Alpines In Uttarakhand बुग्यालों में गुजारिये रातें – कुदरत से कीजिये बातें

Alpines In Uttarakhand उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बुग्याल (ऊंचाई वाले हरे-भरे घास के मैदान) मुख्य रूप से बेदनी बुग्याल, दयारा बुग्याल और औली-गोरसों बुग्याल हैं। ये अल्पाइन क्षेत्र 9,000 से 13,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित हैं, जो गर्मियों में मखमली हरी घास और सर्दियों में बर्फ की सफेद चादर से ढके रहते हैं। उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बुग्यालों में ट्रैकिंग और कैंपिंग के शौकीनों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। करीब आठ वर्षों से लागू नाइट स्टे पर प्रतिबंध अब समाप्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्देशों के बाद वन विभाग ने बुग्यालों में रात बिताने की अनुमति से जुड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है, जिससे रूपकुंड, वेदनी बुग्याल और आसपास के ट्रैकिंग रूटों पर पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

दरअसल, वर्ष 2018 में पर्यावरण संरक्षण और बुग्यालों में लगातार घटती हरियाली को देखते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पर्यटकों के बुग्यालों में रात्रि विश्राम पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। इस फैसले के बाद टेंट लगाने और रात बिताने पर रोक लग गई, जिसका सीधा असर रूपकुंड ट्रेक और उससे जुड़े पर्यटन व्यवसाय पर पड़ा।प्रतिबंध के चलते लोहाजंग, वाण, दीदना, कुलिंग, मुंदोली और आसपास के गांवों में बने होमस्टे, होटल, लॉज और स्थानीय पर्यटन कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुए। कई युवाओं का रोजगार छिन गया और ट्रैकिंग गतिविधियां लगभग ठप हो गईं।अब सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई 2026 को जारी अपने आदेश में हाईकोर्ट के 2018 के फैसले को निरस्त करते हुए नाइट स्टे पर लगी रोक हटाने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद बद्रीनाथ वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी सर्वेश कुमार दुबे ने 27 जुलाई को संबंधित वन क्षेत्राधिकारियों को न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि नाइट स्टे की अनुमति मिलने से ट्रैकिंग सीजन फिर से रफ्तार पकड़ेगा और गाइड, पोर्टर, होमस्टे संचालक, होटल व्यवसायी, टैक्सी ऑपरेटर तथा स्थानीय दुकानदारों सहित सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा।पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि रूपकुंड और वेदनी बुग्याल जैसे विश्व प्रसिद्ध ट्रैकिंग स्थलों पर नाइट स्टे बहाल होने से उत्तराखंड के एडवेंचर टूरिज्म को भी बड़ा लाभ मिलेगा। हालांकि, वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी गतिविधियां न्यायालय के पर्यावरण संरक्षण संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए ही संचालित की जाएंगी।


उत्तराखंड के खूबसूरत और अनूठे भूदृश्य में आश्चर्यजनक बुग्याल या घास के मैदान शामिल हैं, जो इस अलौकिक राज्य के आकर्षण को और भी बढ़ाते हैं। ज्यादातर ऊँचाई वाले इलाकों में स्थित, उत्तराखंड के बुग्याल कैंपिंग के लिए पसंदीदा स्थान हैं। आकाश को छूते हिमालय पर्वत से घिरे ये हरे-भरे मैदान किसी दिव्य रचना से कम नहीं लगते। उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में कई बुग्याल हैं और अभी भी कुछ कम खोजे गए या अज्ञात हैं। उत्तराखंड के सबसे लोकप्रिय बुग्यालों में से एक है बेदनी बुग्याल, जो चमोली जिले में समुद्र तल से 3354 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। प्रसिद्ध रूपकुंड ट्रेक के रास्ते में पड़ने वाले इस घास के मैदान की सुंदरता का वर्णन शब्दों में बयां करना मुश्किल है। यह ट्रेकर्स के लिए विश्राम स्थल बन जाता है, जहां मखमली घास पर कैंप लगाना उन्हें सुकून देता है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता के अलावा, बेदनी बुग्याल का धार्मिक महत्व भी है, क्योंकि यह उन स्थानों में से एक है जहां हर 12 साल में एक बार होने वाली नंदा देवी राज जात यात्रा के तीर्थयात्री ठहरते हैं।

अपनी बेमिसाल खूबसूरती के मामले में अगला स्थान दयारा बुग्याल का है, जो उत्तरकाशी जिले के बारसू गांव के पास स्थित है। यह हरा-भरा बुग्याल अपने आस-पास के मनमोहक दृश्यों, शांति और आकर्षक सुंदरता से लाखों लोगों का दिल जीत लेता है। इस अल्पाइन घास के मैदान से बंदरपूंछ, ब्लैक पीक और भागीरथी चोटियों के शानदार नज़ारे भी देखे जा सकते हैं। इन दो ऊंचे घास के मैदानों के अलावा, एक और बुग्याल है जो पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है, औली बुग्याल। गर्मियों में चमोली जिले का यह घास का मैदान इस पर्यटन स्थल की सुंदरता को और भी बढ़ा देता है, वहीं सर्दियों में यह बेहद लोकप्रिय स्कीइंग का केंद्र बन जाता है। उत्तराखंड का एक और प्रसिद्ध और लोकप्रिय घास का मैदान गोरसन है, जो औली से थोड़ी दूरी पर स्थित है और ओक के जंगलों और ऊंचे पहाड़ों से घिरा हुआ है, जो यहां ट्रेकिंग के अनुभव को और भी आकर्षक बना देते हैं।