Anupama Gulati Murder पत्नी के 72 टुकड़े करने वाले को झटका !

Anupma Gulati Murder देहरादून में पत्नी अनुपमा गुलाटी की निर्ममतापूर्वक हत्या कर 72 टुकड़े करने वाले राजेश गुलाटी की आजीवन कारावास की सजा को उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बुधवार को बरकरार रखा। निचली अदालत ने राजेश गुलाटी को वर्ष 2017 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जेल में बंद अभियुक्त ने निचली अदालत के आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। वरिष्ठ न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति आलोक महरा की खण्डपीठ में इस मामले में सुनवाई हुई।

 

जानिए क्या था दिल दहला देने वाला मामला Anupama Gulati Murder

Anupma Gulati Murder
राजेश गुलाटी पेशे से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और 1999 में अनुपमा के साथ लव मैरिज की थी. शादी के बाद दोनों अमेरिका चले गए थे. अनुपमा हाउस वाइफ थी. 6 साल बाद पति पत्नी अमेरिका से लौटे और देहरादून के प्रकाश नगर इलाके में किराए के मकान में रहने लगे थे. दोनों के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर अक्सर झगड़ा होता रहता था.पुलिस जांच में सामने आया था कि 17 अक्टूबर 2010 की रात भी दोनों के बीच झगड़ा हुआ था. झगड़े में राजेश ने गुस्से में अनुपमा को थप्पड़ मारा जिसके बाद अनुपमा का सिर दीवार से टकराया और वो बेहोश होकर गिर पड़ी थी. इससे राजेश घबरा गया था. उसे डर था कि होश में आने के बाद अनुपमा पुलिस को शिकायत करेगी. इससे बचने के लिए राजेश ने अनुपमा की हत्या कर दी थी.

लाश को ठिकाने लगाने के लिए राजेश ने हत्या के अगले दिन बाजार से इलेक्ट्रिक आरी और डी फ्रीजर खरीदा और अनुपमा के शव के 72 टुकड़े कर पॉलीथिन में भरकर डी फ्रीजर में रख दिया था. सबूत मिठाने के लिए राजेश रोज देहरादून के बाहरी इलाकों में शव के टुकड़ों से भरे पॉलीथिन को फेंकता रहता था.

अनुपमा हत्याकांड का खुलासा तब हुआ था जब 12 दिसंबर 2010 को अनुपमा का भाई सुजान कुमार देहरादून आया. सुजान ने जब बहन अनुपमा के बारे में राजेश से पूछा तो राजेश ने गोलमोल जवाब दिया. इसके बाद सुजान कुमार ने देहरादून के कैंटोनमेंट पुलिस थाने में बहन अनुपमा की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई. शिकायत के आधार पर पुलिस राजेश गुलाटी के घर पहुंची और छानबीन की तो डी फ्रीजर में अनुपमा गुलाटी के शरीर के टुकड़े मिले. पुलिस ने तुरंत राजेश गुलाटी को गिरफ्तार किया.

अभियुक्त की ओर से कहा गया कि वह निर्दोष है और उस पर लगाए गए आरोप गलत हैं। निचली अदालत ने कई तथ्यों को नजर अंदाज किया है। युगलपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने और सभी तथ्यों को परखने के बाद निचली अदालत के आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। देहरादून अदालत ने राजेश गुलाटी को एक सितम्बर, 2017 को आजीवन कारावास की सजा के साथ ही 15 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था। अदालत ने इसे जघन्य अपराध माना था। राजेश गुलाटी पेशे से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर रहा है और 1999 में दोनों ने प्रेम विवाह किया था।