Special Story by : Anita Tiwari , Dehradun
Cupping therapy इन दिनों महिलाएं अपने लुक और खूबसूरती को लेकर काफी कॉन्शस हो गई हैं। बसूरत और जवां दिखने के लिए वह क्या-क्या नहीं करती। आजकल कई ऐसे ब्यूटी ट्रीटमेंट और थेरपीज भी मौजूद हैं जो आपको खूबसूरत बनाने के साथ-साथ स्किन को जवां और हेल्दी रखने का दावा करते हैं। लेकिन इनमें से ज्यादातर थेरेपीज में काफी दर्द होता है। बॉलिवुड दीवाज से लेकर नॉर्मल लोग भी अपनी खूबसूरती निखारने के लिए दर्द सहने को तैयार हैं और इन थेरपीज को करवाते हैं। यहां हम बात कर रहे् हैं कपिंग थेरेपी की। तो आखिर क्या है कपिंग और इसे कैसे किया जाता है, यहां जानें…
Cupping therapy क्या है कपिंग थेरपी

- Cupping therapy कपिंग थेरपी के लिए शीशे का कप इस्तेमाल करके वैक्यूम पैदा किया जाता है जिससे कि कप बॉडी से चिपक जाए। अब इसके लिए मशीन का इस्तेमाल होता है। कपिंग करने के तीन से पांच मिनट बाद दूषित खून जमा हो जाता है। जमा हुए गंदे खून को शरीर से निकाल दिया जाता है। इस थेरेपी के बाद स्किन ग्लो करने लगती है। इस थेरेपी में फेस पर दोनों गाल, माथे और चिन पर कपिंग की जाती है।

- अगर हेल्थ से जुड़ी समस्या के लिए कपिंग थेरेपी ली जाती है तो जिस पॉइंट पर बीमारी की पहचान होती है वहीं पर कपिंग की जाती है। अगर बीमारी अपने शुरुआती स्टेज में हो तो दो सीटिंग में बीमारी खत्म हो जाती है। कपिंग थेरेपी में सबसे पहले ऐक्यूपंचर स्पेशलिस्ट रुई के गोले को शराब में भिगोकर कांच के छोटे कप में रखकर इसमें आग लगा देते हैं। इसके बाद आग को बुझाकर गर्म कप को स्किन पर रखकर कुछ देर के लिए छोड़ दिया जाता है।

Cupping therapy क्या है कपिंग थेरप - Cupping therapy इस थेरेपी के दौरान एक्यूपंचर स्पेशलिस्ट कॉटन के गोले को पहले शराब में भिगोकर कांच के छोटे कप में रखकर आग लगा देते हैं। इसके बाद आग को बुझाकर उस गर्म बर्तन को तुरंत स्किन पर रख दिया जाता है। इससे स्किन टिशू को ऑक्सीजन मिलती है, जिससे त्वचा ग्लोइंग दिखाई देती है। बॉलिवुड ऐक्ट्रेस दिशा पाटनी और रिएलिटी शो रोडीज से करियर शुरू करने वाली अभिनेत्री और वीडियो जॉकी ‘बानी जे’ भी पिछले दिनों कपिंग थेरेपी कराने के लिए चर्चा में थीं।

Cupping therapy हेल्थ से जुड़ी समस्याओं में भी राहत
- Cupping therapy महिलाएं कपिंग थेरेपी मुख्य रूप से खूबसूरती निखारने के लिए करती हैं। लेकिन ये थेरेपी केवल खूबसूरती बढ़ाने का काम नहीं करती बल्कि इस थेरेपी से हेल्थ से जुड़ी कई समस्याओं में भी आराम मिलता है। कमर दर्द, स्लिप डिस्क,सर्वाइकल डिस्क, पैरों की सूजन और झनझनाहट जैसी समस्याओं में यह थेरेपी काफी फायदेमंद है। इस थेरेपी से रिलैक्ससेशन और तनाव से आराम मिलता है। इससे शरीर में बल्ड सर्कुलेशन सही तरीके से होता है। इस थेरेपी के तहत हेल्थ से जुड़ी समस्या को खत्म करने के लिए खून में संतुलन बनाकर चलते हैं।
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