युवा ही बाहर चला जाएगा, तो राज्य के विकास की गति भी प्रभावित होगी. अगर सरकार वास्तव में युवाओं को रोजगार देने के प्रति गंभीर होती तो इस बजट में रिक्त पदों को शीघ्र भरने का स्पष्ट रोडमैप, नियमित और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, कौशल विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की ठोस योजनाएं और उद्योगों तथा स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रावधान दिखाई देते. लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि इस बजट में रोजगार सृजन को लेकर कोई व्यापक और स्पष्ट रणनीति नजर नहीं आती.