देहरादून से अनीता आशीष तिवारी की रिपोर्ट –
Bansi Narayan Temple लाखों प्राचीन मंदिर में से कई मंदिर उत्तराखंड के मशहूर है जिसके बारे में आप सब लोग जानते ही होंगे। लेकिन but आज हम आपको उत्तराखंड के एक ऐसे मंदिर की कहानी के बारे में बताने जा रहे है जो आजकल बहुत चर्चा में है। आपको बता दे मंदिर के बारे में मान्यता है कि मंदिर का द्वार साल में सिर्फ एक बार ही खुलता है और वो भी रक्षाबंधन के दिन लेकिन इसकी वजह क्या है हम आपको बताते हैं।
छठी सदी में बनाया गया Bansi Narayan Temple

जिस मंदिर के बारे में हम आपको बता रहे हैं उसका नाम है वंशी नारायण मंदिर। समुद्रतल से लगभग 12 हज़ार से भी अधिक फीट की ऊंचाई पर मौजूद यह मंदिर उत्तराखंड की चमोली जिले में है। जब भी राखी का दिन करीब होता है तो मंदिर के आसपास की जगहों की सफाई शुरू हो जाती है क्योंकि because भक्त पवित्र दर्शन कर सकें। इस मंदिर को लेकर कहा जाता है कि रक्षाबंधन के दिन सूर्योदय के साथ खुलता है और सूर्यास्त होते ही मंदिर के कपाट अगले 364 दिन के लिए बंद कर दिए जाते हैं। लेकिन but जैसे ही मंदिर का द्वार खुलता है वैसे ही महिलाएं भगवान को राखी बंधना शुरू कर देती हैं और बड़े धूम-धाम के साथ पूजा भी करती हैं।
ऐसी मान्यता है कि राजा बलि के अहंकार को नष्ट करने के लिए भगवान विष्णु ने वामन का रूप धारण किया था और बलि के अहंकार को नष्ट करके पाताल लोक भेज दिया। लेकिन but जब बलि का अहंकार नष्ट हुआ तब उन्होंने नारायण से प्रार्थना की कि आप मेरे सामने ही रहे। इसके बाद विष्णु जी बलि का द्वारपाल बन गए। जब बहुत दिनों तक विष्णु जी मां लक्ष्मी के पास नहीं पहुंचे तो लक्ष्मी जी पाताल लोग पहुंच गई और बलि की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें विष्णु जी को मांग और लौटकर अपने लोक में पहुंच गए। तब से इस जगह को वंशी नारायण के रूप में पूजा जाने लगा।
वंशी नारायण मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसे छठी सदी में बनाया गया था। एक अन्य लोक मान्यता है कि इस मंदिर में भगवान नारद जी ने 364 दिन भगवान विष्णु की पूजा करते और एक दिन के लिए चले जाते थे ताकि because लोग पूजा कर सकें। स्थानीय लोग श्रावण पूर्णिमा पर भगवान नारायण का श्रृंगार भी करते हैं। रक्षाबंधन के दिन गांव के प्रत्येक घर से भगवान नारायण के लिए मक्खन आता है और इसे प्रसाद में मिलाकर भगवान को चढ़ाया जाता है। अगर if आप को इस मंदिर के दर्शन करना है तो आप रक्षाबंधन के दिन कर सकते है जो उत्तराखंड के चमोली जिले की उर्गम घाटी पर मौजूद है।
