Special Story By : Anita Tiwari , Dehradun

Vishva Bharti University उत्तराखंड सरकार के नाम एक और बड़ी उपलब्धि शामिल होने जा रही है। युवा सीएम धामी की नज़र जहाँ पर्यटन और आर्थिकी को आगे बढ़ाने की है। वहीँ अब बेहतरीन एजुकेशन के लिए मशहूर उत्तराखंड के नैनीताल को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में गीतांजलि का भी नाम शामिल हो जायेगा। जैसा कि आप जानते हैं कि रविन्द्र नाथ टैगोर की कर्मस्थली में अब विश्व भारती विश्वविद्यालय की स्थापना होने जा रही है और सीएम धामी ने इसका भूमिपूजन भी कर दिया है… लिहाज़ा अब देवभूमि के नाम एक और प्रतिष्ठान शामिल हो जायेगा नाम है “गीतांजलि”
Vishva Bharti University नाम रोशन करेगी मुख्यमंत्री धामी की “गीतांजलि”

Vishva Bharti University राष्ट्रगान के रचयिता गुरुदेव रविन्द्र नाथ टैगोर की 161वीं जयंती के मौके पर रामगढ़ में रविन्द्र नाथ टैगोर की कर्मस्थली में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान सीएम ने कहा कि यहां बनने वाला परिसर गीतांजलि के नाम से जाना जाएगा और ये क्षेत्र शिक्षा के लिए अग्रणी काम करेगा… इस दौरान सीएम धामी ने कहा कि आने वाला दशक उत्तराखंंड का है… यहां पर्यटन से लेकर शिक्षा स्वास्थ्य पर बेहतर काम होगा और लोग पहाड़ आयेंगे…

Vishva Bharti University मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामगढ़ में रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के परिसर की स्थापना में अपनी रुचि व्यक्त की है…. इस योजना को मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड के लिए गर्व की बात बताई है और कहा है कि इस सौगात से जहां विश्व भारती केंद्रीय विश्वविद्यालय उत्तराखंड को भारत के प्रमुख शिक्षा केन्द्र के रूप में स्थापित होने का अवसर प्राप्त होगा, वहीं स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के नये अवसर उपलब्ध होंगे… यह राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटकों एवं शोधार्थियों के लिए भी नया गंतव्य बनेगा… ऐसे में इस स्थान को दुनिया गीतांजलि कैंपस के नाम से जाने तो इससे बेहतर और क्या बात होगी।

Vishva Bharti University गुरुदेव रविन्द्र नाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को जोड़ासांकू ठाकुरबाड़ी कोलकता में हुआ था और साहित्य के लिये नोबल पुरस्कार पाने वाले टैगौर 1903 से 1913 तक तीन बार रामगढ आए थे। यहीं उन्होंने अपना आशियाना भी बनाया… और इसी धरती पर उन्होंने गीतांजलि के कुछ अंश की रचना की थी। इतना ही नहीं गुरुदेव ने इसी देवभूमि के हिस्से में रहते हुए तीन देश भारत , श्रीलंका और बंगलादेश का राष्टगान भी लिखा… ऐसे यादगार धरती को पहचान दिलाने के लिए केन्द्र सरकार ने रामगढ़ में विश्वभारती विश्वविघायल की घोषणा की थी, जिसके बाद 45 एकड़ भूमि भी इसके लिये उपलब्ध करा दी गई है…

Vishva Bharti University सीएम पुष्कर धामी ने कहा कि विश्व भारती की स्थापना के लिए प्रथम चरण में 150 करोड़ रुपये की डीपीआर केन्द्र सरकार में स्वीकृति की प्रक्रिया में है… उत्तराखंड सरकार द्वारा 45 एकड़ भूमि में विश्व भारती केंद्रीय विश्वविद्यालय के परिसर की स्थापना की औपचारिकता पूर्ण कर ली गई… ऐसे में जब ये संस्थान बनकर तैयार होगा तो न सिर्फ ज्ञान की गंगा बहेगी बल्कि देवभूमि के नाम एक और धरोहर जुड़ जाएगी जिसका नाम होगा “गीतांजलि”
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