देश कोई भी हो , धर्म और मान्यताये कहीं की भी हों लेकिन इंसान की जिंदगी को एक अनुभव ऐसा होता है जो उसको सबके साथ बराबरी पर खड़ा करता है और वो है परवरिश , जी हाँ माता पिता का ये वो कर्तव्य है जिसमें जब बच्चा रोता है तो कभी समझ नहीं आता कि उसे गोद चाहिए या अपनी बात मनवानी है। खाना नहीं खाता, मोबाइल छोड़ना नहीं चाहता, सोने से मना करता है.. और सामने खड़े माता-पिता सोचते रह जाते हैं कि प्यार से समझाएं या सख्ती करें। इसी लिए मार्केट में पहले जेंटल पेरेंटिंग का ट्रेंड आया था। हालांकि अब Authoritative Parenting यानी अधिकारपूर्ण परवरिश की चर्चा हो रही है। इसे सुनकर पहली नजर में लग सकता है कि इसमें माता-पिता का अधिकार ज्यादा होगा, लेकिन इसका मतलब डर या कठोरता नहीं है। इसमें बच्चे के साथ अपनापन रखते हुए कुछ साफ नियम और सीमाएं तय की जाती हैं।
आखिर Authoritative Parenting है क्या ?

इस तरीके में माता-पिता बच्चे की भावनाओं को महत्व देते हैं, उसकी बात सुनते हैं और उसे अपनी राय रखने का मौका देते हैं। साथ ही घर के कुछ नियम भी स्पष्ट रखते हैं।यानि की बच्चा रात में देर तक कार्टून देखना चाहता है। केवल उसे मना करने के बजाय माता-पिता बता सकते हैं कि सोने का समय क्यों जरूरी है। फिर तय समय के बाद स्क्रीन बंद करने का नियम सेट करें। जिसे बच्चे और पेरेंट्स दोनों ही फॉलों करें।
जेंटल पेरेंटिंग से कितना अलग
जेंटल पेरेंटिंग में बच्चे की भावनाओं, जरूरतों और सम्मान पर काफी जोर दिया जाता है। Authoritative Parenting भी बच्चे की भावनाओं को महत्व देता है, लेकिन साथ में सीमाएं तय करने और उन्हें लगातार बनाए रखने पर जोर देता है।

बच्चों की हर बात मानना जरूरी नहीं
आज के माता-पिता बच्चों की भावनाओं को लेकर पहले से ज्यादा सजग हैं। यह अच्छी बात है, लेकिन भावनाओं को समझना और हर मांग पूरी करना दो अलग चीजें हैं।बच्चा बाजार में खिलौना देखकर रोने लगे तो हर बार उसकी बात मानना जरूरी नहीं है। पेरेंट्स आराम से बच्चे को मना कर सकते हैं, वो भी सही वजह समझाते हुए। इस तरह बच्चा धीरे-धीरे निराशा से निपटना और सीमाओं को स्वीकार करना सीखता है।
गलती पर क्या करें
गलती होने पर बच्चे को डराने या डांटने, मारने के बजाय उसके व्यवहार का परिणाम समझाना असरदार माना जाता है।अगर बच्चा जानबूझकर अपना सामान फैलाता है, तो माता-पिता उसके लिए सामान समेटने की जिम्मेदारी तय कर सकते हैं। इससे बच्चा सीखता है कि उसके काम का असर भी होता है। Authoritative Parenting को किसी जादुई फार्मूले की तरह देखने की जरूरत नहीं है। हर बच्चा अलग होता है और परिवार की परिस्थितियां भी अलग होती हैं। लेकिन आप अपने पेरेंटिंग स्टाइल में इस तरीके को मॉडिफाई करके अपना सकते हैं।

