Augustyamuni controversy देव यात्रा पर क्यों भड़का जनआक्रोश ?

Augustyamuni controversy उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि में गुरुवार को महर्षि अगस्त्य महाराज की ऐतिहासिक देवरा यात्रा के दौरान खेल मैदान स्थित गद्दीस्थल जाने को लेकर भारी हंगामा हो गया. करीब साढ़े तीन घंटे तक चले हंगामे के बाद गोल गेट तोड़ा गया इसके के बाद हजारों भक्तों की मौजूदगी में महर्षि अगस्त्य महाराज की पवित्र डोली ने अगस्त्यमुनि मैदान में प्रवेश किया.बता दें कि डोली के आगमन से पहले भक्तों और प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति बनी थी. इस दौरान आक्रोशित भीड़ की पुलिस के साथ लगातार कई बार नोकझोंक होती रही. हंगामें के दौरान केदारनाथ हाईवे भी कई घंटों तक जाम रहा. वहीं अब प्रशासन ने गेट तोड़ने और हंगामा करने के आरोप में एक्शन लिया है.

52 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया Augustyamuni controversy


दरअसल, केदारघाटी के अगस्त्यमुनि बाजार में भगवान अगस्त्य ऋषि का प्राचीन मंदिर स्थित है. यह मंदिर आसपास के करीब 380 गांवों के आराध्य देव का माना जाता है. मंदिर के पास ही एक विशाल मैदान है. इसे भगवान अगस्त्य का माना जाता है. मान्यता है कि इस मैदान में भगवान अगस्त्य की विशेष पूजा होती है और जब भी भगवान अगस्त्य यात्रा पर जाते हैं तो मैदान में भी जाते हैं. आपको बता दें कि मान्यता है कि पहाड़ों में कई देव डोलिया गेट और पुलों के नीचे से आवाजाही नहीं करती हैं.


भगवान अगस्त्य की पवित्र डोली मंदिर से उठी और मैदान की और जा रही थी. लेकिन मैदान में एंट्री के लिए गेट के नीचे से निकलना था. ऐसे में डोली ने यहां से निकलने से इनकार कर दिया. इसके बाद प्रशासन से गेट हटाने या तोड़ने को लेकर दिन से लेकर रात तक हंगाम चलता रहा. गुरुवार को भी जब गेट का ऊपरी हिस्सा नहीं हटाया गया तो स्थानीय श्रद्धालुओं ने खुद गेट का ऊपरी भाग तोड़ दिया. इसके बाद डोली ने मैदान में प्रवेश किया. इस दौरान भक्तों की पुलिस और प्रशासन की टीम के साथ जोरदार बहस हो गई.

घटनाक्रम गुरुवार सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ जब डोली दोबारा मैदान के लिए रवाना हुई. गेट न टूटा देख श्रद्धालु आक्रोशित हो गए और दोपहर करीब 12 बजे से गेट हटाने का प्रयास शुरू कर दिया. लगभग साढ़े तीन घंटे की मशक्कत के बाद शाम 4 बजे गेट का ऊपरी हिस्सा तोड़ा गया. इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और केदारनाथ हाईवे पर वाहनों की लंबी लाइन लग गई जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा.

जिलाधिकारी ने कहा किया कि मंदिर समिति के पदाधिकारियों से देवरा यात्रा के मार्ग को लेकर पूर्व में ही बात कर ली गई थी. उन्होंने कहा कि जिस पारंपरिक मार्ग से पूर्वकाल से देवरा यात्रा के दौरान डोली को प्रवेश कराया जाता था उसी मार्ग पर प्रशासन ने व्यवस्थाएं की हुई थी.इसके बावजूद कुछ तत्वों द्वारा जबरन डोली को खेल भवन अगस्त्यमुनि के मेन गेट से ले जाने का दबाव बनाया गया और इसी उद्देश्य से खेल भवन के मुख्य गेट को तोड़ा गया. डीएम ने कहा कि इस दौरान सरकारी कार्य में बाधा डालने, शासकीय सेवकों के साथ अभद्र व्यवहार करने तथा कानून व्यवस्था को चुनौती देने के मामले भी संज्ञान में आए हैं.