Sex Workers SC सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि अपनी मर्जी से सेक्स वर्कर बनी महिलाओं को प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए और सेक्स वर्कर्स के रेस्क्यू के दौरान ऐसी महिलाओं की मर्जी जानना जरूरी है कि वो इसके लिए तैयार हैं या नहीं. शीर्ष अदालत ने कहा है कि अगर कमर्शियल सेक्स के लिए मानव तस्करी की जाती है या फिर किसी को धोखे या जबरदस्ती से देह व्यापार के लिए मजबूर किया जाता है तब ‘अनैतिक व्यापार रोकथाम एक्ट’ (ITPA) के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए.
देश में देहव्यापार (सेक्स वर्क) को लेकर शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि यदि कोई बालिग महिला अपनी मर्जी से और अकेले आजीविका चलाने के लिए यह कार्य करती है, तो उसे अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट (ITPA) का असली मकसद सेक्स वर्क को पूरी तरह प्रतिबंधित करना नहीं, बल्कि इसके व्यावसायिक दोहन और संगठित सिंडिकेट को रोकना है।

निजी आवास ‘कोठा’ नहीं
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने लगभग 298 पन्नों के इस ऐतिहासिक फैसले में कानून की एक नई लकीर खींची है। अदालत ने कहा कि यदि कोई महिला अपने जीवनयापन के लिए अकेले यह कार्य कर रही है, तो उसके घर को कानूनन ‘ब्रोथल’ (कोठा) नहीं माना जा सकता। अगर उस परिसर में कोई दूसरी सेक्स वर्कर या कोई बिचौलिया (दलाल) शामिल नहीं है, तो पुलिस केवल इस आधार पर वहां छापेमारी या कार्रवाई नहीं कर सकती।
व्यावसायीकरण पर रोक उद्देश्य
कोर्ट ने समझाया कि 1956 का यह कानून संगठित रूप से चलाए जा रहे अवैध धंधों और मानव तस्करी को रोकने के लिए है, न कि किसी के निजी जीवन को नियंत्रित करने के लिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कानून की धारा 7 और 8 की व्याख्या करते हुए यह भी साफ किया कि इस राहत का दायरा कहां सीमित हो जाता है।अदालत ने कहा कि खुलेआम सार्वजनिक स्थलों, सड़कों या धार्मिक स्थलों के पास ग्राहकों को आकर्षित करना या देहव्यापार को प्रदर्शित करना इस कानून के तहत अब भी दंडनीय अपराध है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह कृत्य सार्वजनिक शालीनता और सामाजिक नैतिकता के दायरे का उल्लंघन करता है। लेकिन निजी दायरे में अपनी मर्जी से आजीविका चलाने वाली महिला पर यह कड़ाई लागू नहीं होती।

अदालत ने सेक्स वर्कर्स के तीन अलग-अलग ग्रुपों की पहचान की है. उनके मुताबिक,
– एक वह ग्रुप है, जिसमें लड़कियों या महिलाओं को तस्करी करके लाया जाता है. उनकी मर्जी के खिलाफ उन्हें सेक्स व्यापार में धकेला जाता है.
– वहीं कुछ ऐसी महिलाएं भी हैं जो तस्करी करके लाई गईं, लेकिन अपनी मर्जी से देह व्यापार में बनी रहीं.
– कोर्ट ने एक तीसरी कैटेगरी की भी पहचान की जिसमें वो महिलाएं शामिल थीं जिन्होंने अपनी मर्जी से सेक्स वर्क को चुना और वो इसमें बने रहना चाहती हैं.
भारत के कानून के तहत यदि कोई बालिग व्यक्ति (18 वर्ष से ऊपर) पूरी तरह से अपनी मर्जी (स्वेच्छा) से और अकेले अपने निजी दायरे में देहव्यापार करता है, तो वह सीधे तौर पर अपराध नहीं है। हालांकि एक्ट की धारा 7 और 8 के तहत किसी भी धार्मिक स्थल, स्कूल, अस्पताल या सार्वजनिक स्थान के 200 मीटर के दायरे में देहव्यापार का संचालन करना प्रतिबंधित है। सार्वजनिक स्थानों, सड़कों या गलियों में इशारे करके या खुलेआम ग्राहकों को आकर्षित करना या देहव्यापार का प्रदर्शन करना दंडनीय अपराध है। खबर मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है।

