Special Report By – Anita Tiwari , Dehradun

Vegetarianism कोरोना के चलते पिछले दो साल में भारत ही नहीं दुनियाभर के देशों में खान-पान को लेकर ट्रेंड बदला है। लोगों को यह बात समझ में आ गई कि स्वस्थ और ज्यादा दिन तक जीवित रहने के लिए शाकाहार से बेहतर विकल्प है।

Vegetarianism: कोरोना से 65% लोगों ने चुना शाकाहार
- ब्रिटेन की मार्केटिंग रिसर्च और डेटा एनालिसिस फर्म यूगोव (Yougov) के हालिया अध्ययन में साफ हुआ है कि 65 फीसदी भारतीयों ने 2022 में शाकाहारी भोजन का विकल्प चुना है। इस अध्ययन सूची में अमरीका और ब्रिटेन के बाद भारत तीसरे स्थान पर है। वजह साफ है कि शाकाहारी भोजन में अधिक फाइबर, एंटीऑक्सिडेंट, पोटेशियम, मैग्नीशियम, फोलेट, विटामिन ए, सी, और ई अच्छी मात्रा में होता है, जिससे करीब 120 बीमारियां दूर रहती हैं।

- यही नहीं, 81 फीसदी भारतीय दिन के कम से कम एक भोजन को नाश्ते या फ्रूट स्नैक्स में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। राजस्थान देश का प्रमुख शाकाहारी राज्य है, जहां पहले से ही करीब 74.9 फीसदी लोग शाकाहारी हैं। इसके बाद हरियाणा, पंजाब, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश है। दुनिया के देशों की बात करें तो बीते दो साल में अमरीका, ब्रिटेन, कनाडा, आस्टेलिया, जर्मनी, सिंगापुर, पोलैंड, इटली और इजराइल जैसे देशों में मांसाहारी लोग औसतन 500 से 1000 फीसदी शाकाहारी भोजन की तरफ शिफ्ट हुए हैं, जो अब कभी कभार ही नॉनवेज खाते हैं।

Vegetarianism दुनिया के देश हो रहे शाकाहारी
- फोब्र्स के हालिया अध्ययन के अनुसार दुनिया के 10 देश मांसाहार छोड़कर शाकाहार की तरफ बढ़ रहे हैं। अमरीका में बीते 2 साल में 600 फीसदी शाकाहारी बढ़े हैं। ब्रिटेन में शाकाहारी खाद्य पदार्थों की मांग 1000 फीसदी बढ़ी है। पोलैंड में दो साल में शाकाहारी रेस्तरां 700 से बढ़कर 950 हो गए हैं। कनाडा में 4000, थाईलैंड में 1500, इजऱाइल में 700 तो ऑस्ट्रेलिया में इस समय 5000 से अधिक शाकाहारी रेस्तरां हैं। जर्मनी, सिंगापुर, ताइवान व अन्य देशों में भी शाकाहारी लोग तेजी से बढ़ रहे हैं।

Vegetarianism से क्या हैं फायदे ?
- – बच्चों का 18 फीसदी तक तेज दिमाग
- – महिलाओं में ८ फीसदी कम गर्भपात
- – कैंसर का खतरा 12 फीसदी कम
- – हृदय रोग का खतरा 40 फीसदी कम
- – टाइप 2 मधुमेह 50 फीसदी तक कम
- – शाकाहार वजन घटाने में दोगुना प्रभावी
- – पुरुष 10 तो महिलाएं 6 साल ज्यादा जिएंगी
- – शाकाहार से 73 लाख की जिंदगियां बचेंगी
- – ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन में 63 फीसदी कम
- – सालाना 1 अरब डॉलर की वैश्विक बचत
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