आशीष तिवारी की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट –

BJP President Nishank राजनीती में सही टाइमिंग पर मारा गया शॉट गजब का नतीजा देता है , लेकिन जब पारी खत्म हो रही हो तो आक्रामक बल्लेबाजी भी जरुरी हो जाती है। ऐसे में पिंच हिटर की भूमिका कौन निभाएगा इसपर सबकी नज़र टिक जाती है। उत्तराखंड में भाजपा की राजनीती का बड़ा चेहरा है डॉ रमेश पोखरियाल निशंक , जिन्हे बीते लोकसभा चुनाव में टिकट से हाँथ गवाने के बाद जल्द ही नई जिम्मेदारी मिल सकती है. माना जा रहा है कि निशंक को संगठन में बड़ा पद देने पर पार्टी विचार कर रही है और इशारे बता रहे हैं कि हर सियासी फन के माहिर निशंक को जल्द ही प्रदेश में नई जिम्मेदारी देकर नया चुनावी समीकरण बनाया जा सकता है।
निशंक बन सकते हैं गेम चेंजर BJP President Nishank

उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के राज्यसभा सांसद निर्वाचित होने से ही ये संभावना बन गयी थी कि आलाकमान विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी की कमान किसी नए लेकिन अनुभवी हांथों को सौंपी जा सकती है. ऐसे में सूत्रों के मुताबिक, रमेश पोखरियाल निशंक को जल्द ही उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष की कुर्सी सौंपी जा सकती है. इसके पीछे मौजूदा हालात में कई बड़े कारण बताये जा रहे हैं।

अपने कार्यकाल के चार सालों में महेंद्र भट्ट का हाल कमोवेश वैसा ही रहा है जैसे धामी कैबिनेट में मंत्रियों का दिखाई दिया है। सिलक्यांरा सुरंग से लेकर धराली ,थराली ,चमोली आपदा तक और हिंदुत्व के एजेंडे में यूसीसी , मदरसा बोर्ड, अवैध मजार से लेकर जन जन की सरकार तक धामी की धमक ही प्रदेश में सुनाई दी है। लिहाज़ा पार्टी और सरकार में मुख्यमंत्री की इमेज ऐसे बनाई गयी कि बाकी नेपथ्य में ही नजर आते हैं।

बीते कुछ दिनों से भाजपा और संघ के अंदरखाने तथाकथित चुनावी सर्वे और उसके रिजल्ट ने पार्टी की नींद उड़ा रखी है। मीडिया से लेकर सियासी कमरों में भाजपा की 22 से 25 सीटों पर बढ़त बतायी जा रही है जिसके बाद हैट्रिक का जश्न मनाने का ख्वाब देख रहे भाजपा संगठन को अब बड़े बदलाव और नए समीकरण की बेहद दरकार है। ऐसे में दूसरे गुट के नाम से जिन छत्रपों का जिक्र गाहे बगाहे पार्टी में होता रहता है उसके ही एक चेहरे को आगे करने से पार्टी को मुनाफ़ा दिखाई दे रहा है।

समर्थकों के एक धड़े का दावा है कि अगर निशंक को उत्तराखंड में संगठन का मुखिया बनाया जाता है तो उत्तराखंड भाजपा को और भी ज्यादा मजबूती मिलेगी. इसके कई कारण भी है जैसे निशंक का संगठनात्मक चुनावी प्रबंधन , सन्तुलित बयानबाजी , मौके की नजाकत भांपना , रूठे को मनाने में निजी भूमिका , लोगों से सीधे जुड़ने का हुनर और मीडिया में एक सॉफ्ट इमेज जैसे पॉइंट्स को काफी मजबूत माना जाता है. इसीलिए पार्टी हाईकमान संगठन की कमान उन्हें देने पर विचार कर रही है।

बयानबाजी और हनकबाजी बदलाव की वजह
अध्यक्ष की कुर्सी पर संभावित इस बदलाव के पीछे कारण भी खुद दबी जुबान पार्टी के लोग बताते हैं। प्रवक्ता कक्ष से लेकर यमुना कॉलोनी के बंगलों तक कानाफूसी होती है कि अध्यक्ष के ब्यान पार्टी को अक्सर असहज करते रहे हैं जैसे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए महेंद्र भट्ट के मुंह से निकले एक शब्द को लेकर विपक्ष और उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने देशभर के युवाओं और छात्रों का अपमान किया है.वहीँ बेरोजगार संघ कहता है कि यह पहला अवसर नहीं था जब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने आंदोलनरत युवाओं पर विवादित टिप्पणी की हो. उनके मुताबिक, प्रदेश में पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन के दौरान भी महेंद्र भट्ट ने युवाओं को नक्सली और माओवादी बताया था. इससे पहले भी आंदोलन कर रहे युवाओं के लिए आपत्तिजनक टिप्पणियां कर चुके हैं। इसके पहले हल्द्वानी में हर घर तिरंगा अभियान कार्यक्रम में उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा था कि जिस घर पर तिरंगा नहीं होगा उस घर की फोटो भेजें. उन्होंने कहा कि जिस घर में तिरंगा लहराता हुआ नहीं दिखाई दिया, उस घर पर देश विश्वास नहीं कर सकता है.

हांलाकि भाजपा संगठन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन जिस तरह से बीते कुछ दिनों में डॉ निशंक की सक्रियता और पार्टी के बड़े नेताओं से मिलने जुलने का सिलसिला तेज हुआ है उसकी एक झलक 15 अगस्त के दिन भी दिखाई दी जब वो मुख्यमंत्री धामी के साथ पार्टी दफ्तर से लेकर झण्डारोहड के मंच तक दिखाई दिए हैं। अब इसको सियासत की हवा को पढ़ने वाले बताते हैं कि धामी और निशंक की केमिस्ट्री ने काम भी शुरू कर दिया है क्योंकि दोनो को मालूम है कि भाजपा की तीसरी बार बहुमत वाली सरकार बनाने की जिम्मेदारी सरकार और संगठन दोनों पर बराबर है , ऐसे में टिकट बंटवारे और टिकट काटने के साथ साथ अपने अपने गुट को ज्यादा से ज्यादा टिकट देने की रस्साकसी भी जरूर होगी। खबर पार्टी सूत्रों पर आधारित है।

