हिंदू धर्म में कालाष्टमी का दिन भगवान शिव के रौद्र स्वरूप काल भैरव जी को समर्पित है। हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। शास्त्र में काल भैरव को काशी का कोतवाल और संकटों को हरने वाला देवता माना गया है। कालाष्टमी विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी गई है, क्योंकि यह नकारात्मक ऊर्जा और नजर दोष से मुक्ति पाने के लिए बहुत अनुकूल है। अगर आपके बनते काम बिगड़ रहे हैं, घर में अक्सर क्लेश रहता है या सेहत अच्छी नहीं रहती, तो कालाष्टमी पर किए गए कुछ गुप्त उपाय आपको बड़ी राहत दे सकते हैं, तो आइए उन्हें जानते हैं।
नजर दोष से मुक्ति के गुप्त उपाय
काला धागा
कालाष्टमी के दिन काल भैरव के मंदिर जाकर उनके चरणों से थोड़ा सिंदूर लेकर एक काले धागे पर लगाएं। इस धागे को भैरव मंत्र “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं” का जाप करते हुए अपने दाएं हाथ की कलाई या गले में धारण करें। यह धागा एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है और बुरी नजर को आप तक पहुंचने नहीं देता।
सरसों के तेल का दीपक
शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर सरसों के तेल का एक चौमुखी दीपक जलाएं। इस दीपक की लौ से थोड़ा काजल बना लें। इस काजल का टीका घर के बच्चों और अन्य सदस्यों के कान के पीछे लगाएं। कालाष्टमी पर भैरव जी के सामने जलाए गए दीपक का काजल नजर दोष को तुरंत खत्म करने की शक्ति रखता है।
नींबू और मिर्च
एक बेदाग नींबू लें और उसे नजर लगे व्यक्ति के सिर से पैर तक 21 बार वार लें। इसके बाद इस नींबू के चार टुकड़े करें और कालाष्टमी की रात किसी सुनसान चौराहे पर चारों दिशाओं में फेंक दें। पीछे मुड़कर न देखें। यह उपाय नजर और तंत्र बाधा को दूर करने में मदद करता है।
करें ये काम
कालाष्टमी के दिन काले कुत्तों को मीठी रोटी या गुड़ खिलाएं।
इस दिन तामसिक भोजन से पूरी तरह दूर रहें।
इस दिन ज्यादा से ज्यादा दान-पुण्य करें।
इस दिन गरीबों की मदद करें।

