Amazing Facts दुल्हनें शादी के दिन सिर क्यों मुंडवाती हैं ?

Amazing Facts क्या आपने कभी सुना है कि किसी समाज में शादी के दिन दुल्हन अपने सिर के सारे बाल मुंडवा देती है ? चीन की Lahu community लाहू जनजाति में यह परंपरा आज भी निभाई जाती है। यह अनोखी रस्म सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि समर्पण, पहचान और जीवन-मृत्यु के गहरे दर्शन से जुड़ी मानी जाती है।चीन में 56 मान्यता प्राप्त जातीय समूह हैं, लेकिन उनमें से लाहू जनजाति (Lahu Tribe) अपनी अनोखी परंपराओं के कारण सबसे अलग मानी जाती है। चीन के दक्षिण-पश्चिमी प्रांतों में बसे इस समुदाय की आबादी करीब 5 लाख है। “लाहू” शब्द का अर्थ है बाघ, और इस जनजाति को साहस, समर्पण और पारंपरिक रीति-रिवाजों के पालन के लिए जाना जाता है।

 लाहू जनजाति की अनोखी परंपरा Amazing Facts

लाहू समुदाय में शादी के दिन दुल्हन अपना सिर पूरी तरह मुंडवाना आम बात है। शादी के दिन दुल्हन अपने सभी बाल कटवाकर गंजा सिर रखती है। इसका मतलब होता है-पुराने जीवन से विदाई और नए जीवन की शुरुआत। इस रस्म को दुल्हन का अपने जीवनसाथी के प्रति पूर्ण समर्पण और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। पहले के समय में लाहू समुदाय के पुरुष और महिलाएं दोनों सिर मुंडवाते थे। यह उनकी पहचान का प्रतीक था- एक ऐसा संकेत जो दर्शाता था कि वे बाहरी दुनिया से अलग अपनी संस्कृति में गर्व महसूस करते हैं।

अंतिम संस्कार में जोड़े में क्यों जाते हैं ?

लाहू समुदाय का मानना है कि जन्म और मृत्यु एक-दूसरे के पूरक हैं। उनके अनुसार, जीवन का अंत भी उतना ही पवित्र है जितनी उसकी शुरुआत। इसी वजह से, जब किसी की मृत्यु होती है तो अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों को जोड़े में आना अनिवार्य होता है। इस परंपरा के पीछे यह विश्वास है कि अकेले जाने वाला व्यक्ति मृत्यु की नकारात्मक ऊर्जा से प्रभावित हो सकता है, जबकि जोड़ा साथ में संतुलन और सुरक्षा का प्रतीक होता है।

समय के साथ परंपरा में बदलाव

1950 के दशक के बाद लाहू समुदाय ने अपने कुछ नियमों में बदलाव किए। अब अविवाहित महिलाओं को बाल बढ़ाने की अनुमति है, लेकिन शादी के दिन सिर मुंडवाने की परंपरा आज भी कायम है। यह रिवाज सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक सम्मान और पहचान का प्रतीक भी है।“लाहू” नाम का संबंध ‘लाओ हू’ शब्द से है, जिसका मतलब है बाघ। यह उनके साहस और स्वतंत्र जीवनशैली का प्रतीक है। आज के आधुनिक चीन में भी यह जनजाति अपनी पुरानी परंपराओं और रीति-रिवाजों को जीवित रखे हुए है।