ED Raid: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक वेबकैम स्ट्रीमिंग स्टूडियो चलाने वाले कपल के घर पर छापा मारा। पता चला कि यह कपल एडल्ट कंटेंट शूट करता था। रिपोर्ट के अनुसार, PTI के सूत्रों ने बताया कि कपल ने कथित तौर पर अपने घर पर वेबकैम पर मॉडलों के एडल्ट वीडियो शूट किए। इन वीडियो को उन्होंने साइप्रस स्थित एक इंटरनेशनल पोर्नोग्राफिक कंपनी को बेचा।
इसके बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने कुछ मॉडलों के बयान भी दर्ज किए। ये वे मॉडल थीं, जो इस कपल के लिए वीडियो रिकॉर्ड करती थीं और कई वीडियो में नजर आई थीं। ED ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत छापेमारी(ED Raid)की। रिपोर्ट के अनुसार, ED सबडिजी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड नामक एक कंपनी के खिलाफ जांच कर रही है।

एडल्ट वेबसाइट के लिए शूट करते थे वीडियो
इस कंपनी का मालिकाना हक नोएडा में रहने वाले इस कपल के पास है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह कपल कथित तौर पर साइप्रस स्थित कंपनी टेक्नियस लिमिटेड के लिए अपने घर से एक एडल्ट वेबकैम स्ट्रीमिंग स्टूडियो संचालित कर रहा था। टेक्नियस लिमिटेड पोर्न वेबसाइट और वयस्क वेबकैम वेबसाइट साइटें चलाता है।
कपल नोएडा के फ्लैट में चलाता था पोर्नोग्राफी रैकेट
विदेश से हो रही अवैध फंडिंग की जांच के दौरान जांच एजेंसी इन गिरोह तक पहुंची. जांच एजेंसी ने इस मामले में कई बड़े खुलासे हुए हैं. इस गिरोह को एक कपल चला रहा था. यह कपल ने नोएडा के एक फ्लैट में अवैध स्टूडियो बनाकर पोर्न वीडियो शूट कराता था. पोर्नोग्राफी रैकेट कैसे कर रहा था काम. इसका खुलासा किया गया है. सूत्रों के मुताबिक उज्जवल किशोर और नीलू श्रीवास्तव नाम के पति-पत्नी पिछले पांच साल से यह सिंडिकेट चला रहे थे. ये कपल साइप्रस स्थित टेक्नियस लिमिटेड नाम की कंपनी के लिए काम कर रहा था, जो Xhamster और Stripchat जैसी पोर्न साइट्स चलाती है.

Facebook के जरिए होती थीं लड़कियां हायर
ये सिंडिकेट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के जरिए काम कर रहा था.सूत्रों के मुताबिक आरोपी ने फेसबुक पर chapto.com नाम का एक पेज बनाया था.जिसमें लड़कियों को मॉडलिंग के ऑफर और मोटी सैलरी का लालच दिया जाता था. दिल्ली-एनसीआर की कई लड़कियों ने इस पेज के जरिए कपल से संपर्क किया. जब वे नोएडा के फ्लैट पर ऑडिशन के लिए पहुंचीं तो आरोपी महिला ने उनको पोर्न रैकेट का हिस्सा बनने का प्रस्ताव दिया. आरोपी लड़कियों को 1 से 2 लाख रुपये महीने कमाने का लालच देते थे. कई लड़कियां पैसे के लालच में आकर इस रैकेट का हिस्सा बन भी गईं.
कैसे काम करती थीं लड़कियां?
ED सूत्रों के मुताबिक, नोएडा में फ्लैट पर जब रेड मारी गई तो वहां उन्हें इस रैकेट में काम करने वाली 3 लड़कियां भी मिली, जो उस वक़्त ऑनलाइन जुड़ी हुई थी. ED ने इन तीनों लड़कियों के भी बयान दर्ज किए है. जांच एजेंसी के मुताबिक ऑनलाइन पोर्नोग्राफी के दौरान लड़कियों के भी अलग-अलग तरीके के टास्क होते थे. मतलब कस्टमर जितना पैसा भेजता था उसी हिसाब से लड़कियां एक्ट करती थीं. जैसे, हाफ फेस शो (जहां चेहरा आधा दिखता था), फुल फेस शो (जहां पूरा चेहरा दिखता था), न्यूड कैटेगरी (जिसमें पूरी तरह नग्नता होती थी) आदि.
सर्विस लेने के लिए ग्राहकों को टोकन खरीदने पड़ते थे. इसके लिए उनसे अलग-अलग रकम वसूली जाती थी. इस कमाई का 75% हिस्सा पति-पत्नी के पास जाता था, जबकि 25 प्रतिशत हिस्सा लड़कियों को दिया जाता था.
कैसे मिलती थी पोर्नोग्राफी की पेमेंट?
कस्टमर का पैसा ऑनलाइन पोर्नोग्राफी रैकेट चलाने वाले लोगों के पास सबसे पहले क्रिप्टो करंसी के जरिए आता था. उसके बाद कपड़े गए पति-पत्नी के पास आता था. जांच एजेंसियों को शक है कि इस रैकेट के जरिए अब तक हजारों लड़कियां हायर की जा चुकी होंगी. अधिकारियों का मानना है कि देशभर में इस तरह के ऑनलाइन रैकेट की संख्या लाखों में हो सकती है. ED ने जब नोएडा के फ्लैट पर छापा मारा, तो वहां एक प्रोफेशनल वेबकैम स्टूडियो मिला. फ्लैट के ऊपरी हिस्से को एक हाई-टेक सेटअप में बदला गया था, जहां से ऑनलाइन कंटेंट प्रसारित किया जाता था.

