Bubble Tea चाय आजकल लोगों के लिए फैशन बन चुका है। ऐसा माना जाता है कि चाय शराब के नशे से भी ज्यादा खराब है। दरअसल, आजकल हर गली मोहल्ले में चाय की एक छोटी सी टपरी खोलकर वहां पर नव युवकों की काफी भीड़ देखने को मिलती है। चाय के शौकिन लोग नए- नए तरह के फ्लेवर की चाय टेस्ट करना पसंद करते हैं। इसी कड़ी में कोरोना संकट के दौरान लोगों के बीच बबल टी प्रचलित हुआ था ।
Bubble Tea बबल टी की शुरुआत 1980 में हुई

- बता दें यह चाय कोविड के दौरान वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय हुई थी। इसे अमुमन बोबा टी और पर्ल मिल्क टी के नाम से भी जाना जाता है और साल 2020 में एक नए इमोजी के रूप में इसकी आधिकारिक घोषणा की गई। तो आइए विस्तार से जानते हैं इस चाय के बारे में…

- Bubble Tea बबल टी एक तरह का पेय पदार्थ है, जो कि कोराना महामारी के दौरान लोगों में काफी लोकप्रिय हुआ था, और आज भी ट्रेंड में बना हुआ है।बबल टी का इतिहास काफी पुराना है। बबल टी को पीने की शुरुआत 1980 में हुई थी। ये काफी लंबे समय से ताइवान में पी जा रही है। यदि आप बबल टी का सेवन करते हैं तो इसे पीने से लीवर और ब्रेस्ट तथा प्रोटेस्ट और कोलोरेक्टल कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कम होता है।

- Bubble Tea पहले बबल टी बनाने में छोटे टैपिओका पर्ल का इस्तेमाल होता था इसके बाद ब्लैक, ग्रीन या ऊलोंग चाय में मिलाई जाती है। आजकल कई स्टोर्स पर बबल टी मिलती है। हालांकि यह मूल रूप से ताइवान की है, लेकिन कुछ स्टोर्स इसमें कई दूसरे देशों के फ्लेवर मिलाकर दे रहे हैं। जैसे गुड़हल के फूल, केसर, इलायची और गुलाबजल के फ्लेवर्स के साथ भी यह पॉपुलर हो रही है। टैपिओका पर्ल कसावा पौधे की जड़ों में पाए जाते हैं। ऑनलाइन स्टोर्स पर टैपिकोआ आसानी से उपलब्ध हैं।

- Bubble Tea बबल टी की जड़ें पारंपरिक ताइवानी चाय संस्कृति में हैं, जो बहुत पहले की हैं। उन्नीसवीं सदी में अमेरिका में चाय वहां के मुख्य पेय में शामिल थी। वह लोगों के जीवन का हिस्सा थी। आइस टी का यह स्वाद ना सिर्फ लोगों को पसंद आया, बल्कि देखते ही देखते कई और लोगों ने इस आइस टी को बेचना शुरू कर दिया। ऐसा माना जाता है कि आइस टी की ईजाद के बाद दुनिया के कोनों- कोनों में यह प्रसिद्ध होती चली गई। आज हम बात पर्ल टी या बबल टी की कर रहे हैं। इसके बैकग्राउंड में भी आइस टी ही है।
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