Alcohol Dehydrogenase महिलाओं के शरीर में पुरुषों की तुलना में प्राकृतिक रूप से बॉडी फैट अधिक और पानी की मात्रा कम होती है। शराब पानी में घुलनशील होती है, यानी उसका असर पानी के जरिए ही शरीर में फैलता है। चूंकि महिलाओं के शरीर में पानी कम होता है, इसलिए शराब का घनत्व सीधे खून में अधिक बढ़ जाता है। यही कारण है कि समान मात्रा में शराब पीने पर महिलाओं को चक्कर, यूफोरिया या नशे के शुरुआती संकेत जल्दी महसूस होते हैं। यह प्रभाव वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है और इसे केवल “कमज़ोरी” का परिणाम मानना गलत है।
ADH एंजाइम की कमी — शराब टूटती है धीरे Alcohol Dehydrogenase

हमारे शरीर में Alcohol Dehydrogenase (ADH) नाम का एंजाइम शराब को तोड़ने का काम करता है। पुरुषों के शरीर में इसकी मात्रा अधिक होती है, जबकि महिलाओं में यह अपेक्षाकृत कम पाया जाता है। परिणामस्वरूप शराब लंबे समय तक खून में मौजूद रहती है और दिमाग पर उसका असर ज्यादा दिखाई देता है। यही कारण है कि कम मात्रा में भी महिलाएं तेज नशे का अनुभव कर सकती हैं।
हार्मोनल उतार–चढ़ाव — माहवारी के दौरान असर होता है दोगुना

लिवर प्रोसेसिंग धीमी — असर रहता है ज्यादा समय तक

भारत में कितनी महिलाएं पीती हैं शराब?
भारत में कुछ दशक पहले तक शराब पीने में पुरुष महिलाओं से काफी ज्यादा आगे थे, लेकिन पिछले कुछ सालों में ये ट्रेंड लगातार बदल रहा है. अब महिलाएं भी शराब को उतना ही पसंद कर रही हैं, जितना पुरुष करते हैं. इसके पीछे शहरीकरण, आर्थिक तौर पर सक्षम होना और लिंग भेद कम होना भी एक कारण है. शराब हर इवेंट या पार्टी का हिस्सा बन चुकी है, ऐसे में महिलाओं के बीच शराब का इस्तेमाल आम बात हो चुकी है. देशभर में 2021 तक ये आंकड़ा 0.7% है.पुरुषों के मुकाबले महिलाएं कम शराब पीती हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में ये आंकड़ा लगातार बढ़ा है. हालांकि एल्कोहल महिलाओं के लिए पुरुषों से ज्यादा खतरनाक होता है

