Uttarakhand Kauthig सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा परेड ग्राउंड, देहरादून में चल रहे 4 दिवसीय उत्तरायणी कौथिक महोत्सव 2026 में पूरा उत्तराखंड समाया नजर आ रहा है। देवभूमि की खुशबु , संस्कृति , संगीत और सांस्कृतिक विरासत की झलक यहाँ मन मोह रही है। जिसको देखने पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा समाजहित में किए जा रहे सराहनीय प्रयासों की प्रशंसा की। वहीँ शाम को आयोजित स्टार नाइट में प्रसिद्ध लोकगायक, गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी लोकगायन की स्वर-साधिका पद्मश्री श्रीमती बसंती बिष्ट , गोविंद दिगारी , श्रीमती खुशी जोशी एवं ललित गित्यार की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उत्तरायणी कौथिक महोत्सव के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ नशा मुक्ति का संदेश भी दिया गया।

हस्तशिल्पकारों, स्थानीय उत्पादों से जुड़े काश्तकारों, एवं स्वरोजगार से जुड़े प्रतिभागियों से संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया।राज्यपाल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों के काश्तकारों, शिल्पकारों और पारंपरिक शिल्पियों को एक सशक्त एवं व्यापक मंच प्राप्त हो रहा है, जिससे न केवल उनकी कला और उत्पादों को पहचान मिलती है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलती है।

राज्यपाल द्वारा नैनीताल जनपद के श्री प्रेम प्रकाश बेलवाल को सामाजिक सेवा एवं जन-स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में, अल्मोड़ा जनपद की सुश्री कामिनी कश्यप को दिव्यांग शिक्षा एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में, अल्मोड़ा जनपद की सुश्री मनोरमा जोशी को कृषि नवाचार एवं कीवी उत्पादन के क्षेत्र में, बागेश्वर जनपद के भवान सिंह कोरंगा को पारम्परिक ताम्र शिल्पकला संरक्षण के क्षेत्र में, देहरादून जनपद के कल सिंह राणा को सेब उत्पादन एवं कृषि नवाचार के क्षेत्र में, टिहरी जनपद के कुन्दन सिंह पंवार को कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में तथा देहरादून जनपद के ब्रिगेडियर दिनेश कुमार बड़ोला को रक्षा एवं सैन्य सेवा के क्षेत्र में सम्मानित किया गया।

उन्होंने आयोजन की भव्यता, अनुशासन और उद्देश्यपूर्ण स्वरूप की सराहना करते हुए सेवा संकल्प फाउंडेशन से जुड़े सभी सदस्यों को इस सफल आयोजन हेतु शुभकामनाएं दी। उनके प्रेरक उद्बोधन से महोत्सव को नई ऊर्जा, मार्गदर्शन और गरिमा प्राप्त हुई, जिससे आयोजन का यह चरण भी अत्यंत प्रभावशाली एवं स्मरणीय बन गया।



