देहरादून से अनीता तिवारी की रिपोर्ट –

Brave firemen Uttarakhand क्या आप जानते हैं आज 14 अप्रैल को क्यों मनाया जाता है अग्निशमन सेवा सप्ताह ? क्या आपको मालूम है इसके पीची की सच्ची कहानी ? अगर नहीं जानते हैं तो हम आपको बता रहे हैं। आज उत्तराखंड की वरिष्ठ आईपीएस ऑफिसर और पौड़ी की एसएसपी श्वेता चौबे ने दिवंगत फायर कर्मियों को नमन करते हुए उस इतिहास को याद किया जिसके बाद देश आज के दिन अग्निशमन सेवा सप्ताह मानता है और बहादुर पुलिस कर्मियों को श्रद्धांजलि देता है।
Brave firemen Uttarakhand “अग्निशमन सेवा सप्ताह” का किया शुभारम्भ

Brave firemen Uttarakhand इसी कड़ी में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्वेता चौबे के निर्देशन में कर्तव्य का पालन करते हुए अपने प्राणों की परवाह किए बगैर देश के नागरिकों की सुरक्षा करते हुए देश की आन बान और शान के लिए शहीद होने वाले दिवंगत फायर सर्विस कार्मिकों को फायर स्टेशन कोटद्वार में अपर पुलिस अधीक्षक कोटद्वार शेखर चन्द्र सुयाल , फायर कार्मिकों, फायर यूनिट श्रीनगर में क्षेत्राधिकारी श्रीनगर श्याम दत्त नौटियाल मय फायर कार्मिकों एवं फायर स्टेशन पौड़ी में समस्त फायर कार्मिकों द्वारा श्रद्धासुमन श्रद्धांजलि देकर 2 मिनट का मौन धारण किया गया।

Brave firemen Uttarakhand इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि 14 अप्रैल 1944 को बॉम्बे बन्दरगाह में एक जहाज पर अचानक आग लग गई, जिसमें काफी मात्रा में विस्फोटक एवं युद्ध उपकरण रखे हुये थे। इस भीषण अग्निकाण्ड पर काबू पाने के दौरान 66 अग्निशमन कार्मिकों ने अपने प्राणों की आहूति दी थी। तब से भारत सरकार ने 14 अप्रैल को “अग्निशमन सेवा सप्ताह” के रुप में मनाने का निर्णय लिया गया था। जो कालान्तर में 14-20 अप्रैल तक “अग्निशमन सेवा सप्ताह” के रूप में मनाया जाता है। जिसमें पूरे सप्ताह आगजनी की घटनाओं की रोकथाम एवं बचाव के सम्बन्ध में व्यासायिक/औद्योगिक संस्थानों, फैक्ट्रियों, होटलों, अस्पतालों एवं स्कूलों आदि में जाकर आमजन को जागरूक किया जाता है।

Brave firemen Uttarakhand उन्होंने बताया कि जनपद पौड़ी गढ़वाल में विगत वर्ष-2022 में कुल 105 आगजनी की घटनायें घटित हुयी, जिनमें से 90 वनाग्नि की घटनायें तथा 15 अन्य अग्निकाण्ड की घटनायें घटित हुयी थी। जनपद फायर सर्विस कार्मिकों द्वारा उक्त स्थानों पर आग लगने की सूचना प्राप्त होते ही अविलम्ब मय फायर उपकरणों के घटना स्थल पर पहुँचकर कड़ी मशक्कत एवं सूझबूझ के बाद आग पर काबू पाया गया। जिससे बड़े हादसे होने से टल गये और बड़ी जन-धन की हानि होने से बच गयी।
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