BIKE AMBULANCE : आ गयी बाइक एंबुलेंस ! अब झटपट अस्पताल पहुंच सकेंगे मरीज 1 Great Innovation

Special Story By : Anita Tiwari , Dehradun

BIKE AMBULANCE भारत की युवा दुनिया भर में अपनी प्रतिभा का लोहा क्यों मनवाते हैं इसका जवाब जानना है तो ये खबर पढ़िए। आंध्र प्रदेश के गूटी के दो छात्रों ने हेल्थ केयर सिस्टम में अपने इनोवेशन से बेहतरीन योगदान दिया है.कॉलेज के थर्ड ईयर मैकेनिकल इंजीनियरिंग छात्रों ने एक ‘बाइक एंबुलेंस’ बनाई है. कॉलेज के दो दोस्त सुब्रमणयम यशवंत और एजाज़ अहमद की ये बाइक एंबुलेंस बेहद ख़ास और कारगर साबित हो सकती है।

BIKE AMBULANCE : आ गयी बाइक एंबुलेंस 

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  • BIKE AMBULANCE सुब्रमणयम यशवंत और एजाज़ अहमद का कहना है कि कोरोना के दौरान लोगों को एंबुलेंस के लिए दर-ब-दर भटकते देखकर उन्हें बहुत दुख होता था. वक़्त पर एंबुलेंस ना मिल पाने के कारण कई लोगों ने अपनी जान तक गंवा दी थी. उसी वक़्त उन्होंने अपने मित्र एजाज़ अहमद के साथ मिलकर समाज के लिए कुछ करने और समस्या को हल करने का प्रण लिया। वह आगे बताते हैं, ‘बाइक एंबुलेंस’ का आइडिया उन्हें अपने घर पर अन्य प्रयोग के दौरान आया.

BIKE AMBULANCE एक बाइक एंबुलेंस बनाने का खर्च

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  • BIKE AMBULANCE छात्रों के मुताबिक एक ‘बाइक एंबुलेंस’ बनाने में शुरुआती दिनों में बीस से तीस हज़ार का खर्च आता था. प्रारंभिक चरणों में इस एंबुलेंस में केवल बाइक थी, लेकिन फिर जैसे जैसे हम इसमें संशोधन करते गए इस एंबुलेंस की कीमत में भी इज़ाफ़ा हुआ है. अब ‘बाइक एंबुलेंस’ में संशोधन करके हमने इसमें स्ट्रेचर और पेशेंट मॉनिटरिंग सिस्टम भी लगा दिया है. एक पेशेंट मॉनिटरिंग सिस्टम की कीमत 40 से 42 हज़ार है इसलिए अब स्ट्रेचर और पेशेंट मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित ‘बाइक एंबुलेंस’ की कीमत करीबन पचास से साठ हज़ार है. लेकिन थोक निर्माण पर इसकी कीमत चालीस से बयालीस हज़ार के बीच पड़ेगी.

BIKE AMBULANCE बाइक एंबुलेंस की कीमत चालीस से बयालीस हज़ार के बीच

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  • BIKE AMBULANCE बाइक एंबुलेंस बताते हुए ये होनहार छात्र बताते हैं कि इस एंबुलेंस में बाइक के साथ स्ट्रेचर, दो सायरन, पेशेंट मॉनिटरिंग सिस्टम का प्रयोग किया गया है. बाइक की अधिकतम स्पीड 30-40 केएमपीएच है. बाइक चलाने के लिए पेट्रोल का प्रयोग किया जाता है. वहीं दो सायरन एक बैटरी से चलते हैं और पेशेंट मॉनिटरिंग सिस्टम में पहले से एक अलग बैटरी स्थापित होती है. पेशेंट मॉनिटरिंग सिस्टम और सायरन के लिए इस्तेमाल की गई दोनों बैटरी रिचार्जेबल होती हैं. सायरन के लिए इस्तेमाल की गई बैटरी की आयु एक से डेढ़ साल होती है और इसे हर 3-4 दिनों में मात्र 5-6 घंटे के लिए चार्ज करना पड़ता है. इस बाइक एंबुलेंस में इस्तेमाल किए गए सारे पार्ट्स यहीं की स्थानीय दुकानों में उपलब्ध हैं… 

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