भारतीय ऑटो इंडस्ट्री तेजी से आगे बढ़ रही है. यहां हर साल लाखों कारें बिकती हैं. बाजार में एक से एक बेहतरीन और अलग-अलग रंगों की कारें उपलब्ध हैं. लोग अपनी पसंद के हिसाब से कार का रंग चुन सकते हैं. इतना ही नहीं, कुछ लोग कार खरीदकर अपना पसंदीदा कलर भी करा सकते हैं. लेकिन जानकर हैरानी होगी कि एक रंग ऐसा है, जिससे कार को नहीं रंगवाया जा सकता. वह रंग है जैतून हरा यानी ऑलिव ग्रीन है.

दरअसल, केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 121(1) के मुताबिक, किसी भी मोटर वाहन को जैतून हरे रंग में नहीं रंगा जा सकता, जब तक कि वह रक्षा विभाग के स्वामित्व में न हो. इसका मतलब है कि ऑलिव ग्रीन रंग भारत में केवल डिफेंस फोर्स के लिए आरक्षित है. ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि किसी भी स्थिति में सेना के वाहनों की पहचान आसानी से की जा सके. हालांकि, कुछ कंपनियां रंग में हल्का बदलाव और अलग नाम देकर मिलते-जुलते शेड का इस्तेमाल कर लेती हैं.

अगर किसी व्यक्ति की निजी कार ऑलिव ग्रीन रंग की पाई जाती है, तो पुलिस उस पर कार्रवाई कर सकती है. ऐसी स्थिति में वाहन को तुरंत जब्त भी किया जा सकता है. नियमों का उल्लंघन करने पर वाहन मालिक पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है. यदि गाड़ी का रंग बदला हुआ पाया जाता है और इसकी जानकारी RTO को नहीं दी गई है, तो आरटीओ (RTO) वाहन का पंजीकरण भी रद्द कर सकता है. साथ ही, मालिक को वाहन का रंग बदलवाने का आदेश दिया जा सकता है.

अगर आप अपनी कार या बाइक का रंग बदलने की सोच रहे हैं, तो यह केवल पेंट कराने का काम नहीं है, बल्कि इसके लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी जरूरी होती है. सबसे पहले आपको अपने क्षेत्र के RTO ऑफिस को इसकी जानकारी देनी होती है और अनुमति लेनी होती है. अनुमति मिलने के बाद ही आप वाहन का नया रंग करवा सकते हैं. इसके बाद RTO आपके वाहन के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) में नया रंग अपडेट करता है. बिना इस प्रक्रिया के रंग बदलना नियमों का उल्लंघन माना जाता है और इस पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

