Uttarakhand BJP उत्तराखंड भाजपा में कितने मुंगेरीलाल !

Uttarakhand BJP  देशभर में एक बात सियासी गलियारे में हमेशा मशहूर रही है कि भारतीय जनता पार्टी अनुशासित और केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर चलने वाली कार्यकर्ताओं की पार्टी है.. चुनाव कोई भी हो लोकसभा से लेकर ग्राम पंचायत तक के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के किसी भी प्रत्याशी और संभावित उम्मीदवार की दावेदारी पहले नजर नहीं आती थी पार्टी जिसको सिंबल देती वह चुनाव मैदान में उतरता और सारे पार्टी कार्यकर्ता उसे मिलकर जिताने में जुट जाते थे… लेकिन लगता है कि अब समय के साथ भारतीय जनता पार्टी की कार्यशैली और नेताओं के चरित्र में भी बदलाव हो चुका है… वह भी अब कुर्सी के सपने देखने लगे हैं और सपने भी छोटे-मोटे नहीं सीधे मुंगेरीलाल के….

स्थानीय नेताओं और विधायकों के कामकाज की समीक्षा Uttarakhand BJP

 जी हां 2027 चुनाव से पहले उत्तराखंड में कम से कम यही रंग नजर आ रहा है क्योंकि यहां की लगभग हर विधानसभा सीट पर भाजपा के कई मुंगेरीलाल विधायक बनने के हसीन सपने संजोए सोशल मीडिया में अपनी दावेदारी और जीत के दावे अभी से करने लगे हैं… यह अपने आप में गजब सच्चाई है कि जिस भाजपा के संभावित उम्मीदवार और टिकट के दावेदार अपनी दावेदारी के कभी खुलकर दावे नहीं करते थे वहीं अब हालात यह है कि पार्टी के मौजूदा मंत्री और विधायक के सामने ही भाजपा के कार्यकर्ता अपनी दावेदारी के ताल ठोकने लगे हैं… यही नहीं सड़कों पर होर्डिग बैनर पोस्टर से लेकर सोशल मीडिया में रंग-बिरंगे पोस्टर भी उनके समर्थकों के जरिए तैरने लगे हैं… यह नजारा पहाड़ से मैदान तक लगभग सभी विधानसभा में दिखने लगा है जहां मौजूदा भाजपा के मंत्रियों और सीनियर विधायकों के सामने सामान्य कार्यकर्ता भी खुद को संभावित टिकट का प्रबल और जिताऊ दावेदार बताते हुए पार्टी पदाधिकारियों के सामने अपनी दावेदारी ठोकने में लग गए हैं
मसूरी में कितने मुंगेरीलाल ,  कौन पड़ेगा भारी ? 
सिटिंग विधायकों की सीट पर नेताओं की नजर
बात करें दावेदारी की तो सबसे पहले मुंगेरीलाल नजर आए मसूरी विधानसभा सीट पर.. जहां अंगद का पैर जमाए बैठे चर्चित विधायक और मौजूदा कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी अपना किला किसी के हाथों सौंपने को तैयार नहीं है … लेकिन उनके किले में सेंधमारी करने के लिए त्रिवेंद्र गुट के सिपाही माने जाने वाले और देहरादून के पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा ने सोच विचार और राय मशविरा करने के बाद हिम्मत दिखाते हुए बयान दे डाला की मसूरी किसी की निजी संपत्ति नहीं है पार्टी जिसे सिंबल देगी वह चुनाव लड़ेगा और खुद गामा इस सीट पर चुनाव लड़कर विधायक बनने के लिए तैयार हैं… हालांकि अंदर खाने खबर यह है कि मौजूदा विधायक जोशी को कमजोर करने के लिए ही गामा को आगे किया गया है लेकिन गामा की इस हिम्मत को देखते हुए एक और भाजपा के पुराने नेता और राज्य आंदोलनकारी रविंद्र जुगरान ने भी मौके पर चौका मारते हुए खुद को दावेदार बता दिया… इस तरह से जोशी के किले पर भाजपा के ही नेताओं ने सियासी बारूद बिछानी शुरू कर दी है…..
 कैंट विधानसभा में कितने मुंगेरीलाल
वही बात करें देहरादून की सबसे हॉट सीट की तो वह है कैंट विधानसभा , जहां बीते कई चुनाव से भाजपा का ही दबदबा और कब्जा रहा है… लेकिन भाजपा ने पिछले चुनाव में सहानुभूति पाने के लिए कद्दावर नेता रहे स्वर्गीय हरबंस कपूर की पत्नी सविता कपूर को टिकट देकर न सिर्फ परिवारवाद को आगे बढ़ाया बल्कि कई नेताओं के सपनों पर पानी फेरते हुए सविता कपूर को ही विधानसभा पहुंचा दिया… लेकिन सियासी माहौल को समझने वाले लोग कहते हैं कि एक लंबे दौर से कैंट विधानसभा में कई दिग्गज भाजपाई अपनी बारी आने का इंतजार करते-करते युवा से बूढ़े हो गए और कुछ बूढ़े तो टिकट की दावेदारी से ही बाहर हो गए….ऐसे में अब 2027 में कैंट विधानसभा से विधायक बनने के लिए दर्जनभर से ज्यादा भाजपा के नेता अपनी तैयारी कर रहे हैं और उन्होंने अंदर खाने बैठक और गुणा भाग लगाना शुरू कर दिया है… फिर बात चाहे मौजूद महानगर अध्यक्ष और गगनचुंबी आलीशान बिल्डिंगों के शिखर पर बैठे सिद्धार्थ अग्रवाल की हो.. जोगेंद्र पुंडीर या अमित कपूर और पुनीत मित्तल से लेकर कई बड़े नाम भी अब इस रेस में शामिल होने को तैयार बैठे हैं …गाहे बगाहे खबर तो यह भी सामने आ रही है कि खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी कैंट विधानसभा से चुनाव लड़ सकते हैं लेकिन यह सिर्फ अभी कयास मात्र है और अगर ऐसा होता है तो एक बार फिर बड़े बड़ों के सपने चूर हो जाएंगे और कई मुंगेरीलाल भी अपने सपने बिखरते देखेंगे….